नए 'ऑनलाइन गेमिंग के प्रचार और विनियमन अधिनियम (PROGA)' के तहत, भारत में ऑनलाइन गेमिंग सेक्टर में 1 मई, 2026 से सख्त नियम लागू हो गए हैं। 'ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी ऑफ इंडिया (OGAI)' इस सेक्टर की निगरानी करेगी और बैन किए गए ऑनलाइन मनी गेम्स व मंजूर सोशल गेम्स और ई-स्पोर्ट्स के बीच साफ अंतर रखेगी। RummyCircle और Adda52 जैसे रियल-मनी गेमिंग प्लेटफॉर्म्स, जो एंट्री फीस और जीत की रकम पर चलते थे, अब प्रतिबंधित हैं। इससे कंपनियों को अपने बिजनेस मॉडल बदलने पड़ रहे हैं, जैसे सब्सक्रिप्शन, विज्ञापन या इन-गेम आइटम से कमाई का रास्ता अपनाना।
पर इस बैन के कारण लाखों भारतीय खिलाड़ी अब ऑफशोर गेमिंग साइट्स की ओर मुड़ गए हैं। बैन के बाद इन ऑफशोर साइट्स पर खिलाड़ियों की भागीदारी 68% से बढ़कर लगभग 82% हो गई है। यह बदलाव चिंता पैदा करता है क्योंकि ये साइट्स अनियंत्रित हैं, जिससे धोखाधड़ी और प्लेयर प्रोटेक्शन की कमी का खतरा बढ़ गया है।
इस नए नियम के कारण आर्थिक मोर्चे पर भी बड़ा झटका लगा है। FY23 में मार्केट का 82% हिस्सा रियल-मनी गेमिंग का था, जो अब प्रभावी रूप से खत्म हो गया है। इससे भारत में बड़े पैमाने पर रेवेन्यू लॉस और जॉब कट्स हुए हैं। Mobile Premiere League (MPL) जैसी कंपनियों ने भी कई कर्मचारियों को निकाला है। डिजिटल एडवरटाइजिंग मार्केट को सालाना ₹4,000 से ₹5,000 करोड़ तक का नुकसान हो सकता है, जिसका असर बड़े स्पोर्ट्स स्पॉन्सरशिप और ऑनलाइन विज्ञापनों पर पड़ेगा। Dream11 (जिसका वैल्यूएशन करीब $5 बिलियन है) और Games24x7 ($2.5 बिलियन) जैसी बड़ी कंपनियों के लिए अनिश्चितता बढ़ गई है। Nazara Technologies, जिसकी मार्केट वैल्यू अप्रैल 2026 में करीब ₹8,063 करोड़ थी, उसका भविष्य भी रियल-मनी गेमिंग से दूरी बनाने पर निर्भर करेगा।
कानूनी मोर्चे पर भी इस बैन के खिलाफ खड़े हो रहे हैं। भारत का यह बैन यूके और यूएस जैसे देशों से अलग है, जहाँ लाइसेंसिंग और प्लेयर प्रोटेक्शन पर जोर दिया जाता है। सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया अब PROGA एक्ट के खिलाफ सभी मुकदमों को सुन रहा है। Head Digital Works (A23) जैसी कंपनियां तर्क दे रही हैं कि यह कानून व्यापार करने की आजादी और समानता जैसे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। उनका कहना है कि यह बैन संयोग के खेलों (Games of Chance) से अलग, कौशल के खेलों (Games of Skill) को अनुचित तरीके से आपराधिक बना रहा है। सरकार इस बैन का बचाव करते हुए एडिक्शन, वित्तीय बर्बादी, मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फाइनेंसिंग जैसी चिंताओं का हवाला दे रही है।
PROGA एक्ट का बैन मॉडल कमजोरियां भी उजागर कर रहा है। भारत के अनुमानित $5 बिलियन के गेमिंग मार्केट में बड़ी घरेलू गिरावट का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि कई खिलाड़ी अनियंत्रित ऑफशोर साइट्स की ओर चले गए हैं। इन ऑफशोर साइट्स पर धोखाधड़ी, पेमेंट में देरी और वित्तीय नुकसान की रिपोर्टें बढ़ी हैं, क्योंकि यहाँ कोई प्लेयर प्रोटेक्शन नहीं है। ऑपरेटरों पर सख्त पेनल्टी से वैध व्यवसायों को नुकसान हो सकता है और यह गतिविधि भूमिगत हो सकती है। गेमिंग पर बैन लगाने से समस्याग्रस्त खेलने की आदत रुकने के बजाय बस दूसरी जगह शिफ्ट हो सकती है।
हालांकि, रियल-मनी गेम्स पर बैन के बावजूद, नए नियम ई-स्पोर्ट्स और सोशल गेम्स को बढ़ावा दे रहे हैं। ई-स्पोर्ट्स को खेल के रूप में मान्यता दी जा रही है, ताकि रियल-मनी साइटें खुद को ई-स्पोर्ट्स प्लेटफॉर्म के रूप में पेश न कर सकें। पर ई-स्पोर्ट्स टीमों और खिलाड़ियों को अभी भी स्पष्ट नियमों की आवश्यकता है, खासकर यह समझने के लिए कि बैंक ई-स्पोर्ट्स से होने वाली आय को रियल-मनी गेमिंग से कैसे अलग करेंगे। कुछ मामलों में सोशल गेम्स को भी OGAI के साथ रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता हो सकती है।
