India's Tech Sector: महिला शक्ति का जलवा! 31% तक पहुंची भागीदारी, लेकिन लीडरशिप में अभी भी गैप

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AuthorMehul Desai|Published at:
India's Tech Sector: महिला शक्ति का जलवा! 31% तक पहुंची भागीदारी, लेकिन लीडरशिप में अभी भी गैप
Overview

India's Tech Sector में महिलाओं का डंका बज रहा है! Foundit की लेटेस्ट रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 में उभरती टेक्नोलॉजी हायरिंग में महिलाओं की भागीदारी बढ़कर **31%** हो गई है, जो पिछले साल से **19%** ज्यादा है। यह ग्रोथ एंट्री-लेवल से लेकर सीनियर पदों तक और ऊंची सैलरी वाले जॉब्स में भी देखने को मिल रही है।

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भारत का टेक सेक्टर एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। Foundit की 'Women in the Indian Workforce 2026' रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में उभरती टेक्नोलॉजी हायरिंग में महिलाओं की हिस्सेदारी 19% की जोरदार बढ़ोतरी के साथ 31% पर पहुंच गई है। यह आंकड़ा AI, सेमीकंडक्टर और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे भविष्य के क्षेत्रों में भारत की ग्लोबल पोजिशनिंग के लिए बेहद अहम है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि पूरी टैलेंट पूल का इस्तेमाल करना सिर्फ समानता का मुद्दा नहीं, बल्कि इनोवेशन और लॉन्ग-टर्म कॉम्पिटिटिवनेस बढ़ाने का डायरेक्ट रास्ता है।

प्रतिनिधित्व और प्रगति की गहरी पड़ताल

रिपोर्ट में यह भी पता चला है कि 7-10 साल के अनुभव वाले प्रोफेशनल्स के लिए मौके 14% तक बढ़े हैं, और 11-15 साल के अनुभव वालों के लिए यह आंकड़ा दोगुना होकर 4% हो गया है। यह दिखाता है कि अनुभवी टैलेंट की मांग बढ़ रही है और 'लीकी पाइपलाइन' (जहां महिलाएं करियर के बीच में ही छोड़ देती हैं) की समस्या कम हो रही है। हायरिंग अब बड़े शहरों तक सीमित नहीं है; टियर-2 और टियर-3 शहरों में महिलाओं के लिए जॉब पोस्टिंग 44% तक पहुंच गई है। IT रोल्स में मामूली बढ़ोतरी हुई है, लेकिन डेटा और एनालिटिक्स में ग्रोथ शानदार रही, जो 7% से बढ़कर 10% हो गई है।

वैल्यूएशन और स्टार्टअप्स का प्रभाव

महिलाओं के लिए ऊंची सैलरी वाले जॉब्स भी ज्यादा सुलभ हो रहे हैं। ₹11-25 लाख प्रति वर्ष की सैलरी वाले रोल्स में 16% की वृद्धि हुई है, और ₹25 लाख से ऊपर की नौकरियों में 10% हिस्सेदारी बढ़ी है। खास बात यह है कि स्टार्टअप्स इस ट्रेंड में अहम भूमिका निभा रहे हैं। वे मार्केट की तुलना में ज्यादा हायर-पेइंग रोल्स में महिलाओं को मौका दे रहे हैं। यह सैलरी ग्रोथ महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को बढ़ाने में मदद करती है। वर्कप्लेस फ्लेक्सिबिलिटी पर भी जोर दिया जा रहा है, जिसमें हाइब्रिड और रिमोट वर्क ऑप्शन बढ़ रहे हैं, जो महिलाओं को करियर और फैमिली बैलेंस बनाने में मदद करते हैं।

स्ट्रक्चरल कमजोरियां: लीडरशिप गैप का सच

हालांकि, कई पॉजिटिव नंबर्स के बावजूद, कुछ गहरी स्ट्रक्चरल बाधाएं हैं जो महिलाओं की पूरी क्षमता को विकसित होने से रोक रही हैं। भारत में बड़ी संख्या में महिला STEM ग्रेजुएट्स होने के बावजूद, वर्कफोर्स, खासकर सीनियर रोल्स में उनकी हिस्सेदारी कम है। एंट्री-लेवल और लीडरशिप पोजिशन के बीच एक बड़ा गैप है; महिलाएं एग्जीक्यूटिव रोल्स में सिर्फ 7% और डायरेक्टर लेवल्स पर 13% ही हैं। अनकॉन्शियस बायस (अचेतन पूर्वाग्रह), परिवार के लिए करियर ब्रेक लेने की सामाजिक अपेक्षाएं, और लीडरशिप पोजिशन में रोल मॉडल्स की कमी जैसी चीजें अभी भी बड़ी बाधाएं बनी हुई हैं। कई महिलाओं को टेक्निकल रोल्स की जगह 'सॉफ्ट स्किल्स' वाले पदों की ओर धकेला जाता है।

भविष्य का नज़रिया

भारत के टेक सेक्टर में महिलाओं का भविष्य पॉजिटिव दिख रहा है, लेकिन इसके लिए लगातार और सोची-समझी कोशिशों की जरूरत है। अगर पार्टिसिपेशन रेट और मिड-करियर, हायर-पेइंग रोल्स में मौजूदगी बढ़ रही है, तो सबसे बड़ी चुनौती इसे लीडरशिप पोजिशन तक ले जाना है। कंपनियां रिटेंशन और एडवांसमेंट बढ़ाने के लिए फ्लेक्सिबल वर्क, AI स्किilling, मेंटरशिप और ट्रांसपेरेंट करियर पाथ जैसे टारगेटेड इनिशिएटिव्स पर फोकस कर रही हैं। लीडरशिप गैप को पाटना और हर स्तर पर समान अवसर सुनिश्चित करना, भारत के बढ़ते महिला टेक वर्कफोर्स की पूरी इकोनॉमिक और इनोवेटिव पावर का इस्तेमाल करने और ग्लोबल स्टेज पर अपनी कॉम्पिटिटिव एज बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण होगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.