AI स्किल्स की डिमांड में तूफान
फरवरी के जॉब मार्केट के आंकड़ों से साफ है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) जैसे हाई-स्किल्स वाले सेक्टर्स में ग्रोथ का खास जोर रहा। IT सेक्टर के भीतर ही AI/ML से जुड़ी हायरिंग में 40% का शानदार उछाल आया, जिसने सेक्टर की कुल 6% की सालाना ग्रोथ में बड़ा योगदान दिया। वहीं, ओवरऑल मार्केट में AI/ML रोल्स की मांग में 49% की जबरदस्त वृद्धि हुई।
इस तेजी की सबसे बड़ी वजहें भारतीय मल्टीनेशनल कॉरपोरेशन्स (MNCs) हैं। इन्होंने AI/ML हायरिंग में 82% की असाधारण बढ़ोतरी दर्ज की, जो विदेशी MNCs की 43% ग्रोथ से कहीं ज्यादा है। यह दिखाता है कि डोमेस्टिक कंपनियां नई टेक्नोलॉजी में आगे रहने के लिए भारी निवेश कर रही हैं। ग्लोबल लेवल पर भी, भारत AI टैलेंट एक्विजिशन में सबसे आगे है, जहां 2025 के अप्रैल तक 33.4% की ग्रोथ दर्ज की गई।
नॉन-IT सेक्टर्स का भी जलवा
टेक्नोलॉजी सेक्टर के अलावा, कई अन्य नॉन-IT इंडस्ट्रीज भी हायरिंग के लिए एक मजबूत आधार दे रही हैं। इंश्योरेंस सेक्टर 28% की ग्रोथ के साथ सबसे आगे रहा, इसके बाद BPO/ITES (22%), रियल एस्टेट (19%), हॉस्पिटैलिटी/ट्रैवल (15%) और रिटेल (14%) का नंबर आया। इन सेक्टर्स की मिली-जुली मांग के चलते फ्रेशर्स की ओवरऑल हायरिंग में 17% का सालाना इजाफा हुआ।
खास बात यह है कि ₹20 लाख प्रति वर्ष या उससे अधिक सैलरी वाले रोल्स की डिमांड 23% बढ़ी है, जो एंट्री-लेवल से लेकर अनुभवी प्रोफेशनल्स तक, सभी के लिए हायर एंड पर स्ट्रेंथ दिखाती है। IT सेक्टर में ₹50 लाख प्रति वर्ष से ऊपर के रोल्स में तो 45% की भारी उछाल देखी गई, जो स्पेशलाइज्ड IT स्किल्स के बढ़ते महत्व को दर्शाता है।
IT सेक्टर पर AI का असर और बाज़ार का मूड
हालांकि फरवरी के हायरिंग आंकड़े घरेलू मांग को मजबूती दिखा रहे हैं, लेकिन ग्लोबल इकोनॉमिक फैक्टर्स और AI के Disruptive पोटेंशियल के चलते IT सेक्टर का भविष्य थोड़ा जटिल दिख रहा है। कुछ ग्लोबल ब्रोकरेज हाउस AI के पारंपरिक सर्विस लाइन्स पर पड़ने वाले असर की वजह से रेवेन्यू में गिरावट की आशंका जता रहे हैं और प्रमुख IT कंपनियों की रेटिंग डाउनग्रेड कर रहे हैं। चिंता यह है कि AI, हाई-मार्जिन वाले एप्लिकेशन सर्विसेज के रेवेन्यू को कम कर सकता है, जिससे FY27 के लिए रेवेन्यू ग्रोथ का अनुमान 4-5% तक सिमट सकता है।
इस निराशावाद के चलते प्रमुख IT कंपनियों के मार्केट वैल्यू में 15-30% तक की गिरावट आई है। हालांकि, कुछ विश्लेषकों का मानना है कि AI नए काम के अवसर और पार्टनरशिप भी पैदा कर सकता है, जिसमें IT कंपनियां इन एडवांस्ड कैपेबिलिटीज को इंटीग्रेट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। Naukri की पैरेंट कंपनी Info Edge India, जिसकी मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग ₹65,000 करोड़ और P/E रेश्यो 47.9x के आसपास है, के स्टॉक प्राइस ने भी फरवरी और शुरुआती मार्च 2026 में ₹1,000-₹1,100 का लेवल दिखाया।
खतरे की घंटी: AI से जॉब्स का भविष्य?
इन शानदार हेडलाइन ग्रोथ के बावजूद, भारतीय IT सेक्टर और जॉब मार्केट प्लेटफॉर्म्स के लिए कुछ बड़े जोखिम बने हुए हैं। AI की तेजी से हो रही प्रगति, जो खास रोल्स तो बना रही है, लेकिन यह मौजूदा रेवेन्यू मॉडल्स के लिए एक बड़ा स्ट्रक्चरल खतरा भी पैदा कर रही है। विश्लेषकों का कहना है कि AI का पारंपरिक सेवाओं पर पड़ने वाला डिफ्लेशनरी (कीमतें घटाने वाला) असर, नई AI-ड्रिवेन ऑपर्च्युनिटीज से होने वाली कमाई से कहीं ज्यादा हो सकता है, जिससे कुछ कंपनियों के वैल्यूएशन में 30-65% तक की गिरावट आ सकती है।
मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव भी क्लाइंट्स के निर्णय लेने की प्रक्रिया को धीमा कर रहा है और प्रोजेक्ट्स को टाल रहा है, जो भविष्य के रेवेन्यू पर चिंता बढ़ा रहा है। हालांकि भारत AI टैलेंट एक्विजिशन में आगे है, लेकिन AI से होने वाली संभावित जॉब डिस्प्लेसमेंट को मैनेज करने और इसके आर्थिक फायदों को समान रूप से बांटने के लिए रेगुलेटरी फ्रेमवर्क और स्किलिंग पहलों की सख्त जरूरत है। भारत का विशाल इनफॉर्मल सेक्टर, बिना पर्याप्त री-स्किलिंग और सोशल प्रोटेक्शन के ऑटोमेशन के प्रति सबसे ज्यादा वल्नरेबल है।
आगे का रास्ता: AI और अवसर
Naukri के चीफ बिजनेस ऑफिसर, पवन गोयल के मुताबिक, पिछले महीने की शानदार तेजी और AI/ML रोल्स पर फोकस, नए वित्तीय वर्ष में भी मजबूत Momentum का संकेत देता है। भारतीय कंपनियां भविष्य के लिए खुद को तैयार करने के लिए AI टैलेंट में स्ट्रैटेजिक निवेश कर रही हैं। रिस्पोंसिबल AI प्रिंसिपल्स और प्राइवेसी लॉज का विकास एक आधार तैयार कर रहा है, हालांकि AI के व्यापक सामाजिक और रोजगार प्रभावों के लिए एक कम्प्रीहेंसिव रेगुलेटरी फ्रेमवर्क अभी भी विकसित हो रहा है।
बाजार की प्रतिक्रिया, AI को हाई-वैल्यू जॉब्स का ड्राइवर मानने या पारंपरिक IT रेवेन्यू के लिए एक संभावित Disruptor मानने के इस दोहरे नैरेटिव पर निर्भर करेगी। यही चीजें जॉब मार्केट और इसमें शामिल लिस्टेड एंटिटीज के भविष्य की दिशा तय करेंगी।