मुंबई की एडटेक कंपनी Klassroom ने पब्लिक मार्केट में कदम रखने की तैयारी कर ली है। कंपनी ने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) के SME प्लेटफॉर्म पर लिस्टिंग के लिए अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) फाइल कर दिया है। यह कदम कंपनी के शानदार फाइनेंशियल परफॉरमेंस के बाद आया है। मार्च 2025 में खत्म हुए फाइनेंशियल ईयर में कंपनी के रेवेन्यू में 120% की ज़बरदस्त उछाल आई और यह ₹10.1 करोड़ तक पहुंच गया, जो कि पिछले फाइनेंशियल ईयर (FY24) के ₹4.6 करोड़ था। वहीं, नेट प्रॉफिट में तो करीब 8 गुना की बढ़त देखने को मिली, जो ₹34.4 लाख से बढ़कर ₹2.9 करोड़ हो गया।
Klassroom अपने IPO के तहत 19.89 लाख फ्रेश इक्विटी शेयर जारी करेगी और साथ ही मौजूदा शेयरहोल्डर्स 4.66 लाख इक्विटी शेयर ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए बेचेंगे। कंपनी IPO से जुटाए गए फंड का इस्तेमाल मुख्य रूप से कुछ लोन चुकाने, अपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) टेक्नोलॉजी को बेहतर बनाने और कंटेंट डेवलपमेंट व मार्केटिंग पर खर्च करने के लिए करेगी।
2016 में स्थापित Klassroom एक हाइब्रिड लर्निंग इकोसिस्टम पर काम करती है। इसमें AI-पावर्ड ओवर-द-टॉप (OTT) प्लेटफॉर्म को 30 फिजिकल लर्निंग सेंटर्स के नेटवर्क के साथ जोड़ा गया है। कंपनी 8वीं से 12वीं क्लास के स्टूडेंट्स के लिए 100 से ज्यादा कोर्स ऑफर करती है, जो रिकॉर्डेड और लाइव सेशन के जरिए दिए जाते हैं। कंपनी का मल्टी-चैनल बिजनेस मॉडल B2C, B2B2C, B2B और B2G ऑपरेशन्स तक फैला हुआ है। इसके ऑफलाइन सेंटर्स फ्रैंचाइज़ी मॉडल पर आधारित हैं और सालाना कोचिंग फीस ₹25,000 से ₹45,000 के बीच है। कंपनी का दावा है कि इसके 4 लाख से ज्यादा रजिस्टर्ड यूजर और 1 लाख सब्सक्राइबर हैं।
फाइनेंशियल ईयर 2026 के पहले छह महीनों (सितंबर 2025 तक) में Klassroom ने ₹12.4 करोड़ का रेवेन्यू और लगभग ₹4 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो कंपनी की लगातार तेज रफ्तार को दिखाता है। BSE SME प्लेटफॉर्म पर लिस्टिंग का यह फैसला पूंजी जुटाने और कंपनी की विजिबिलिटी बढ़ाने की एक स्ट्रेटेजिक चाल है। BSE SME IPO इंडेक्स 2012 से स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (SMEs) के परफॉरमेंस को ट्रैक करता है। यह सेगमेंट हाई-ग्रोथ वाला है, लेकिन इसमें जोखिम भी ज्यादा होता है। हालांकि, SME IPOs छोटे व्यवसायों को फंड जुटाने, गवर्नेंस सुधारने और निवेशकों का भरोसा बनाने का बेहतरीन मौका देते हैं।
भारतीय एडटेक सेक्टर इस समय बड़े बदलावों से गुजर रहा है। जबकि मार्केट के 2030 और 2035 तक बड़ा होने का अनुमान है, फंडिग में भारी गिरावट आई है। 2025 में इक्विटी फंडिग पिछले साल के मुकाबले 78.48% तक गिरी है। ऐसे में, टिकाऊ बिजनेस मॉडल और साबित यूनिट इकोनॉमिक्स पर ध्यान देना जरूरी हो गया है। Physics Wallah (PW) जैसी कंपनियों ने हाइब्रिड मॉडल में ₹3,000 करोड़ के करीब रेवेन्यू और घाटे में भारी कमी दर्ज कर IPO की तैयारी की है। इसके उलट, Unacademy की वैल्यूएशन $3.5 बिलियन से घटकर $500 मिलियन से नीचे आ गई है, और Byju's गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रही है। ये उदाहरण दिखाते हैं कि निवेशक अब तेजी से बढ़त के बजाय प्रॉफिटेबिलिटी और मजबूत गवर्नेंस पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।
Klassroom का हाइब्रिड मॉडल जहाँ विविधता प्रदान करता है, वहीं इसमें अपनी चुनौतियां भी हैं। फ्रैंचाइज़ी-आधारित ऑफलाइन मॉडल को लाभप्रद बनाए रखने के लिए क्वालिटी कंट्रोल और लगातार डिमांड जरूरी है। केवल 30 ऑफलाइन सेंटर्स, जो ज्यादातर महाराष्ट्र में हैं, पर निर्भरता देशव्यापी विस्तार और ऑपरेशनल कंसिस्टेंसी को लेकर सवाल खड़े करती है। पोस्ट-पेंडेमिक एडटेक सेक्टर में आई गिरावट ने कमजोरियों को उजागर किया है, जहां यूजर एंगेजमेंट कम हुआ है और कुछ सेगमेंट में ऑफलाइन लर्निंग को प्राथमिकता दी जा रही है। एडटेक फंडिग में भारी गिरावट और Byju's व Unacademy जैसी कंपनियों की मुश्किलें बताती हैं कि निवेशक अब सतर्क हैं और प्रॉफिटेबिलिटी व मजबूत गवर्नेंस वाली कंपनियों को तरजीह दे रहे हैं। SME प्लेटफॉर्म पर लिस्टिंग से पूंजी तो मिलती है, लेकिन यह सेगमेंट मेन बोर्ड की तुलना में ज्यादा वोलेटाइल हो सकता है।
Klassroom का IPO फाइल करना, खासकर हाइब्रिड लर्निंग स्पेस में, टेक्नोलॉजी-संचालित शिक्षा समाधानों की बढ़ती मांग का फायदा उठाने का अच्छा मौका है। AI/ML को इस्तेमाल करने और कंटेंट को बेहतर बनाने की कंपनी की क्षमता महत्वपूर्ण होगी। हालांकि, एडटेक मार्केट की जटिलताओं से निपटना, लगातार प्रॉफिटेबिलिटी दिखाना, हाइब्रिड मॉडल को प्रभावी ढंग से मैनेज करना और पब्लिक मार्केट के निवेशकों की उम्मीदों पर खरा उतरना, खासकर हाई-रिस्क, हाई-रिवॉर्ड वाले SME सेगमेंट में, कंपनी की भविष्य की सफलता तय करेगा।