सानंद: सेमीकंडक्टर हब का तेजी से बढ़ता ग्राफ
सानंद, गुजरात, अब सिर्फ ऑटोमोटिव हब नहीं, बल्कि सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग का एक अहम केंद्र बनता जा रहा है। 31 मार्च 2026 को Kaynes Semicon के OSAT प्लांट का आधिकारिक उद्घाटन इसी तेज विकास का सबूत है। माइक्रो टेक्नोलॉजी (Micron Technology) और सीजी सेमी (CG Semi) जैसी कंपनियों के साथ मिलकर, यह भारत की औद्योगिक नीति के तेज क्रियान्वयन को दर्शाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर इन तय समय-सीमाओं का जिक्र करते हैं, जो अब योजना से ज़मीनी हकीकत की ओर बढ़ते उत्पादन को दिखाता है।
ग्लोबल OSAT मार्केट में भारत की एंट्री
वैश्विक OSAT मार्केट का साइज $4.524 बिलियन (2024) है और इसके 2032 तक 13.6% की CAGR से बढ़कर $12.547 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है। इस क्षेत्र में ASE Technology Holding, Amkor Technology और चीन की JCET Group जैसी बड़ी कंपनियां लीड कर रही हैं। Kaynes Semicon का नया प्लांट, जिसकी क्षमता हर दिन 60 लाख चिप्स बनाने की है, इस बढ़ते मार्केट का हिस्सा बनने की तैयारी में है। भारत का समग्र सेमीकंडक्टर मार्केट 2030 तक $100-$110 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है, जिसके पीछे मजबूत डोमेस्टिक डिमांड का बड़ा हाथ होगा।
सरकारी नीति का अहम योगदान
यूनियन कैबिनेट द्वारा 23 सितंबर 2024 को हरी झंडी मिलने के बाद Kaynes प्लांट का इतनी तेजी से सेटअप, इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) की प्रगति को दिखाता है। 2021 में ₹76,000 करोड़ के बजट के साथ लॉन्च हुए ISM ने दिसंबर 2025 तक लगभग ₹1.60 लाख करोड़ के प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है। Kaynes Semicon के प्रोजेक्ट को भी सरकार से भारी सपोर्ट मिल रहा है, जिसमें ₹3,300 करोड़ के कुल निवेश का 50% केंद्र सरकार और 20% गुजरात सरकार द्वारा फंड किया जा रहा है। इस मजबूत नीतिगत समर्थन ने प्रोजेक्ट की समय-सीमा को काफी कम कर दिया है, जो पहले के प्रोजेक्ट्स में अक्सर देरी और अस्थिर मदद की वजह से अटके रहते थे।
भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र के सामने प्रमुख चुनौतियां
हालांकि, हाल की प्रगति और सरकारी सहायता के बावजूद, भारत के सेमीकंडक्टर लक्ष्यों के सामने काफी चुनौतियां हैं। सबसे बड़ी बाधा विशेष मैन्युफैक्चरिंग टैलेंट की कमी है, जिसके 2027 तक 250,000–300,000 कुशल पेशेवरों की कमी का अनुमान है। घरेलू सप्लाई चेन भी हाई-प्यूरिटी केमिकल्स, स्पेशियलिटी गैस और सिलिकॉन वेफर्स जैसे प्रमुख इनपुट्स के लिए आयात पर 90% से अधिक निर्भर है। OSAT सेक्टर खुद कड़े ग्लोबल कॉम्पिटिशन और ओवरकैपेसिटी के जोखिम का सामना कर रहा है, खासकर सानंद में कई सुविधाएं विकसित हो रही हैं। फैब्रिकेशन प्लांट के लिए भारी कैपिटल की आवश्यकता ($5-7 बिलियन प्रति प्लांट) और विश्वसनीय पावर व इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत, लगातार एग्जीक्यूशन की दिक्कतें पैदा करती हैं।
सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के लिए अगला कदम
सरकार इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 के तहत और सपोर्ट देने की योजना बना रही है, जिसमें FY 2026-27 के लिए ₹1,000 करोड़ का फंड शामिल है। इस अगले चरण का लक्ष्य सेमीकंडक्टर इक्विपमेंट और मैटेरियल्स का घरेलू उत्पादन बढ़ाना, चिप डिजाइन क्षमताओं को बेहतर बनाना और ग्लोबल सप्लाई चेन को मजबूत करना होगा। सानंद का तेजी से विकास एक सकारात्मक शुरुआत है, लेकिन भारत की लॉन्ग-टर्म सेमीकंडक्टर रणनीति की सफलता टैलेंट डेवलपमेंट, सप्लाई चेन को स्थानीय बनाने और R&D इनोवेशन में मूलभूत मुद्दों को सुलझाने पर निर्भर करेगी।