सरकार का नया प्लान: चिप डिजाइनिंग को मिलेगी नई उड़ान!
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0 का ऐलान किया है। इस नए मिशन का फोकस अब सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग (Manufacturing) नहीं, बल्कि देश में चिप डिजाइनिंग (Chip Designing) की क्षमता को ग्लोबल स्तर पर ले जाना है। सरकार का लक्ष्य है कि भारत सिर्फ चिप्स का निर्माण ही न करे, बल्कि डिजाइन और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) के मामले में भी दुनिया का एक बड़ा हब बने। इसके लिए फाइनेंशियल ईयर 2026-27 में ₹1,000 करोड़ का बजट (Budget) रखा गया है.
स्टार्टअप्स और डिजाइन पर खास जोर
ISM 2.0 का सबसे बड़ा फोकस देश के चिप डिजाइन स्टार्टअप्स (Startups) और कंपनियों पर रहेगा। सरकार इन्हें एंड-टू-एंड प्रोडक्ट डिजाइन (End-to-End Product Design) बनाने, उन्हें मार्केट में लाने और ग्लोबल लीडर बनने में मदद करेगी। भारत की अपनी एक बड़ी टैलेंट पूल (Talent Pool) है, जो इस क्षेत्र में बड़ा योगदान दे सकती है। इसका एक बड़ा उदाहरण क्वालकॉम (Qualcomm) के साथ मिलकर 2 नैनोमीटर (2nm) चिप का सह-विकास है, जो बेंगलुरु (Bengaluru) में दिखाया गया। डिजाइन लिंक्ड इंसेटिव (DLI) स्कीम के तहत भी कई चिप डिजाइन प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिल चुकी है, जिससे स्टार्टअप्स के लिए एंट्री बैरियर (Entry Barrier) कम हुआ है.
मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को भी मिलेगा बूस्ट
डिजाइनिंग पर फोकस के साथ-साथ, ISM 2.0 देश में एडवांस मैन्युफैक्चरिंग (Advanced Manufacturing) कैपेबिलिटी को भी मजबूत करेगा। मिशन का लक्ष्य पूरी सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन (Value Chain) को डोमेस्टिक (Domestic) स्तर पर इंटीग्रेट (Integrate) करना है। इसमें फैब्रिकेशन (Fabrication), इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स (Equipment Manufacturers), स्पेशल केमिकल्स (Special Chemicals), गैस सप्लायर्स (Gas Suppliers) और टेस्टिंग (Testing) जैसी चीजें शामिल हैं। सरकार 2 नैनोमीटर (2nm) जैसे एडवांस्ड नोड्स (Advanced Nodes) पर प्रोडक्शन कैपेबिलिटी हासिल करने का लक्ष्य रख रही है। ISM 1.0 ने जहां फैब्रिकेशन, असेंबली और टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) की नींव रखी थी, वहीं ISM 2.0 डोमेस्टिक प्रोडक्शन और फुल-स्टैक इंडियन IP (Full-Stack Indian IP) पर भी ध्यान देगा.
ग्लोबल मार्केट और भारत की पोजीशन
दुनियाभर में सप्लाई चेन (Supply Chain) की कमजोरियों और भू-राजनीतिक बदलावों के बीच भारत अपनी पोजीशन मजबूत कर रहा है। ताइवान (Taiwan) जैसे देश अभी ग्लोबल चिप प्रोडक्शन में आगे हैं, लेकिन भारत का विशाल इंजीनियरिंग टैलेंट पूल (Engineering Talent Pool) उसे एक मजबूत दावेदार बनाता है। ग्लोबल सेमीकंडक्टर मार्केट (Global Semiconductor Market) 2030 तक $1 ट्रिलियन (Trillion) तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि भारत का अपना चिप मार्केट भी 2030 तक $100-$110 बिलियन (Billion) तक पहुंचने की उम्मीद है। भारत खुद को एक भरोसेमंद पार्टनर के तौर पर पेश कर रहा है।
चुनौतियां और आगे का रास्ता
हालांकि, इस महत्वाकांक्षी प्लान (Ambitious Plan) में कुछ चुनौतियां भी हैं। ₹1,000 करोड़ का बजट, फैब्रिकेशन प्लांट्स (Fabrication Plants) लगाने के लिए जरूरी मल्टी-बिलियन डॉलर (Multi-Billion Dollar) के निवेश की तुलना में कम है। भारत की मुख्य ताकत डिजाइनिंग में है, लेकिन एडवांस मैन्युफैक्चरिंग (Advanced Manufacturing) में अभी भी गैप (Gap) है, जिसके लिए अभी भी विदेशी फाउंड्री (Foundries) पर निर्भर रहना पड़ता है। सेमीकंडक्टर के लिए जरूरी इक्विपमेंट, केमिकल्स और गैसों के डोमेस्टिक इकोसिस्टम (Domestic Ecosystem) का विकास भी एक जटिल और महंगा काम है, जिसमें 90% इनपुट्स (Inputs) अभी भी इम्पोर्ट (Import) किए जाते हैं। इसके अलावा, स्किल्ड मैन्युफैक्चरिंग टैलेंट (Skilled Manufacturing Talent) की भी कमी है, और R&D (Research & Development) खर्च भी ग्लोबल लीडर्स (Global Leaders) की तुलना में कम है।
भविष्य की राह
इन चुनौतियों के बावजूद, भारत का सेमीकंडक्टर सेक्टर (Semiconductor Sector) लगातार बढ़ रहा है। 2030 तक 400,000 प्रोफेशनल (Professionals) इस सेक्टर में काम कर सकते हैं। डिजाइन पर खास फोकस, मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने के प्रयास और पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करने से भारत ग्लोबल सेमीकंडक्टर नेटवर्क (Global Semiconductor Network) में एक मजबूत खिलाड़ी बन सकता है। लगातार सरकारी नीतियां और अंतरराष्ट्रीय सहयोग (International Collaborations) इस लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभाएंगे.
