क्यों मुश्किल हो रहा है UPI का ग्लोबल विस्तार?
दरअसल, भारत में UPI की सफलता शानदार रही है। इस रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम ने कैश के इस्तेमाल को काफी कम कर दिया है। साल 2025 में ही इसने 250 बिलियन से ज्यादा ट्रांजैक्शन हैंडल किए, जिनकी कुल वैल्यू लगभग $3.4 ट्रिलियन थी। यह ग्लोबल डिजिटल ट्रांजैक्शन का 50% हिस्सा है, जो इसे दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम बनाता है।
विदेशी उड़ान की तैयारी और उम्मीदें
NPCI International इस डिजिटल पेमेंट मॉडल को यूएई, सिंगापुर, नेपाल और फ्रांस जैसे देशों में ले जा चुका है। साल 2027 तक बीस से ज्यादा देशों में पहुंचने का लक्ष्य है। ये कोशिशें ऐसे समय हो रही हैं जब रियल-टाइम पेमेंट्स (RTP) 2028 तक ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट्स का 27% हिस्सा बन जाएंगे।
विदेशी राह में बड़े रोड़े
लेकिन, UPI को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे बड़ी अड़चन है अलग-अलग देशों के जटिल और बदलते रेगुलेटरी नियम। UPI के ओपन मॉडल का चीन के Alipay और WeChat Pay जैसे बड़े क्लोज्ड-लूप सिस्टम के साथ तालमेल बिठाना मुश्किल हो रहा है। कुछ देशों में लॉन्च के बावजूद मर्चेंट एक्सेप्टेंस (ग्राहकों की तरफ से स्वीकार्यता) उम्मीद से काफी कम है। इसके अलावा, डेटा लोकलाइजेशन जैसे जियोपॉलिटिकल मुद्दे और अलग-अलग देशों में स्मार्टफोन व इंटरनेट की उपलब्धता भी मुश्किलें पैदा कर रही हैं।
आगे का रास्ता
NPCI International नई रणनीतिक साझेदारियां बना रहा है और जापान व मलेशिया जैसे पूर्वी एशियाई बाजारों को टारगेट कर रहा है। भविष्य में UPI में क्रेडिट लाइन्स जैसी सुविधाएं जोड़ने की भी योजना है ताकि इसकी इंटरनेशनल अपील बढ़ाई जा सके। आखिर में, UPI का ग्लोबल दबदबा इन मुश्किलों से निपटने और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ सहज तालमेल पर निर्भर करेगा।
