केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने गुरुवार को राज्यसभा को सूचित किया कि DoT का यह रिस्क-स्कोरिंग सिस्टम मोबाइल फोन नंबर्स को मीडियम, हाई या बहुत हाई फ्रॉड की संभावना के तौर पर फ्लैग (flag) करता है।
फ्रॉड को कैसे रोका जा रहा है?
यह फ्लैगिंग मैकेनिज्म (mechanism) बैंकों, नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) और यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) प्रोवाइडर्स को रियल-टाइम सेफगार्ड्स (safeguards) लागू करने की ताकत देता है। इनमें अलर्ट्स (alerts), ट्रांजैक्शन (transaction) में देरी, वॉर्निंग (warning) और संदिग्ध ट्रांजैक्शन्स को पूरी तरह ब्लॉक करना शामिल है। इससे ग्राहकों और फाइनेंशियल सिस्टम्स को सुरक्षित रखने में मदद मिल रही है।
डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (DIP) का रोल
FRI, DoT के डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (DIP) के भीतर एक रिस्क-बेस्ड मेट्रिक (metric) के तौर पर काम करता है। यह प्लेटफॉर्म सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की पुलिस, सेंट्रल एजेंसेज, इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर, पेमेंट ऑपरेटर्स और टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स सहित 1,200 से अधिक स्टेकहोल्डर्स (stakeholders) को जोड़ता है। DIP के माध्यम से, स्टेकहोल्डर्स संदिग्ध फ्रॉड नंबर्स को शेयर करते हैं, जिन्हें DoT तेजी से एक्शन लेने के लिए एनालाइज (analyze) करता है।
AI और स्पूफिंग प्रिवेंशन टूल्स
DIP में फ्रॉड रोकने के लिए और भी कई तकनीकों को इंटीग्रेट (integrate) किया गया है। ASTR AI टूल ने संदिग्ध कनेक्शन्स की पहचान की है, जिसके बाद प्रमुख टेलीकॉम प्रोवाइडर्स ने री-वेरिफिकेशन (re-verification) के बाद 8.8 मिलियन से ज़्यादा नंबर्स को डिस्कनेक्ट (disconnect) कर दिया है। इसके अलावा, इंटरनेशनल इनकमिंग स्पूप्ड कॉल्स प्रिवेंशन सिस्टम, जो 2024 के अंत से चालू है, ने भारतीय नंबर्स की नकल करने वाली इंटरनेशनल स्पूप्ड कॉल्स को लगभग 99% तक कम कर दिया है। इस सिस्टम ने एक ही दिन में 13.5 मिलियन ऐसी कॉल्स को ब्लॉक किया, जिससे भारत की साइबरसिक्योरिटी (cybersecurity) मजबूत हुई है।