Jefferies की ओर से Zomato (Eternal Ltd.) के शेयर पर एक बड़ी रिपोर्ट आई है, जिसने निवेशकों का ध्यान खींचा है। ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म ने कंपनी को 'Buy' रेटिंग देते हुए शेयर का प्राइस टारगेट ₹480 तय किया है। यह टारगेट मौजूदा मार्केट प्राइस से लगभग 78% की जोरदार तेजी का संकेत देता है।
Jefferies की बुलिश राय और कंपनी की ताकत
Jefferies का मानना है कि Zomato के फूड डिलीवरी सेगमेंट में करीब 20% की लगातार ग्रोथ जारी रहने की उम्मीद है। ब्रोकरेज फर्म इसे कंपनी का 'कैश इंजन' मानती है। बेहतर ऑपरेशनल एफिशिएंसी, कॉस्ट कंट्रोल और ऑपरेटिंग लेवरेज के चलते इस सेगमेंट के मार्जिन में भी बढ़ोतरी होने का अनुमान है। यह मैनेजमेंट की 5-6% मार्जिन के लॉन्ग-टर्म लक्ष्य को सपोर्ट करता है। बता दें कि भारत का फूड डिलीवरी मार्केट 2024 में लगभग $45.15 बिलियन का था और 2030 तक यह 22-23% के दमदार सीएजीआर (CAGR) से बढ़ने की उम्मीद है। Zomato की इस मार्केट में लगभग ~58% की हिस्सेदारी है।
क्विक कॉमर्स: कड़ा मुकाबला
Zomato का क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म Blinkit, ग्रोथ का एक अहम जरिया माना जा रहा है, जिसकी भारतीय क्विक कॉमर्स सेक्टर में ~46% की लीडिंग मार्केट शेयर है। हालांकि, इस सेगमेंट में Zepto और Swiggy Instamart जैसे प्लेयर्स से कड़ी प्रतिस्पर्धा मिल रही है, जो मिलकर बाकी बाजार का बड़ा हिस्सा कंट्रोल करते हैं। मैनेजमेंट का फोकस अनुशासित रणनीति और आक्रामक डिस्काउंटिंग से बचने पर है, लेकिन यह कॉम्पिटिटिव प्रेशर नियर-टर्म ग्रोथ को धीमा कर सकता है। खुद क्विक कॉमर्स मार्केट के 2029 तक $9.95 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है।
प्रॉफिटेबिलिटी और लीडरशिप में बदलाव
निवेशकों को Zomato की हालिया प्रॉफिटेबिलिटी की सस्टेनेबिलिटी पर चिंता थी, लेकिन मैनेजमेंट का कहना है कि वर्तमान मुनाफे के आंकड़े वास्तविक हैं, जो स्केल, सेल्फ-हेल्प मेजर्स और डेंसिटी गेन्स से समर्थित हैं। कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2026 की तीसरी तिमाही में ₹102 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले 73% ज्यादा है। Zomato पहले ही डेट-फ्री हो चुकी है और Q1 FY24 से लगातार प्रॉफिट में है, जो एक बड़े टर्नअराउंड का संकेत देता है। हाल ही में, फाउंडर Deepinder Goyal ने सीईओ पद से वाइस चेयरमैन की भूमिका संभाली है, जबकि Albinder Dhindsa ग्रुप सीईओ बने हैं। यह कदम मैनेजमेंट के अनुसार, गोय़ल को नई पहलों पर ध्यान केंद्रित करने की अनुमति देगा।
मार्केट और सेक्टर का संदर्भ
भारत का ऑनलाइन फूड डिलीवरी मार्केट तेजी से बढ़ रहा है, जिसमें प्लेटफॉर्म-टू-कंज्यूमर सेगमेंट सबसे बड़ा रेवेन्यू जेनरेटर है। यह सेक्टर 'ग्रोथ एट एनी कॉस्ट' (growth-at-any-cost) की सोच से यूनिट इकोनॉमिक्स और प्रॉफिटेबिलिटी पर ज्यादा फोकस की ओर बढ़ रहा है। Zomato के शेयर ने हाल के दिनों में मजबूती दिखाई है, पिछले कुछ सालों में इसने अच्छे रिटर्न दिए हैं, हालांकि पिछले हफ्ते यह 10% से ज्यादा गिर गया था।
सतर्क रहने के कारण
Jefferies की बुलिश राय के बावजूद, कुछ ऐसे फैक्टर हैं जिन पर सावधानी बरतना जरूरी है। Zomato का मौजूदा वैल्यूएशन काफी ज्यादा है, जहां पिछले बारह महीनों के पी/ई रेश्यो (P/E ratios) 1,000x से भी ऊपर हैं। यह दर्शाता है कि वर्तमान कमाई शेयर की कीमत को सही नहीं ठहराती। इसका मतलब है कि मार्केट ने पहले से ही भविष्य की काफी ग्रोथ और प्रॉफिटेबिलिटी को प्राइस इन कर लिया है, ऐसे में इन ऊंची उम्मीदों से जरा सी भी चूक शेयर के लिए जोखिम भरी हो सकती है। क्विक कॉमर्स सेगमेंट में कड़ा मुकाबला, खासकर Swiggy Instamart और Zepto से, Blinkit की मार्केट शेयर और प्रॉफिटेबिलिटी के लिए लगातार खतरा बना हुआ है। प्रतिस्पर्धियों की आक्रामक डिस्काउंटिंग Zomato को भी ऐसा करने पर मजबूर कर सकती है, जिससे मार्जिन कम हो सकता है और प्रॉफिटेबिलिटी में देरी हो सकती है। इसके अलावा, फाउंडर के वाइस चेयरमैन बनने को भले ही पॉजिटिव दिखाया जा रहा हो, लेकिन किसी हाई-ग्रोथ टेक कंपनी में ऑपरेशनल लीडरशिप में बदलाव एग्जीक्यूशन रिस्क ला सकता है। ऐतिहासिक रूप से, एनालिस्ट सेंटीमेंट में उतार-चढ़ाव रहा है; Jefferies ने खुद जुलाई 2025 में Zomato को 'होल्ड' रेटिंग और कम टारगेट प्राइस दिया था, जो शेयर की वोलेटिलिटी को दर्शाता है।
भविष्य की राह
Zomato का मैनेजमेंट अपनी यूनिट इकोनॉमिक्स और भविष्य की ग्रोथ को लेकर काफी आश्वस्त है। फूड डिलीवरी से होने वाले मुनाफे को क्विक कॉमर्स ऑपरेशंस के विस्तार में फिर से निवेश किया जा रहा है। कंपनी की फूड डिलीवरी में अपनी लीडरशिप बनाए रखते हुए, हाइपर-कॉम्पिटिटिव क्विक कॉमर्स लैंडस्केप को सफलतापूर्वक नेविगेट करने की क्षमता महत्वपूर्ण होगी। एनालिस्ट्स का कंसेंसस मिला-जुला है, जिसमें अधिकांश हालिया रेटिंग 'होल्ड' या 'Buy' की ओर झुकी हैं, लेकिन प्राइस टारगेट में काफी भिन्नता है, जो कंपनी के टिकाऊ, हाई-मार्जिन ग्रोथ के रास्ते पर विभिन्न विचारों को दर्शाती है।