D2C सेक्टर में बंपर ग्रोथ, पर मुनाफे पर भारी संकट! टियर 2/3 शहरों से बढ़ रहे ऑर्डर, पर ब्रांड्स की जेबें खाली?

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
D2C सेक्टर में बंपर ग्रोथ, पर मुनाफे पर भारी संकट! टियर 2/3 शहरों से बढ़ रहे ऑर्डर, पर ब्रांड्स की जेबें खाली?
Overview

भारत का डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (D2C) सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है, खासकर टियर 2 और 3 शहरों से। ये शहर अब नए ऑर्डर का लगभग दो-तिहाई और GMV ग्रोथ का 60% हिस्सा ला रहे हैं। हालांकि, ऑर्डर वॉल्यूम और GMV में अच्छी बढ़त के बावजूद, ब्रांड्स अभी भी प्रॉफिटेबिलिटी (profitability) और हाई कस्टमर एक्विजिशन कॉस्ट (customer acquisition cost) से जूझ रहे हैं।

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टियर 2/3 शहरों से D2C की रिकॉर्ड ग्रोथ

भारत में डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (D2C) सेक्टर में एक बड़ी क्रांति आ गई है, जिसकी अगुआई टियर 2 और 3 शहरों के ग्राहक कर रहे हैं। ये छोटे शहर अब नए ऑर्डर्स में से लगभग दो-तिहाई और ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू (GMV) में 60% की ग्रोथ के लिए जिम्मेदार हैं। फाइनेंशियल ईयर 2026 में, D2C ऑर्डर वॉल्यूम में 33% और GMV में 32% का शानदार इजाफा देखने को मिला।

लॉजिस्टिक्स में सुधार, पर मुनाफे पर ब्रेक?

ऑपरेशनल मोर्चे पर एक बड़ी राहत रिटर्न-टू-ऑरिजिन (RTO) रेट्स में भारी गिरावट है। यह दरें नवंबर 2025 के करीब 39% से घटकर फरवरी 2026 तक लगभग 21% पर आ गई हैं। Unicommerce के मुताबिक, डिलीवरी में सुधार और ऑर्डर वेरिफिकेशन के बेहतर तरीकों ने इसमें मदद की है। हालांकि, हर RTO शिपमेंट पर कंपनियों को मूल शिपिंग फी का 1.5 से 2 गुना तक खर्च उठाना पड़ता है।

बढ़ती लागतें और प्रॉफिटेबिलिटी का संघर्ष

भारत का D2C मार्केट 2030 तक $60 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है, जिसमें टियर 2/3 शहरों की भूमिका अहम है। इन इलाकों में डिजिटल एक्सेस बढ़ने और मिडिल क्लास के विस्तार से यह ग्रोथ संभव हुई है। लेकिन, ग्राहकों को ऑनलाइन जोड़ने की लागत (Customer Acquisition Costs - CAC) भी तेजी से बढ़ी है। कई मामलों में, एक नया ग्राहक जोड़ने का खर्च, उसके पहले ऑर्डर से होने वाले मुनाफे के बराबर या उससे ज्यादा हो सकता है। ऐसे में, ब्रांड्स रिपीट बिज़नेस या सस्ते ऑर्गेनिक चैनलों पर बहुत ज्यादा निर्भर हो जाते हैं, जो छोटे D2C व्यवसायों के लिए मुश्किल है।

80% ब्रांड्स को मुनाफा नहीं

आंकड़े बताते हैं कि भारत के 80% से ज्यादा D2C ब्रांड्स अभी तक मुनाफे की स्थिति में नहीं पहुंच पाए हैं। D2C मॉडल डायरेक्ट मार्जिन देता तो है, लेकिन इसके साथ अक्सर मार्केटिंग और डिलीवरी का खर्च ट्रेडिशनल रिटेल से काफी ज्यादा होता है। भारत में 11,000 से ज्यादा D2C कंपनियां हैं, लेकिन इनमें से कुछ ही बड़ी कमाई कर पाती हैं। इस कड़ी प्रतिस्पर्धा में, ग्राहक को बनाए रखना (customer retention) सबसे जरूरी हो जाता है। लेकिन, कई भारतीय ग्राहक ब्रांड लॉयल्टी से ज्यादा डिस्काउंट को तरजीह देते हैं।

आगे की राह

Mamaearth जैसी कंपनियों का ऑफलाइन रिटेल की ओर बढ़ना और Nykaa जैसे सफल प्लेयर्स के स्टॉक वैल्यू में आई गिरावट, इस बात का संकेत है कि सिर्फ ऑनलाइन ग्रोथ से मुनाफा तय नहीं होता। निवेशकों की नजरें अब सिर्फ ग्रोथ नहीं, बल्कि प्रॉफिटेबल ग्रोथ पर टिकी हैं। AI पर्सनलाइजेशन और एडवांस लॉजिस्टिक्स के साथ-साथ यूनिट इकोनॉमिक्स (unit economics) और प्रॉफिटेबिलिटी पर ध्यान देना, D2C ब्रांड्स के लिए लॉन्ग-टर्म सर्वाइवल की कुंजी साबित होगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.