India EMS Sector: पॉलिसी का कमाल! 'फुल-स्टैक मैन्युफैक्चरिंग' की ओर भारत, शेयर क्यों भागे?

TECH
Whalesbook Logo
AuthorMehul Desai|Published at:
India EMS Sector: पॉलिसी का कमाल! 'फुल-स्टैक मैन्युफैक्चरिंग' की ओर भारत, शेयर क्यों भागे?
Overview

भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग (EMS) सेक्टर अब सिर्फ असेंबली से आगे बढ़कर फुल-स्टैक मैन्युफैक्चरिंग की ओर तेजी से बढ़ रहा है। यूनियन बजट 2026 में सरकार ने ईसीएमएस (ECMS) के लिए आवंटित राशि को दोगुना कर **₹40,000 करोड़** कर दिया है और सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 लॉन्च किया है, जिसका मकसद घरेलू क्षमताओं को सिरे से मजबूत करना है।

पॉलिसी का नया दांव: फुल-स्टैक मैन्युफैक्चरिंग का जोर

सरकार की इस नई रणनीति ने ईएमएस सेक्टर की दिशा ही बदल दी है। बजट 2026 में ईसीएमएस (ECMS) के लिए फंड को ₹40,000 करोड़ तक पहुंचाना और सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 का ऐलान, भारत को कंपोनेंट्स से लेकर इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) तक, हर लेवल पर एक मजबूत मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की ओर इशारा करता है। यह कदम भारत को सिर्फ असेंबली तक सीमित रखने के बजाय एडवांस मैन्युफैक्चरिंग की ओर ले जा रहा है।

इस पॉलिसी का असर निवेश में साफ दिख रहा है। अब तक ईसीएमएस के तहत बैकएंड इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग जैसे मल्टी-लेयर और हाई-डेन्सिटी इंटरकनेक्ट (HDI) प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (PCBs), कैमरा मॉड्यूल्स और एडवांस्ड सब-असेंबली में करीब ₹54,500 करोड़ के निवेश की प्रतिबद्धता मिल चुकी है। ये ऐसे सेगमेंट हैं जहाँ एंट्री बैरियर्स काफी ऊँचे हैं और मार्जिन भी बेहतर मिलता है, जो पारंपरिक असेंबली ऑपरेशन्स से काफी अलग है।

सेमीकंडक्टर में भारत की नई चाल

भारत का सेमीकंडक्टर पर फोकस अब बैक-एंड ऑपरेशन्स, जैसे आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्ट (OSAT) और एडवांस्ड पैकेजिंग पर ज्यादा है, बजाय फ्रंट-एंड फैब्रिकेशन के। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी कंपनियाँ इसमें अहम भूमिका निभा रही हैं। अब तक 10 सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग और पैकेजिंग प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिली है, जिनमें कुल मिलाकर लगभग ₹1.6 लाख करोड़ का निवेश होगा।

कौन हैं इस बूम के खिलाड़ी?

इस पॉलिसी का सीधा फायदा कुछ चुनिंदा कंपनियों को मिल रहा है। Kaynes Technology इस दौड़ में सबसे आगे दिख रही है। कंपनी इस साल बड़े पैमाने पर सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग शुरू करने की तैयारी में है और इसके सैनंद OSAT फैसिलिटी से जल्द ही बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन शुरू हो जाएगा। कंपनी को PCBs, कैमरा मॉड्यूल्स और कॉपर क्लैड लैमिनेट्स के लिए मंजूरी मिल चुकी है, जिससे इसके ग्रोथ की राह आसान हुई है।

Amber Enterprises भी बैकवर्ड इंटीग्रेशन पर जोर दे रही है। इसकी सब्सिडियरी Ascent Circuits और कोरियाई कंपनी Korea Circuits के साथ एक जॉइंट वेंचर (JV) के जरिए PCB और PCBA के लिए अप्रूवल मिले हैं। साथ ही, AC कंपोनेंट्स पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने से लोकलाइजेशन को भी बढ़ावा मिला है।

Syrma SGS Technology को मल्टी-लेयर PCBs और कैमरा मॉड्यूल्स के लिए अप्रूवल मिले हैं। कंपनी के पास पेंडिंग HDI/फ्लेक्स PCBs और लैमिनेट्स से भी भविष्य में बड़ा फायदा होने की उम्मीद है, खासकर इंडस्ट्रियल, ऑटोमोटिव और हेल्थकेयर जैसे सेक्टर्स में।

Dixon Technologies मोबाइल असेंबली से आगे बढ़कर कैमरा मॉड्यूल्स और ऑप्टिकल ट्रांसीवर जैसे क्षेत्रों में भी विस्तार कर रही है। कंपनी कॉम्पोनेंट कैटेगरी के विस्तार की भी योजना बना रही है।

PG Electroplast जैसी कंपनियाँ हाल के दिनों में कुछ इन्वेंटरी चुनौतियों से गुजरी हैं, लेकिन सेक्टर का ओवरऑल आउटलुक मजबूत बना हुआ है।

मार्केट में हलचल और भविष्य की उम्मीद

हाल के महीनों में ईएमएस स्टॉक्स में कुछ गिरावट देखी गई थी। इसकी वजह मेमोरी मॉड्यूल की ऊंची कीमतों से स्मार्टफोन डिमांड पर असर और प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) पेआउट्स का सामान्य होना जैसी कुछ छोटी-मोटी परेशानियां थीं। हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि ये अस्थायी बाधाएं हैं और लॉन्ग-टर्म स्ट्रक्चरल ग्रोथ की संभावनाएँ बहुत मजबूत हैं।

Union Budget 2026 में बढ़ा हुआ ईसीएमएस आउटले और फास्ट-ट्रैक अप्रूवल प्रोसेस इन अस्थायी दिक्कतों को दूर कर वैल्यू एडिशन को बढ़ावा देंगे। एनालिस्ट्स का मानना है कि Dixon Technologies में हालिया गिरावट के बाद निवेश का अच्छा मौका है, क्योंकि कंपनी अपने बढ़ते कॉम्पोनेंट पोर्टफोलियो और मैन्युफैक्चरिंग स्केल का फायदा उठाएगी। Syrma SGS Technology को भी बेहतर वैल्यूएशन और लोकलाइजेशन बेनिफिट्स के पूरी तरह से लागू होने के साथ बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है।

सरकार द्वारा मुख्य मैन्युफैक्चरिंग इक्विपमेंट्स पर FY28 तक दी गई ड्यूटी एग्जेंप्शन जैसी नीतियां इस सेक्टर की कॉम्पिटिटिवनेस को और बढ़ाने में मदद करेंगी।

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.