Micron का Sanand प्लांट अब चालू: भारत की चिप महत्वाकांक्षा को मिली नई उड़ान
गुजरात के Sanand में Micron का एडवांस्ड असेंबली, टेस्ट, मार्किंग और पैकेजिंग (ATMP) प्लांट अब ऑपरेशनल हो गया है। यह प्लांट एडवांस मेमोरी वेफर्स को फिनिश्ड चिप्स में बदलने का काम करेगा और सीधे ग्लोबल मार्केट्स में भेजेगा। इस अत्याधुनिक प्लांट में ₹22,500 करोड़ से ज़्यादा का निवेश किया गया है, और यह हर हफ्ते लाखों चिप्स की उत्पादन क्षमता रखता है।
2026 तक 3 और यूनिट्स तैयार होने की उम्मीद
इलेक्ट्रॉनिक्स और IT मंत्रालय की ओर से यह भी कन्फर्म किया गया है कि भारत में अप्रूव्ड 10 सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट्स में से चार 2026 के अंत तक कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू कर देंगे। इनमें Micron का प्लांट और तीन अन्य प्रमुख सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स शामिल हैं। इस विस्तार योजना का एक अहम हिस्सा Dholera में Tata का फैब (Fab) है, जिसमें अनुमानित ₹91,000 करोड़ का निवेश होगा। यह फैब 2026 के आखिर तक लॉजिक और ऑटोमोटिव चिप्स के उत्पादन के लिए तैयार होने की उम्मीद है। यह पूरा डेवलपमेंट भारत की सेमीकंडक्टर मिशन और प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य देश भर के 6 राज्यों में ₹1.60 लाख करोड़ से ज़्यादा का निवेश आकर्षित करना है।
ग्लोबल सेमीकंडक्टर मार्केट में भारत की जगह
यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है जब ग्लोबल सेमीकंडक्टर मार्केट का आकार 2026 तक $975 बिलियन से ज़्यादा होने का अनुमान है। AI, हाई-परफॉरमेंस कंप्यूटिंग (HPC) और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs) जैसे क्षेत्र इस ग्रोथ को बढ़ावा देंगे। हालाँकि, मौजूदा समय में चिप निर्माण का बड़ा हिस्सा Taiwan और South Korea जैसी जगहों पर केंद्रित है। अमेरिका और यूरोपीय यूनियन जैसे देश भी अपनी डोमेस्टिक कैपेसिटी को बढ़ाने के लिए सैकड़ों अरब डॉलर का निवेश कर रहे हैं। ऐसे में, भारत की ग्लोबल वेफर कैपेसिटी में हिस्सेदारी फिलहाल 1% से भी कम है, जो इस सेक्टर में कॉम्पिटिशन की कड़ी चुनौती को दर्शाता है। अच्छी बात यह है कि भारत में सेमीकंडक्टर डिज़ाइन इंजीनियर्स की बड़ी संख्या है, जो दुनिया भर के इंजीनियर्स का करीब 20% है। बाज़ार के जानकारों का मानना है कि भारत का डोमेस्टिक सेमीकंडक्टर मार्केट 2030 तक $108 बिलियन का आंकड़ा पार कर सकता है, जो 15% की CAGR की दर से बढ़ेगा।
सेमीकंडक्टर फैब्स की राह में बड़ी बाधाएँ
तेज़ रफ़्तार प्रोजेक्ट अप्रूवल और नई यूनिट्स के उद्घाटन के बावजूद, भारत के सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग के सफर में कई गंभीर चुनौतियाँ हैं। सबसे बड़ी बाधा स्पेशलाइज्ड मैन्युफैक्चरिंग टैलेंट की भारी कमी है। अनुमान है कि 2027 तक ऐसे 13,000 फैब्रिकेशन स्पेशलिस्ट्स की कमी हो सकती है। भारत में डिज़ाइन इंजीनियर्स की बहुतायत है, लेकिन चिप फैब्रिकेशन और प्रोसेस टेक्नोलॉजी में विशेषज्ञता वाले लोगों की कमी है।
इंफ्रास्ट्रक्चर की कमियाँ भी एक महत्वपूर्ण समस्या हैं। सेमीकंडक्टर फैब्स को चलाने के लिए निर्बाध बिजली आपूर्ति, बड़ी मात्रा में पानी और कुशल लॉजिस्टिक्स की आवश्यकता होती है। भारत के मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर में इन ज़रूरतों को पूरा करने में अभी और विकास की गुंजाइश है, जिससे ऑपरेशनल लागत और जोखिम बढ़ सकते हैं। इसके अलावा, Vedanta-Foxconn जैसे ज्वाइंट वेंचर की पिछली विफलताएँ इस क्षेत्र की जटिलताओं और उच्च जोखिमों को उजागर करती हैं। फैब की सफलता के लिए गहरी तकनीकी विशेषज्ञता और सप्लाई चेन का मज़बूत होना ज़रूरी है, जो भारत में अभी विकसित हो रहा है।
सरकारी इंसेंटिव्स, जो कि अनुमानित 50% तक का फिस्कल सपोर्ट प्रदान करते हैं, स्थापित ग्लोबल इकॉनमीज़ और इंफ्रास्ट्रक्चर के मुकाबले कितने प्रभावी होंगे, यह देखना बाकी है। नीतिगत स्थिरता (Policy Stability) और सरकारी स्वीकृतियों की गति (Execution Speed) भी वो प्रमुख कारक हैं जिन पर ग्लोबल इन्वेस्टर्स की पैनी नज़र रहती है।
भविष्य की राह: अवसरों और चुनौतियों के बीच
सरकार का लक्ष्य भारत को ग्लोबल सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में एक भरोसेमंद और वैकल्पिक डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करना है। देश के डिज़ाइन टैलेंट और विकसित होती मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं का लाभ उठाने पर ज़ोर दिया जा रहा है। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय कंपनियों से निवेश और पूरी वैल्यू चेन के निर्माण पर ध्यान केंद्रित करने के साथ, भारत का सेमीकंडक्टर सेक्टर अगले दशक में महत्वपूर्ण ग्रोथ के लिए तैयार है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर और टैलेंट से जुड़ी कमियों को दूर करना, नीतियों में निरंतरता बनाए रखना और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को मज़बूत करना महत्वपूर्ण होगा।