Mastercard, MakeMyTrip: AI की दौड़ में कौन आगे? ट्रैवल बुकिंग का बदल रहा है 'मास्टरप्लान'!

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AuthorMehul Desai|Published at:
Mastercard, MakeMyTrip: AI की दौड़ में कौन आगे? ट्रैवल बुकिंग का बदल रहा है 'मास्टरप्लान'!
Overview

ट्रैवल इंडस्ट्री में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का जलवा देखने को मिल रहा है। Mastercard, MakeMyTrip, और ixigo जैसी दिग्गज कंपनियां AI-संचालित प्लेटफॉर्म और टूल्स बनाने में भारी निवेश कर रही हैं। इस रेस का मकसद डिजिटल ट्रैवल स्पेस पर अपना कंट्रोल बढ़ाना है।

AI के सहारे ट्रैवल बुकिंग का नया दौर

Artificial Intelligence (AI) ट्रैवल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में क्रांति ला रही है। ग्राहक अब सफर की प्लानिंग और बुकिंग पहले से कहीं ज्यादा आसान तरीके से कर पा रहे हैं। Mastercard और MakeMyTrip के 'Lifestyle Navigator' जैसे कोलैबोरेशन AI को सिर्फ एक टूल से कहीं आगे ले जा रहे हैं। ये कंपनियां अब इंटीग्रेटेड AI सिस्टम बना रही हैं, जो यूजर्स को एक कम्प्लीट डिजिटल असिस्टेंट की तरह गाइड करेंगे। ऐसे में, टेक्नोलॉजी में निवेश सीधे मार्केट पोजीशन और भविष्य की कमाई से जुड़ गया है।

AI डोमिनेंस की होड़

ट्रैवल सेक्टर में AI लीडरशिप के लिए जबरदस्त मुकाबला चल रहा है। Mastercard ने MakeMyTrip के साथ मिलकर 'Lifestyle Navigator' लॉन्च किया है, जिसमें MakeMyTrip के AI असिस्टेंट 'Myra' और Mastercard की AI क्षमताओं को जोड़ा गया है। इसका लक्ष्य यूजर्स को पर्सनलाइज्ड ऑफर देना है। यह Mastercard का पहला ग्लोबल यूज है, जिसकी शुरुआत भारत से हो रही है।

वहीं, MakeMyTrip OpenAI के साथ मिलकर अपने ऐप और 'Myra' असिस्टेंट को और बेहतर बना रहा है, ताकि बातचीत से सीधे बुकिंग तक का सफर आसान हो। ixigo भी OpenAI के साथ अपनी साझेदारी गहरी कर रहा है, अपने प्लेटफॉर्म्स जैसे ConfirmTkt और Abhibus पर AI एजेंट्स और वर्कफ्लो बनाने के लिए।

ये कंपनियां अब Google जैसे दिग्गजों के सीधे मुकाबले में हैं, जो अपने सर्च इंजन को AI ट्रैवल असिस्टेंट में बदल रहा है। Google AI Mode के जरिए लंबी, बातचीत वाली सर्च को बढ़ावा दे रहा है, जिससे पारंपरिक ट्रैवल एजेंट्स और तुलना साइट्स को चुनौती मिल रही है। Booking.com और Expedia Group जैसी कंपनियां भी AI टूल्स पर तेजी से काम कर रही हैं। Expedia ग्रुप AI का इस्तेमाल इंटरनली और 'Hotels.com' जैसे प्रोडक्ट्स में कर रहा है। Expedia के अनुसार, AI-ड्रिवन प्लेटफॉर्म्स एक बड़ी कॉम्पिटिटिव थ्रेट हैं। MakeMyTrip के CEO राजेश मैगो ने 8.5 करोड़ से ज्यादा कंज्यूमर्स के अपने डेटा को AI के लिए इस्तेमाल करने की अहमियत बताई है, ताकि बेजोड़ पर्सनलाइजेशन दिया जा सके।

हॉस्पिटैलिटी में AI का बढ़ता दखल

बुकिंग साइट्स के अलावा, हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री भी AI का इस्तेमाल अपने ऑपरेशंस और गेस्ट्स को बेहतर समझने के लिए कर रही है। Shruti Shibulal का Anticipatory प्लेटफॉर्म होटeliers के लिए AI एजेंट्स ऑफर करता है, जो रेवेन्यू मैनेजमेंट, ऑपरेशंस और गेस्ट इनसाइट्स में मदद करते हैं। RateGain भी अपने सॉफ्टवेयर में AI को एम्बेड कर रहा है, जिससे रेट और अवेलेबिलिटी अपडेट्स के साथ-साथ सेल्स, प्राइसिंग और गेस्ट एंगेजमेंट में सुधार हो रहा है।

ऑनलाइन ट्रैवल एजेंट्स (OTAs) के लिए जोखिम

ट्रैवल में AI का तेजी से प्रसार ऑनलाइन ट्रैवल एजेंट्स (OTAs) के लिए बड़े खतरे पैदा कर रहा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि जनरेटिव AI, बुकिंग प्रोसेस को एक सिंपल चैट में बदलकर प्रॉफिट मार्जिन को कम कर सकता है। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, AI शिफ्ट, Google के मार्केट में आने से भी ज्यादा डिस्टर्प्टिव साबित हो सकता है।

इस डर का असर स्टॉक मार्केट पर भी दिख रहा है, जहां TripAdvisor और Booking Holdings के शेयर AI के चलते गिरे हैं, जबकि पारंपरिक होटल कंपनियों के शेयर बढ़े हैं।

तैयारी की बात करें तो, 96% कंपनियां AI पर खर्च बढ़ाने की योजना बना रही हैं, लेकिन केवल 12% ही बड़े इम्प्लीमेंटेशन के लिए तैयार महसूस करती हैं। वहीं, 35% कंपनियां गेस्ट इंटरेक्शन के लिए AI का इस्तेमाल कर रही हैं। डेटा इंटीग्रेशन की कमी एक बड़ी चुनौती है, जो प्रभावी AI उपयोग में बाधा डालती है। नए AI बुकिंग टूल्स से फ्रॉड (धोखाधड़ी) का खतरा भी बढ़ सकता है।

AI इन ट्रैवल का भविष्य

AI के बढ़ते एडॉप्शन के साथ, इंडस्ट्री अब फाइनेंशियल बेनिफिट्स पर फोकस कर रही है। 2026 तक होटल्स में AI के व्यापक उपयोग से प्रॉफिट में बढ़ोतरी की उम्मीद है। अनुमान है कि वैश्विक स्तर पर 35% ट्रैवल सर्च AI के जरिए होंगी। फोकस हाईली पर्सनलाइज्ड एक्सपीरियंस देने, कॉम्प्लेक्स टास्क को ऑटोमेट करने और कंज्यूमर की डिमांड को पूरा करने पर है। ट्रैवल इकोसिस्टम और भी कनेक्टेड हो जाएगा, जिसमें AI एयरलाइंस, रिसॉर्ट्स और आकर्षणों को एक स्मार्ट नेटवर्क में जोड़ेगा। डेटा इंटीग्रेशन, टैलेंट और ROI साबित करने जैसी चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं।

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