WFH की मांग क्यों उठाई जा रही है?
NITES का कहना है कि कोरोना महामारी के दौरान IT कर्मचारियों ने घर से काम करते हुए भी अपनी प्रोडक्टिविटी (Productivity) बनाए रखी और इंटरनेशनल क्लाइंट्स (International Clients) को बेहतर सेवाएं दीं। ऐसे में, ऊर्जा बचाना और फ्यूल (Fuel) की खपत कम करना देश के लिए बेहद जरूरी है, और WFH इसमें अहम भूमिका निभा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि इससे सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव भी कम होगा।
कंपनियों का 'वापसी' पर जोर
दूसरी ओर, देश के कई बड़े IT दिग्गज जैसे Tata Consultancy Services (TCS), Infosys और Wipro अपने कर्मचारियों को वापस ऑफिस बुला रहे हैं। कंपनियों का मानना है कि फेस-टू-फेस (Face-to-face) मीटिंग्स, नए आइडियाज (Ideas) पर काम करना, ट्रेनिंग (Training) और ऑफिस का माहौल कर्मचारियों की स्पिरिट (Spirit) के लिए जरूरी हैं। वे अब ऑफिस को सिर्फ काम की जगह नहीं, बल्कि कोलैबोरेशन (Collaboration) और टीम वर्क (Teamwork) का हब बना रहे हैं।
सरकार की भूमिका और भविष्य का रास्ता
NITES ने केंद्रीय श्रम मंत्रालय (Union Labour Ministry) से इस मामले में हस्तक्षेप करने और कंपनियों को WFH के विकल्प पर विचार करने के लिए प्रोत्साहित करने की गुहार लगाई है। यह मांग ऐसे समय में आई है जब सरकार फ्यूल बचाने और एनर्जी एफिशिएंसी (Energy Efficiency) बढ़ाने पर जोर दे रही है।
हालांकि, एक्सपर्ट्स (Experts) का मानना है कि हाइब्रिड वर्क मॉडल (Hybrid Work Model) IT सेक्टर के लिए सबसे बेहतर साबित हो सकता है। यह कर्मचारियों की फ्लेक्सिबिलिटी (Flexibility) और कंपनियों की प्रोडक्टिविटी व कल्चर (Culture) को बनाए रखने के बीच एक संतुलन बनाए रखता है। भविष्य में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस पर क्या दिशा-निर्देश जारी करती है और कंपनियां क्या फैसला लेती हैं।
