लोकल चिप्स, रियल प्रोडक्ट्स: गैप को भरता यह कोलैबोरेशन
यह पार्टनरशिप भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर की एक महत्वपूर्ण कमी को दूर करने का लक्ष्य रखती है। Mindgrove की एडवांस्ड चिप टेक्नोलॉजी और Pinetics की मजबूत प्रोडक्ट डिज़ाइन क्षमता का संगम, महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को हकीकत में बदल रहा है। यह पहला मौका है जब भारतीय डिज़ाइन की चिप्स को सीधे कमर्शियल गुड्स में इंटीग्रेट किया जा रहा है, जो भारत की सप्लाई चेन और टेक्नोलॉजिकल इंडिपेंडेंस को और मजबूत करेगा।
भारतीय चिप्स से चलेंगे आपके स्मार्ट डिवाइसेज
यह कोलैबोरेशन भारतीय डिज़ाइन की चिप्स को आम कंज्यूमर प्रोडक्ट्स में लाने की दिशा में एक ठोस कदम है। Mindgrove का Secure IoT SoC, जो 700 MHz की स्पीड पर चलने वाली 28nm चिप है, बायोमेट्रिक सिस्टम, स्मार्ट लॉक और पॉइंट-ऑफ-सेल (POS) मशीनों में इस्तेमाल होगी। स्मार्ट होम और एक्सेस कंट्रोल मार्केट में इन डिवाइसेज की माँग तेजी से बढ़ रही है। अकेले ग्लोबल स्मार्ट लॉक मार्केट $70 बिलियन तक पहुँच सकता है, जबकि बायोमेट्रिक मार्केट $150 बिलियन का आंकड़ा छूने का अनुमान है। Mindgrove का नया Vision SoC, जो एज कंप्यूटिंग और विजन प्रोसेसिंग के लिए डिज़ाइन किया गया है, CCTV कैमरों और ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) जैसे डिवाइसेज में इस्तेमाल होगा। यह तेजी से बढ़ते कैमरा SoC मार्केट (जिसका अनुमान $3 बिलियन से अधिक है) को टारगेट करता है। Mindgrove अपने RISC-V बेस्ड Shakti Core का उपयोग कर रहा है, जिसे भारत की DLI स्कीम का भी सपोर्ट मिला है, और इसका लक्ष्य ग्लोबल चिप दिग्गजों को टक्कर देना है। Pinetics, एक ओडीएम (ODM) के तौर पर, इस चिप टेक्नोलॉजी को रेडी-टू-सेल प्रोडक्ट्स में बदलने में अहम भूमिका निभाएगा।
सरकारी सपोर्ट से रफ्तार पकड़ रही भारत की चिप ग्रोथ
यह साझेदारी भारत की सेमीकंडक्टर में आत्मनिर्भर बनने की राष्ट्रीय रणनीति का एक प्रमुख उदाहरण है। इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) और डिज़ाइन लिंक्ड इंसेटिव (DLI) जैसी सरकारी पहलें देश के चिप डिज़ाइन सेक्टर को मजबूती दे रही हैं। DLI स्कीम, जो फाइनेंशियल और इंफ्रास्ट्रक्चर सहायता प्रदान करती है, ने AI चिप्स और SoCs जैसे क्षेत्रों में 30 से अधिक कंपनियों को सहारा दिया है। Mindgrove को अपने Vision SoC प्रोजेक्ट के लिए DLI स्कीम के तहत ₹15 करोड़ की सहायता मिली है। सरकारी नीतियां जबरदस्त ग्रोथ को बढ़ावा दे रही हैं; भारत का सेमीकंडक्टर मार्केट 2030 तक $100 बिलियन और 2035 तक $300 बिलियन तक पहुँचने की उम्मीद है। इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का आउटपुट पिछले दशक में छह गुना बढ़कर FY2025 में $129.9 बिलियन हो गया है, जिसमें प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेटिव (PLI) जैसी स्कीमें अहम रही हैं। जहाँ Tata Electronics, Micron और Vedanta-Foxconn जैसी ग्लोबल कंपनियाँ मैन्युफैक्चरिंग में निवेश कर रही हैं, वहीं Pinetics जैसी घरेलू फर्मों द्वारा भारतीय चिप्स का उपयोग पूरे वैल्यू चेन को मजबूत करने की सरकारी रणनीति पर मुहर लगाता है। 2021 में स्थापित Mindgrove ने अब तक $10.3 मिलियन जुटाए हैं, जिसमें दिसंबर 2024 में हुए सीरीज A राउंड ने भारतीय चिप डिज़ाइन की संभावनाओं पर निवेशक विश्वास जताया है। 2020 में शुरू हुई Pinetics, प्रोडक्ट डेवलपमेंट सेवाएं प्रदान करती है और वर्तमान में अनफंडेड है।
आगे की राह: चुनौतियाँ और प्रतिस्पर्धा
सहायक सरकारी नीतियों के बावजूद, Mindgrove और Pinetics को कई बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। ग्लोबल सेमीकंडक्टर मार्केट में Qualcomm, Ambarella और Nvidia जैसी कंपनियाँ कैमरा SoCs में, जबकि Allegion और Assa Abloy जैसी कंपनियाँ स्मार्ट लॉक सेगमेंट में हावी हैं। इन स्थापित खिलाड़ियों के पास भारी R&D बजट, विशाल पेटेंट और मजबूत सप्लाई चेन नेटवर्क हैं। Mindgrove, RISC-V जैसी नई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने और सरकारी समर्थन के बावजूद, एक ऐसे कठिन बाजार में काम कर रहा है जहाँ प्रोडक्शन को स्केल करना और अंतरराष्ट्रीय कीमतों के साथ प्रतिस्पर्धा करना आसान नहीं है। Pinetics के लिए, Mindgrove जैसी अनफंडेड डोमेस्टिक सप्लायर पर निर्भर रहना सप्लाई चेन के लिए जोखिम पैदा कर सकता है, खासकर अगर Mindgrove को प्रोडक्शन या स्केलिंग में दिक्कतें आती हैं। DLI स्कीम डिज़ाइन लागतों को कवर करने में मदद करती है, लेकिन फैबलेस स्टार्टअप के लिए बड़े पैमाने पर बिक्री और लगातार मुनाफे का रास्ता लंबा और कठिन है। तेज टेक्नोलॉजिकल बदलाव और भयंकर ग्लोबल प्रतिस्पर्धा के जोखिम काफी बड़े हैं।
भारत के चिप भविष्य की ओर अगला कदम
Mindgrove और Pinetics के बीच यह पार्टनरशिप भारत के सेमीकंडक्टर सेक्टर में बढ़ती गति का एक महत्वपूर्ण संकेत है। भारत का लक्ष्य 2035 तक अपनी चिप्स की 60% से अधिक ज़रूरतों को पूरा करना है, जिसके लिए इस तरह के सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। अगर यह वेंचर सफल होता है, तो यह अन्य डिज़ाइन फर्मों को भारतीय चिप्स अपनाने के लिए प्रेरित कर सकता है, जिससे इंडस्ट्री में तेजी आएगी और संभवतः घरेलू सिलिकॉन वाले प्रोडक्ट्स के लिए एक एक्सपोर्ट मार्केट भी तैयार हो सकता है। विश्लेषक अनुमान AI, ऑटोमोटिव और डेटा सेंटर की बढ़ती माँगों से प्रेरित भारत के सेमीकंडक्टर मार्केट में मजबूत ग्रोथ की ओर इशारा करते हैं। यह उन कंपनियों के लिए बड़े अवसर पेश करता है जो इस तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्र में चिप डिज़ाइन और प्रोडक्ट इंटीग्रेशन में महारत हासिल कर सकती हैं।
