L&T का बड़ा दांव: भारत की अपनी AI चिप बनाने की तैयारी, Tech Self-Reliance की ओर कदम

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
L&T का बड़ा दांव: भारत की अपनी AI चिप बनाने की तैयारी, Tech Self-Reliance की ओर कदम
Overview

Larsen & Toubro Semiconductor Technologies (LTSCT), L&T-Vyoma, और BharatGen Technology Foundation ने मिलकर भारत के लिए एक संपूर्ण राष्ट्रीय AI कंप्यूटिंग सिस्टम बनाने के लिए पांच साल का समझौता किया है। यह पार्टनरशिप कस्टम AI चिप्स, स्वदेशी AI मॉडल और डेटा सेंटर की सुविधाओं को एक साथ लाएगी, जो भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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भारत के अपने AI भविष्य का निर्माण

भारत ने एक पांच साल के मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) के जरिए अपने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इकोसिस्टम को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। Larsen & Toubro Semiconductor Technologies (LTSCT), Larsen & Toubro-Vyoma, और BharatGen Technology Foundation एक व्यापक राष्ट्रीय AI कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म बनाने के लिए साझेदारी कर रहे हैं। इस पहल का उद्देश्य भारत-निर्मित चिप्स, AI मॉडल और डेटा सेंटर तकनीक का उपयोग करना है, ताकि विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम हो, डेटा सुरक्षा बढ़े और स्वतंत्र AI विकास को बढ़ावा मिले।

AI सिस्टम के मुख्य घटक

LTSCT राष्ट्रीय AI कार्यों, जिसमें बड़े भाषा मॉडल (LLMs) शामिल हैं, के लिए विशेष AI चिप्स और कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म के विकास का नेतृत्व करेगा। इस विशेष हार्डवेयर का लक्ष्य बेहतर ऊर्जा दक्षता और तेज प्रोसेसिंग प्रदान करना है, जो बड़े पैमाने पर AI ऑपरेशंस के लिए आवश्यक है। Larsen & Toubro-Vyoma तमिलनाडु के कांचीपुरम में अपने 30 MW के AI-रेडी डेटा सेंटर सहित अपनी बड़ी डेटा सेंटर क्षमता का योगदान देगा, ताकि आवश्यक कंप्यूटिंग शक्ति प्रदान की जा सके। Ministry of Electronics and Information Technology (MeitY) और IndiaAI Mission के समर्थन से, BharatGen Technology Foundation मुख्य AI कार्यों को परिभाषित करेगा और बड़े पैमाने पर उपयोग के लिए सिस्टम को ऑप्टिमाइज़ करेगा। BharatGen को राष्ट्रीय AI मॉडल विकसित और तैनात करने के लिए मंजूरी मिल गई है।

ग्लोबल AI रेस और बाजार का आकार

वैश्विक AI चिप बाजार में जबरदस्त वृद्धि होने की उम्मीद है, जो 2025 में $58.2 बिलियन से बढ़कर 2035 तक लगभग $1.1 ट्रिलियन तक पहुंचने का अनुमान है। यह 33.9% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) का प्रतिनिधित्व करता है। NVIDIA जैसी बड़ी कंपनियां, जिनके पास 2025 में बाजार का 32.4% से अधिक हिस्सा था, इंटेल, एएमडी, क्वालकॉम और मीडियाटेक के साथ मिलकर इस स्पेस पर हावी हैं। भारत AI इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश कर रहा है, जिसका लक्ष्य रिलायंस और अडानी जैसी कंपनियों की प्रमुख प्रतिबद्धताओं के साथ सामूहिक रूप से $200 बिलियन से अधिक खर्च करना है। हालांकि, पूर्ण AI स्वतंत्रता हासिल करने में बड़ी कठिनाइयां हैं। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं, कच्चे माल से लेकर उन्नत चिप्स तक, में प्रमुख बाधाओं के कारण पूर्ण AI संप्रभुता हासिल करना अक्सर बहुत मुश्किल माना जाता है।

AI स्वतंत्रता प्राप्त करने की चुनौतियां

एक आत्मनिर्भर AI भविष्य का विचार आकर्षक है, लेकिन आगे का रास्ता कई जोखिमों से भरा है। कस्टम AI चिप्स और उन्नत AI मॉडल विकसित करने के लिए भारी निवेश और वर्षों के रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) की आवश्यकता होती है, जहाँ वैश्विक नेताओं के पास एक बड़ी बढ़त है। पूर्ण स्वतंत्रता की तलाश से अलग-थलग सिस्टम बन सकते हैं, लागत बढ़ सकती है और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करना कठिन हो सकता है। जबकि भारत की 30 MW डेटा सेंटर क्षमता महत्वपूर्ण है, इसकी तुलना बड़े वैश्विक डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स से करनी होगी। भारत की अपनी आक्रामक विस्तार योजनाएं भी हैं, जिसमें रिलायंस से $110 बिलियन का निवेश शामिल है।

जोखिम और L&T की स्थिति

इस रणनीति में महत्वपूर्ण चुनौतियां हैं। LTSCT, जिसका लक्ष्य एक उत्पाद-केंद्रित कंपनी बनना है, अत्यधिक प्रतिस्पर्धी सेमीकंडक्टर डिजाइन क्षेत्र में एक नया खिलाड़ी है। इसकी मूल कंपनी, Larsen & Toubro (LT), रेटिंग संबंधी मुद्दों का सामना कर रही है, और इसका शेयर 19% ओवरवैल्यूड माना जा रहा है। मार्च 2025 तक LTSCT का रेवेन्यू लगभग $41,000 था, जो इसके उत्पाद विकास के शुरुआती चरण को दर्शाता है। सेमीकंडक्टर उद्योग वैश्विक है, जिसकी जटिल सप्लाई चेन से बचना मुश्किल है। विदेशी पार्ट्स और टूल्स पर निर्भरता एक संभावित जोखिम है। साथ ही, स्वदेशी AI मॉडल, हालांकि स्थानीय जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण हैं, अंततः प्रमुख वैश्विक मॉडलों के प्रदर्शन और व्यापक उपयोग से मेल खाना चाहिए। यदि घरेलू मॉडल और हार्डवेयर अच्छा प्रदर्शन नहीं करते हैं या व्यापक रूप से नहीं अपनाए जाते हैं, तो निवेश बेकार हो जाने या पैसे की बर्बादी का काफी जोखिम है।

भारत की AI महत्वाकांक्षाओं के लिए आगे का मार्ग

यह साझेदारी भारत की AI क्षमताओं के निर्माण की दीर्घकालिक योजना में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस राष्ट्रीय AI कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म की सफलता लगातार सरकारी समर्थन, संपूर्ण विकास श्रृंखला में सुचारू निष्पादन, तकनीकी अंतर को पाटने के लिए निरंतर नवाचार, और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम किफायती समाधान बनाने पर निर्भर करेगी। इस परियोजना का लक्ष्य भारत को AI में एक प्रमुख खिलाड़ी बनाना है, लेकिन इस यात्रा में जटिल तकनीकी, आर्थिक और राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.