इनवेस्टमेंट का सूखा, अर्ली-स्टेज में उम्मीद की किरण
यह गिरावट कर्नाटक के टेक इकोसिस्टम के लिए एक बड़ा संकेत है। ग्लोबल वेंचर कैपिटल (VC) की दुनिया में आए बदलावों का असर यहां साफ दिख रहा है। निवेशक अब ग्रोथ-स्टेज की कंपनियों से ज्यादा अर्ली-स्टेज (शुरुआती दौर) की कंपनियों पर दांव लगा रहे हैं।
लेट-स्टेज फंडिंग पर गिरी गाज
2025 में कर्नाटक की टेक कंपनियों के लिए सबसे बड़ा झटका लेट-स्टेज इनवेस्टमेंट्स में आई भारी कमी के रूप में रहा। पिछले साल $3.6 बिलियन से घटकर यह फंडिंग $1.8 बिलियन पर आ गई, जो 50% की बड़ी गिरावट है। इसका सीधा मतलब है कि अब कंपनियां जब बड़े फंड जुटाने निकलती हैं, तो उन्हें या तो कम वैल्यूएशन पर समझौता करना पड़ता है या फिर फंड मिलने में काफी मुश्किल होती है। हालांकि, Zepto जैसी कुछ कंपनियां अक्टूबर 2025 में $7 बिलियन के वैल्यूएशन पर $450 मिलियन जुटाने में कामयाब रहीं, लेकिन यह कुछ चुनिंदा मामलों में ही हुआ। कुल मिलाकर, 2025 में कर्नाटक की टोटल फंडिंग $3.8 बिलियन रही, जो 2024 के $5.4 बिलियन से 28% और 2023 के $5.0 बिलियन से 23% कम है।
अर्ली-स्टेज स्टार्टअप्स की चमक बरकरार
जहां लेट-स्टेज में पैसे की किल्लत दिखी, वहीं अर्ली-स्टेज स्टार्टअप्स ने कमाल का प्रदर्शन किया। 2025 में अर्ली-स्टेज में $1.6 बिलियन का निवेश आया, जो 2024 के $1.2 बिलियन से 32% ज्यादा है। यह 2023 के मुकाबले 37% की बढ़ोतरी है। यह दर्शाता है कि नए आइडियाज और नई कंपनियों में अभी भी निवेशकों का भरोसा कायम है। हालांकि, सीड-स्टेज (Seed Stage) फंडिंग में मामूली 17% की गिरावट आई और यह $434 मिलियन पर आ गई।
सेक्टरों में मिला-जुला प्रदर्शन
Enterप्राइज एप्लीकेशन्स (Enterprise Applications) और फिनटेक (Fintech) सेक्टर 2025 में सबसे आगे रहे। एंटरप्राइज एप्लीकेशन्स ने $1.1 बिलियन जुटाए, जो 2024 के लगभग बराबर है लेकिन 2023 से 11% कम है। फिनटेक फंडिंग में 47% का शानदार उछाल देखने को मिला और यह $1.0 बिलियन पर पहुंच गई, हालांकि यह 2023 के आंकड़ों से पीछे रही। दूसरी ओर, रिटेल टेक (Retail Tech) को बड़ा झटका लगा, जहां फंडिंग $1.4 बिलियन से गिरकर $920 मिलियन पर आ गई।
बड़े डील्स और IPOs की हलचल
2025 में $100 मिलियन से बड़े डील्स की संख्या घटकर सिर्फ 3 रह गई, जबकि 2024 और 2023 में ऐसे 9 डील्स हुए थे। इसके चलते नए यूनिकॉर्न (Unicorn) बनने की रफ्तार भी धीमी हुई, 2025 में केवल 3 नए यूनिकॉर्न बने, जबकि 2024 में 5 बने थे। वहीं, पब्लिक मार्केट एक्टिविटी में तेजी देखी गई। Groww और Ather Energy जैसी कंपनियों ने 9 IPOs लॉन्च किए। कुल 46 एक्विजिशन (Acquisitions) हुए, जिसमें Groww का Fisdom को $150 मिलियन में खरीदना प्रमुख रहा। बेंगलुरु अभी भी कर्नाटक का सबसे बड़ा टेक हब बना हुआ है, जिसने लगभग सारा फंड आकर्षित किया। भारत का कुल टेक स्टार्टअप फंडिंग 2025 में $10.5 बिलियन रहा, जो 17% की गिरावट दर्शाता है।
