LED डिस्प्ले मार्केट में बूम, पर चीन पर निर्भरता बनेगी बड़ी रुकावट?

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
LED डिस्प्ले मार्केट में बूम, पर चीन पर निर्भरता बनेगी बड़ी रुकावट?
Overview

India का LED डिस्प्ले मार्केट **₹2,000 करोड़** के पार निकल गया है, जो सरकारी प्रोजेक्ट्स और बढ़ते डिजिटल विज्ञापन की वजह से फल-फूल रहा है। लेकिन, LED लैंप और IC जैसे जरूरी कॉम्पोनेन्ट के लिए चीन पर भारी निर्भरता, देश की वैश्विक महत्वाकांक्षाओं और सप्लाई चेन की मजबूती के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर रही है।

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डोमेस्टिक मार्केट में जोरदार ग्रोथ

India का एक्टिव LED डिस्प्ले मार्केट ₹2,000 करोड़ का आंकड़ा पार कर चुका है और सालाना 15-20% की रफ्तार से बढ़ रहा है। इस ग्रोथ के पीछे सरकार के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, छोटे शहरों तक पहुंचते डिजिटल आउट-ऑफ-होम (DOOH) विज्ञापन, एयरपोर्ट का आधुनिकीकरण और कंपनियों द्वारा पुरानी टेक्नोलॉजी को अपग्रेड करना जैसे कई कारण हैं। DOOH सेगमेंट खास तौर पर अहम है, जिसके तहत India का डिजिटल OOH विज्ञापन मार्केट साल 2025 तक USD 519.93 मिलियन तक पहुंचने का अनुमान है। वहीं, India का पूरा LED डिस्प्ले मार्केट भी इसी साल USD 848.1 मिलियन तक पहुंच सकता है। डोमेस्टिक सेल्स के अलावा, साउथ अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका, वेस्ट एशिया और साउथ एशिया जैसे एक्सपोर्ट मार्केट भी खुल रहे हैं। Xtreme Media जैसी भारतीय कंपनियां कॉम्पिटिटिव दाम और कस्टमाइज्ड सलूशन के साथ लीडर बनने की कोशिश कर रही हैं।

चीन का दबदबा

ग्लोबल LED डिस्प्ले मार्केट काफी बड़ा है, जो 2025 तक करीब $20 बिलियन का हो सकता है, जिसमें एशिया पैसिफिक, खासकर चीन, का बड़ा हिस्सा है। चीन ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी का लगभग 80% और ग्लोबल डिस्प्ले पैनल मार्केट का 55% से ज्यादा हिस्सा रखता है। चीन का यह दबदबा एक मजबूत, वर्टिकल इंटीग्रेटेड इकोसिस्टम पर आधारित है, जो बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन, तेज इनोवेशन और लागत में कमी लाने में मदद करता है, जिसे नए खिलाड़ियों के लिए मैच करना मुश्किल है। अनुमान है कि 2028 तक चीन ग्लोबल डिस्प्ले कैपेसिटी का करीब 75% अपने पास रखेगा।

कॉम्पोनेन्ट पर निर्भरता एक बड़ी मुश्किल

India की सप्लाई चेन की आजादी के रास्ते में सबसे बड़ी रुकावट चीन से क्रिटिकल कॉम्पोनेन्ट जैसे LED लैंप, इंटीग्रेटेड सर्किट (ICs) और कंट्रोल सिस्टम्स पर निर्भरता है। यह निर्भरता घरेलू इंडस्ट्री को कीमतों में उतार-चढ़ाव और जियोपॉलिटिकल रिस्क के प्रति संवेदनशील बनाती है। भले ही India का इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्शन ₹1.9 लाख करोड़ (फाइनेंशियल ईयर 2014-15) से बढ़कर ₹11.3 लाख करोड़ (फाइनेंशियल ईयर 2024-25) हो गया है, लेकिन यह ग्रोथ ज्यादातर असेंबली और फाइनल प्रोडक्ट इंटीग्रेशन में हुई है, न कि फाउंडेशन कॉम्पोनेन्ट मैन्युफैक्चरिंग में।

India के मैन्युफैक्चरिंग बेस को मजबूत करना

ग्लोबल LED डिस्प्ले मार्केट में बड़ा हिस्सा पाने के लिए India को अपने खुद के कॉम्पोनेन्ट मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को बढ़ावा देना होगा। 'मेक इन इंडिया' और प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) जैसी सरकारी पहलें महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इनका असर क्रिटिकल कॉम्पोनेन्ट फैब्रिकेशन तक पहुंचना जरूरी है। स्मार्ट सिटीज और DOOH जैसे प्रोजेक्ट्स डोमेस्टिक डिमांड को सहारा देते हैं। जैसे-जैसे ग्लोबल खरीदार सप्लाई चेन की ट्रांसपेरेंसी और सस्टेनेबिलिटी को ज्यादा महत्व दे रहे हैं, India के पास रिन्यूएबल एनर्जी और एथिकल सोर्सिंग के जरिए बढ़त बनाने का मौका है। Nifty India Manufacturing इंडेक्स का मौजूदा पी/ई रेश्यो 27.8 है, जबकि Electronics Mart India Ltd. का पी/ई रेश्यो करीब 39.60 है, जो ब्रॉडर इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में निवेशकों की दिलचस्पी दिखाता है।

सप्लाई चेन रिस्क और भविष्य का अनुमान

जरूरी कॉम्पोनेन्ट के लिए चीन पर इस हद तक निर्भरता सप्लाई चेन को कमजोर बनाती है, जो जियोपॉलिटिकल झटकों और ट्रेड डिस्प्यूट्स का शिकार हो सकती है। जब ग्लोबल सप्लाई चेन आर्थिक बदलावों और सुरक्षा चिंताओं के चलते रीकैलिब्रेट हो रही है, India को अपनी कॉम्पोनेन्ट प्रोडक्शन को तेजी से बढ़ाना होगा ताकि वह सचमुच फायदा उठा सके। इसके बिना, यह सिर्फ एक असेंबलर बनकर रह जाएगा, न कि प्राइमरी मैन्युफैक्चरर, जिससे इसकी कॉम्पिटिटिव एज सीमित हो जाएगी। चीन का स्थापित इंफ्रास्ट्रक्चर, सालों का इन्वेस्टमेंट और माइक्रो-LED जैसे क्षेत्रों में R&D क्षमताएं कड़ी प्रतिस्पर्धा पेश करती हैं। LEDX Technology & Xtreme Media के MD, संकेत रामभिया ने India की क्षमता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस महत्वाकांक्षा की सफलता "लगातार एग्जीक्यूशन" पर निर्भर करती है। इंपोर्ट पर निर्भर असेंबली से स्वदेशी कॉम्पोनेन्ट मैन्युफैक्चरिंग की ओर यह बदलाव जटिल है और इसके लिए R&D, फैब्रिकेशन फैसिलिटीज और स्किल्ड वर्कफोर्स में भारी निवेश की जरूरत है। कोविड-19 महामारी के दौरान देखे गए पिछले व्यवधानों ने मजबूत बैकअप प्लान और डायवर्सिफाइड सोर्सिंग स्ट्रेटजीज की जरूरत को रेखांकित किया है। वर्तमान जियोपॉलिटिकल माहौल में किसी एक सोर्स, खासकर चीन, पर अत्यधिक निर्भरता, मार्केट लीडरशिप का लक्ष्य रखने वाली कंपनियों के लिए एक बड़ा स्ट्रेटेजिक रिस्क है।

इंडस्ट्री के अनुमान बताते हैं कि ग्लोबल LED डिस्प्ले मार्केट बढ़ता रहेगा, जिसमें चीन मैन्युफैक्चरिंग में अपना दबदबा बनाए रखेगा। India के लिए, एक महत्वपूर्ण ग्लोबल प्लेयर बनने के लिए कॉम्पोनेन्ट मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन डाइवर्सिफिकेशन में स्ट्रेटेजिक निवेश की आवश्यकता है। एनालिस्ट रिपोर्ट्स के अनुसार, India का इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट 2030 तक $61 बिलियन तक पहुंच सकता है, लेकिन LED डिस्प्ले सेगमेंट का योगदान मौजूदा स्ट्रक्चरल डिपेंडेंसी को दूर करने पर निर्भर करेगा। ग्लोबल सप्लाई चेन रीअलाइनमेंट्स और मजबूत डोमेस्टिक डिमांड से प्रेरित होकर, India को LED डिस्प्ले मैन्युफैक्चरिंग में ग्लोबल लीडर के तौर पर स्थापित करने का अवसर मौजूद है, लेकिन इसके लिए निर्णायक कार्रवाई और निरंतर एग्जीक्यूशन की मांग है।

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