India Chip Mission: ₹1.2 लाख करोड़ का बूस्ट, पर राह में हैं बड़ी चुनौतियां!

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
India Chip Mission: ₹1.2 लाख करोड़ का बूस्ट, पर राह में हैं बड़ी चुनौतियां!
Overview

भारत सरकार अपनी India Semiconductor Mission (ISM) 2.0 को **₹1.2 लाख करोड़** तक के बड़े निवेश के साथ लॉन्च करने की तैयारी में है। इस मिशन का मकसद देश में एक पूरी चिप इंडस्ट्री खड़ी करना है, जिसमें सिर्फ डिजाइन ही नहीं, बल्कि मैन्युफैक्चरिंग इक्विपमेंट और रॉ मैटेरियल्स भी शामिल होंगे। DLI 2.0 प्रोग्राम के तहत विदेशी पार्टनरशिप को बढ़ावा दिया जाएगा। लक्ष्य 2030 तक भारत की **75%** चिप मांग को पूरा करना है, हालांकि रास्ते में एग्जीक्यूशन और भू-राजनीतिक चुनौतियां बनी हुई हैं।

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ISM 2.0: चिप इकोसिस्टम को मजबूत बनाने की पहल

India Semiconductor Mission (ISM) 2.0 की खास बात यह है कि अब यह सिर्फ चिप फैब्रिकेशन और डिजाइन तक सीमित नहीं रहेगा। सरकार कैपिटल इक्विपमेंट, रॉ मैटेरियल्स और सपोर्टिंग इंडस्ट्रीज जैसे अहम क्षेत्रों में भी घरेलू क्षमताएं बढ़ाने पर जोर देगी। इसका मकसद देश को ग्लोबल सप्लाई चेन में गहराई से जोड़ना और इंपोर्ट पर निर्भरता कम करना है। इस मिशन के लिए ₹1 लाख करोड़ से लेकर ₹1.2 लाख करोड़ तक का भारी-भरकम निवेश किया जा सकता है।

डिजाइन इंसेटिव्स और विदेशी पार्टनरशिप

ISM 2.0 के तहत एक अहम रणनीति DLI 2.0 प्रोग्राम का नया स्वरूप है। इसे भारतीय कंपनियों के साथ मिलकर रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन किया गया है। खास बात यह है कि यह विदेशी कंपनियों को भारत में आकर भारतीय फर्मों के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रोत्साहित करेगा। लक्ष्य है कि ऐसे करीब 50 डीपटेक सेमीकंडक्टर डिजाइन कंपनियां तैयार की जा सकें।

ग्लोबल बाजार में कड़ी प्रतिस्पर्धा

यह बड़ा निवेश तब आ रहा है जब दुनिया भर के देश चिप इंडस्ट्री में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए मोटी रकम लगा रहे हैं। अमेरिका ने अपने CHIPS Act के तहत लगभग $53 बिलियन का प्रावधान किया है, वहीं चीन ने $48 बिलियन का फंड जारी किया है। यूरोपियन यूनियन भी अपने सेमीकंडक्टर पहलों के लिए अरबों डॉलर लगा रहा है। ऐसे में भारत को कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा, जबकि ताइवान और साउथ कोरिया जैसी पुरानी दिग्गज कंपनियां बिना इतने बड़े कैश सब्सिडी के ही आगे बढ़ीं।

पिछली असफलताओं से सबक

जहां तक लागू करने की बात है, भारत की राह आसान नहीं रही है। पहली India Semiconductor Mission (ISM) 1.0 के लिए ₹76,000 करोड़ आवंटित किए गए थे, और रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस फंड का अधिकांश हिस्सा खर्च हो चुका है। अब सवाल बड़े प्रोजेक्ट्स को जमीन पर उतारने का है। देश में बड़े पैमाने पर प्रोजेक्ट्स में देरी और क्रियान्वयन की दिक्कतें आम रही हैं। भारत के पिछले सेमीकंडक्टर प्रयासों में भी वेदांता-फॉक्सकॉन जैसे अहम प्रोजेक्ट्स की विफलता और अन्य नियोजित इकाइयों में देरी देखने को मिली है।

मुख्य चुनौतियां: एग्जीक्यूशन, टैलेंट और जियोपॉलिटिक्स

ISM 2.0 के महत्वाकांक्षी लक्ष्यों के आगे कई बड़ी रुकावटें हैं। एक सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन प्लांट लगाने में करीब $5-7 बिलियन का खर्च आता है और इसमें कई साल लग जाते हैं। भारत का बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में धीमी गति से काम करने का इतिहास इस पर संदेह पैदा करता है। दूसरी बड़ी चुनौती कुशल टैलेंट की कमी है। भारत में चिप डिजाइन के लिए तो इंजीनियर हैं, लेकिन फैब्रिकेशन लाइन चलाने के लिए जरूरी प्रोसेस, इक्विपमेंट और यील्ड इंजीनियरों की भारी कमी है। ये टैलेंट अमेरिका, ताइवान और साउथ कोरिया जैसे हब में जा रहा है। इसके अलावा, इंपोर्टेड इक्विपमेंट, स्पेशलिटी गैस और वेफर्स पर निर्भरता भू-राजनीतिक घटनाओं और सप्लाई चेन के झटकों के प्रति परियोजनाओं को असुरक्षित बनाती है, खासकर अमेरिका-चीन तनाव को देखते हुए। 90-95% तक इंपोर्ट पर निर्भरता को घटाकर 2030 तक 75% घरेलू मांग को पूरा करने का लक्ष्य हासिल करने के लिए परफेक्ट एग्जीक्यूशन और तेजी से तकनीकी अपनाना जरूरी होगा।

भविष्य की राह

इन तमाम चुनौतियों के बावजूद, भारत सरकार 2030 तक $1 ट्रिलियन से अधिक होने वाले ग्लोबल मार्केट में अपनी मजबूत पकड़ बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। ISM 2.0 की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या हम पुरानी एग्जीक्यूशन समस्याओं को दूर कर पाते हैं, विशेष टैलेंट की कमी को पूरा कर पाते हैं और जटिल वैश्विक राजनीति को समझ पाते हैं। बिना मजबूत प्रोजेक्ट मैनेजमेंट और लगातार नीतिगत समर्थन के, ये बड़े लक्ष्य शायद पूरे न हो पाएं।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.