भारतीय स्पेस स्टार्टअप्स को ई-कॉमर्स आयात कर (import tax) की वजह से हो रही परेशानी

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
भारतीय स्पेस स्टार्टअप्स को ई-कॉमर्स आयात कर (import tax) की वजह से हो रही परेशानी
Overview

भारत का उभरता हुआ अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी (space technology) क्षेत्र बढ़ी हुई लागतों और धीमी विकास प्रक्रियाओं का सामना कर रहा है। स्टार्टअप्स को सरकारी घोषित आयात शुल्क छूट (import duty exemptions) का लाभ उठाने में कठिनाई हो रही है जब वे वैश्विक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से महत्वपूर्ण घटक (components) सोर्स करते हैं, जिससे अग्रिम लागत (upfront costs) बढ़ रही है और आवश्यक प्रोटोटाइपिंग समय-सीमा (prototyping timelines) प्रभावित हो रही है।

आयात शुल्क की दुविधा

भारत का महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र (ecosystem) एक महत्वपूर्ण लागत बाधा से जूझ रहा है। अंतरिक्ष और उपग्रह घटकों पर आयात शुल्क कम करने के सरकारी प्रयासों के बावजूद, स्टार्टअप्स को लोकप्रिय वैश्विक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से पुर्जे प्राप्त करते समय इन लाभों तक पहुंचना असंभव लग रहा है। यह प्रक्रियात्मक अंतर (procedural gap) राष्ट्रीय नवाचार (national innovation) के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र के परिचालन व्यय (operational expenses) को चुपचाप बढ़ा रहा है।

स्टार्टअप लागत और देरी

डिजी-की (Digi-Key), माउसर इलेक्ट्रॉनिक्स (Mouser Electronics), और अमेज़ॅन बिजनेस (Amazon Business) जैसे ऑनलाइन खरीद चैनलों (online procurement channels) पर निर्भर कंपनियों को काफी अतिरिक्त लागतों का सामना करना पड़ रहा है। "जब हम ई-कॉमर्स मार्ग अपनाते हैं, तो हम आमतौर पर अग्रिम रूप से कुल लागत का अतिरिक्त 25 प्रतिशत भुगतान कर रहे होते हैं," बताया पियरसाइट स्पेस (Piersight Space) में व्यवसाय विकास के प्रमुख, आचिन्य तिवारी (Achintya Tewari) ने। इसमें 5% से 20% तक के सीमा शुल्क (customs duties) और 18% वस्तु एवं सेवा कर (Goods and Services Tax - GST) शामिल हैं। जबकि GST वसूल की जा सकती है, तत्काल कार्यशील पूंजी (working capital) का दबाव आवश्यक प्रोटोटाइपिंग और विकास चरणों को धीमा कर देता है। यह वित्तीय बोझ लागत-प्रभावशीलता के बजाय गति को प्राथमिकता देने के लिए खरीद निर्णयों को मजबूर करता है, जो संभावित रूप से अंतरिक्ष टेक उद्योग में तेजी से नवाचार को बाधित कर सकता है।

प्रक्रियात्मक समाधानों की तलाश

इंडियन स्पेस एसोसिएशन (ISpA) इस बात पर प्रकाश डालता है कि यदि नीतिगत बदलाव की आवश्यकता के बजाय प्रक्रियात्मक परिवर्तन लागू किए जाते हैं, तो इन छूटों का लाभ उठाया जा सकता है। सुझावों में पूर्व-खरीद अनुमोदन (pre-procurement approvals) या खरीद-पश्चात वापसी दावे (post-procurement refund claims) जैसे तंत्र शामिल हैं। आई.एस.पी.ए. के महानिदेशक, लेफ्टिनेंट जनरल ए.के. भट्ट (सेवानिवृत्त) ने कहा कि इन परिवर्तनों से 30% से 5% तक की अनुमानित पर्याप्त बचत हो सकती है। उन्होंने व्यक्तिगत घटकों को वर्गीकृत करने के बजाय आयात को सरल बनाने के लिए स्वीकृत अंतरिक्ष टेक संस्थाओं के लिए कंपनी-स्तरीय छूट (company-level exemption) की वकालत की।

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