📉 वित्तीय नतीजों का आईना
MPS Infotecnics Limited के तिमाही नतीजे निवेशकों के होश उड़ाने वाले हैं। 31 दिसंबर, 2025 को समाप्त तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू पिछले साल की समान अवधि के ₹11.11 Lacs की तुलना में 43.6% गिरकर महज ₹6.26 Lacs पर आ गया। वहीं, कंपनी को नेट लॉस (Net Loss) ₹87.22 Lacs (या ₹0.87 Cr) का हुआ, जो पिछले साल की इसी तिमाही के ₹84.37 Lacs (₹0.84 Cr) के घाटे से ज्यादा है।
नौ महीनों की बात करें तो, 31 दिसंबर, 2025 तक कंपनी का रेवेन्यू 24.2% घटकर ₹27.32 Lacs रहा, जो पिछले साल ₹36.05 Lacs था। इस दौरान नेट लॉस भी बढ़कर ₹268.86 Lacs (₹2.69 Cr) हो गया, जबकि पिछले साल यह ₹244.79 Lacs (₹2.45 Cr) था।
❓ ऑडिटर की गंभीर आपत्तियां
कंपनी के ऑडिटर, Nemani Garg Agarwal & Co., ने अपनी रिपोर्ट में कई गंभीर चिंताएं जताई हैं, जोMPS Infotecnics के वित्तीय स्वास्थ्य पर सवाल खड़े करती हैं। ऑडिटर ₹56.44 Cr के सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, ₹5.34 Cr के सॉफ्टवेयर राइट्स और ₹62.22 Cr के ओपनिंग स्टॉक ऑफ सोर्स कोड जैसी इनटैंगिबल एसेट्स का सही मूल्यांकन करने में असमर्थ रहे। इन पर कोई इम्पेयरमेंट प्रोविजन भी नहीं किया गया है, क्योंकि मूल्यांकन रिपोर्ट उपलब्ध नहीं हैं।
इसके अलावा, ₹61.75 Cr की सब्सिडियरी इन्वेस्टमेंट, जिसमें ₹61.69 Cr का गुडविल (Consolidated) शामिल है, पूरी तरह से नॉन-ऑपरेशनल हैं और इन एंटिटीज का ऑडिट भी नहीं हुआ है। पुर्तगाल में ₹34.79 Cr का बैंक बैलेंस, जो 2008-09 से कानूनी विवाद और बैंक एडजस्टमेंट के अधीन है, को भी सही से प्रोविजन नहीं किया गया है, जिससे बैलेंस शीट ओवरस्टेटेड लग रही है।
ऑडिटर ने ₹222.11 Cr के 'अन्य लोन और एडवांसेज' की वसूली क्षमता पर भी सवाल उठाए हैं, क्योंकि उनके लिए कोई उचित शर्तें प्रदान नहीं की गई थीं। साथ ही, छह महीने से ज्यादा पुराने ₹16.59 Cr (Standalone) / ₹34.83 Cr (Consolidated) के सरी डेटर्स को भी बिना पर्याप्त बैड डेट प्रोविजनिंग के अच्छा मान लिया गया है।
🚨 नियामक और गवर्नेंस का भारी संकट
वित्तीय आंकड़ों के अलावा, MPS Infotecnics गंभीर अनुपालन (Compliance) और गवर्नेंस की समस्याओं से भी जूझ रही है। NSE पर ₹28.08 Lacs और BSE पर ₹24.02 Lacs की आउटस्टैंडिंग लिस्टिंग फीस, साथ ही ₹124.99 Lacs + ₹17.49 Lacs के कस्टोडियल चार्जेस के कारण प्रमोटरों के डीमैट अकाउंट फ्रीज कर दिए गए हैं और कंपनी का डेटा एक्सेस भी ब्लॉक हो गया है। SEBI ने कंपनी पर ₹25 Lacs का जुर्माना भी लगाया है, जिसकी ब्याज प्रोविजनिंग भी अधूरी है।
गवर्नेंस के मोर्चे पर, कंपनी ने FY2022-23, FY2023-24 और FY2024-25 के लिए एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) तक आयोजित नहीं की है। एनुअल रिपोर्ट्स और शेयरहोल्डिंग पैटर्न भी फाइल नहीं किए गए हैं, जिसके चलते और पेनाल्टी लगने की आशंका है। बोर्ड कंपोजीशन और सीईओ/एमडी की नियुक्ति में भी महत्वपूर्ण देरी हो रही है।
🚩 Delisting का खतरा और निवेशकों के लिए चेतावनी
इन सब गंभीर खामियों के चलते, NSE और BSE दोनों ने MPS Infotecnics को Show Cause Notices जारी कर Delisting की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कंपनी को फरवरी 2026 तक बकाया ड्यूज़ क्लियर करने और मार्च 2026 तक नॉन-कम्प्लायंस को ठीक करने का निर्देश दिया गया है।
फिलहाल, MPS Infotecnics का भविष्य काफी अनिश्चित नजर आ रहा है। Delisting का मतलब होगा कि इसके शेयर बाजार में ट्रेड नहीं हो पाएंगे, जिससे खुदरा निवेशकों के लिए यह पैसा डूबने जैसा हो सकता है। ऑडिटर की रिपोर्ट में सामने आई समस्याएं दर्शाती हैं कि कंपनी के इंटरनल कंट्रोल्स बेहद कमजोर हैं, एसेट्स की वैल्यू संदिग्ध है और अनडिस्क्लोज़्ड लायबिलिटीज भी हो सकती हैं। कंपनी के 'गोइंग कंसर्न' स्टेटस पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। निवेशकों को इस शेयर में अत्यधिक सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है, क्योंकि कंपनी के स्टॉक एक्सचेंज पर बने रहने और कारोबार जारी रखने की क्षमता पर गंभीर संदेह है।