भारत के डेटा सेंटर का भविष्य उज्ज्वल! **$70 अरब** निवेश से मार्केट पहुंचेगा **$22 अरब** तक

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
भारत के डेटा सेंटर का भविष्य उज्ज्वल! **$70 अरब** निवेश से मार्केट पहुंचेगा **$22 अरब** तक
Overview

भारत का डेटा सेंटर मार्केट एक बड़ी छलांग लगाने के लिए तैयार है। अगले कुछ सालों में **$70 अरब** के जबरदस्त निवेश से यह मार्केट **$22 अरब** तक पहुँचने का अनुमान है। क्लाउड, AI और 5G की बढ़ती मांग इस ग्रोथ को बढ़ावा दे रही है।

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डिजिटल इंडिया का बढ़ता कदम

भारत का डेटा सेंटर मार्केट वाकई एक बड़ी छलांग लगाने की कगार पर है। अनुमान है कि 2030 तक यह $22 अरब के आंकड़े को छू लेगा, जो मौजूदा वैल्यू से दोगुना से भी ज़्यादा है। इस ज़बरदस्त ग्रोथ के पीछे $70 अरब से ज़्यादा का बड़ा निवेश है, जो डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती ग्लोबल मांग का सीधा जवाब है।

ग्रोथ के मुख्य कारण

इस घरेलू विस्तार को कई फैक्टर्स बढ़ावा दे रहे हैं। इंटरनेट का बढ़ता इस्तेमाल और बिजनेस की एफिशिएंसी के लिए क्लाउड सर्विस को अपनाना प्रमुख कारण हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और हाई-परफॉरमेंस कंप्यूटिंग (HPC) की तेज़ी से बढ़ती मांग के लिए भारी प्रोसेसिंग और स्टोरेज की ज़रूरत पड़ रही है। इसके अलावा, 5G के तेजी से रोलआउट ने डेटा यूसेज को नाटकीय रूप से बढ़ा दिया है, जिससे प्रति यूजर हर महीने वायरलेस डेटा की खपत 25 GB से ज़्यादा हो गई है।

क्षमता और निर्माण

फिलहाल, भारत में 164 डेटा सेंटर हैं, जिनकी क्षमता लगभग 1.4-1.6 GW है। यह क्षमता काफी बढ़ने वाली है, क्योंकि 700 MW से ज़्यादा अंडर कंस्ट्रक्शन है और 1-1.2 GW की प्लानिंग चल रही है। 2030 तक कुल क्षमता 4-5 GW तक पहुँचने की उम्मीद है, जो विभिन्न सेक्टर्स से लगातार बनी हुई मांग को दर्शाता है।

निवेश की रफ्तार

इस सेक्टर में निवेश की रफ्तार काफी तेज है। 2020 से 2024 के बीच $13-15 अरब का निवेश आ चुका है, जिसमें 80% फॉरेन इन्वेस्टर्स का योगदान है। निवेश की पाइपलाइन मजबूत बनी हुई है, अगले पांच सालों में $60-70 अरब के निवेश की घोषणाएं की गई हैं। बड़े क्लाउड प्रोवाइडर्स और स्ट्रेटेजिक ज्वाइंट वेंचर्स इस निवेश का नेतृत्व कर रहे हैं।

लागत का फायदा और पॉलिसी सपोर्ट

भारत की लागत का फायदा (Cost Advantage) एक बड़ा आकर्षण है। $6-7 मिलियन प्रति MW की कंस्ट्रक्शन कॉस्ट का अनुमान है, जो सिंगापुर और जापान जैसे स्थापित बाजारों की तुलना में काफी कम है। सरकारी सपोर्ट, जिसमें लॉन्ग-टर्म टैक्स इंसेंटिव, GST बेनिफिट्स और अप्रूवल की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करना शामिल है, सेक्टर की ग्रोथ को और बढ़ावा दे रहा है। यह अनुकूल माहौल भारत को डेटा सेंटर और AI इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक महत्वपूर्ण ग्लोबल हब बना रहा है।

भौगोलिक वितरण

वर्तमान में अधिकांश क्षमता मुंबई (49%), चेन्नई (18%) और नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) (11%) जैसे प्रमुख शहरों में केंद्रित है, लेकिन नए हब भी तेजी से विकसित हो रहे हैं। पुणे, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे शहर अपने मजबूत IT सेक्टर और कम ऑपरेटिंग कॉस्ट के कारण विस्तार देख रहे हैं। ऑपरेटर्स टियर-II शहरों जैसे अहमदाबाद, कोच्चि, जयपुर और विशाखापत्तनम पर भी ध्यान दे रहे हैं, जहाँ 2026 तक संयुक्त क्षमता 100 MW से ज़्यादा होने की उम्मीद है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.