IT सर्विस सेक्टर में बड़े बदलाव
Union Budget FY26-27 में भारत के IT सर्विस एक्सपोर्ट इंडस्ट्री के लिए कई अहम घोषणाएं की गई हैं। सरकार ने सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, IT-इनेबल्ड सर्विसेज़, KPO और कॉन्ट्रैक्ट R&D जैसी सभी सर्विसेज़ को एक कॉमन 'Information Technology Services' कैटेगरी में ला दिया है। इन सभी के लिए 15.5% का यूनिफाइड सेफ हार्बर मार्जिन तय किया गया है।
एक और बड़ा ऐलान यह है कि इन सेफ हार्बर प्रोविजन्स की एलिजिबिलिटी की सीमा को ₹300 करोड़ से बढ़ाकर ₹2,000 करोड़ कर दिया गया है। इससे ज़्यादा बड़ी IT फर्म्स को फायदा मिलेगा। कंप्लायंस को आसान बनाने के लिए अप्रूवल प्रोसेस को ऑटोमेटेड और रूल-ड्रिवन सिस्टम में बदला जा रहा है, जिससे कंपनियां अपने अप्रूवल को 5 साल तक बढ़ा सकेंगी। डिस्प्यूट रेसोल्यूशन को तेज़ करने के लिए एडवांस प्राइसिंग एग्रीमेंट (APA) रूट को दो साल के अंदर कन्क्लूड करने का लक्ष्य रखा गया है। ये रिफॉर्म्स बड़ी और मिडकैप IT फर्म्स के लिए ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ाने और ग्लोबल फुटप्रिंट का विस्तार करने में मदद करेंगे।
डेटा सेंटर्स और क्लाउड सर्विसेज़ को मिलेगा बूस्ट
भारत को ग्लोबल क्लाउड वर्कलोड्स के लिए एक प्रमुख केंद्र बनाने के मकसद से, बजट में विदेशी कंपनियों को बड़ा टैक्स हॉलिडे दिया गया है। 2047 तक, जो विदेशी एंटिटीज़ भारतीय डेटा सेंटर्स का इस्तेमाल करके ग्लोबल ग्राहकों को क्लाउड सर्विसेज़ देंगी, उन्हें टैक्स में छूट मिलेगी। हालांकि, भारतीय ग्राहकों को सर्विसेज़ एक इंडियन रीसेलर एंटिटी के ज़रिए ही देनी होंगी।
यह पॉलिसी भारत को सिर्फ डोमेस्टिक डेटा सेंटर मार्केट तक सीमित रखने के बजाय ग्लोबल क्लाउड डिमांड के लिए एक स्ट्रैटेजिक प्लेटफॉर्म के तौर पर स्थापित करेगी। इससे कोलोकेशन, पावर इंफ्रास्ट्रक्चर और फाइबर कनेक्टिविटी जैसे सेक्टर्स में बड़े लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट आने की उम्मीद है। एनालिस्ट्स का अनुमान है कि इंडियन पब्लिक क्लाउड सर्विसेज़ मार्केट 2029 तक $30.4 बिलियन तक पहुंच सकता है, जो 22.6% के कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) से बढ़ेगा। डेटा सेंटर सर्विसेज़ के लिए 15% का सेफ हार्बर भी प्रस्तावित है, जिससे इन्वेस्टर कॉन्फिडेंस बढ़ेगा। ये कदम AI के लिए ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत करेंगे।
गवर्नेंस और इकोनॉमी में AI का इंटीग्रेशन
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को गवर्नेंस और सर्विस डिलीवरी को बेहतर बनाने के लिए एक अहम टूल के तौर पर देखा जा रहा है। बजट में AI इनिशिएटिव्स को नेशनल क्वांटम मिशन और नेशनल रिसर्च फंड जैसे बड़े रिसर्च मिशन से जोड़ा गया है। एक हाई-पावर्ड स्टैंडिंग कमिटी इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज़, जिसमें AI भी शामिल है, के जॉब्स और स्किल्स पर पड़ने वाले असर का आकलन करेगी।
AI को एग्रीकल्चरल एडवाइजरी सर्विसेज़ (Bharat-VISTAAR), असिस्टिव डिवाइसेस और पोर्ट सिक्योरिटी स्कैनिंग जैसे विभिन्न सेक्टर्स में लागू करने की योजना है। यह सरकार की ओर से सोशल और इकोनॉमिक एडवांस्मेंट के लिए टेक्नोलॉजी को अपनाने की व्यापक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
मेजर IT प्लेयर्स की वैल्यूएशन पर असर
भारत की IT एक्सपोर्ट इकोनॉमी की रीढ़, Tata Consultancy Services (TCS), Infosys, Wipro और LTIMindtree जैसी कंपनियों का मार्केट कैपिटलाइज़ेशन काफी बड़ा है। TCS का मार्केट कैप लगभग ₹11.57 लाख करोड़ और P/E रेशियो 22.7 है, Infosys का मार्केट कैप ₹6.71 लाख करोड़ और P/E 23.3 है, Wipro का मार्केट कैप ₹2.57 लाख करोड़ और P/E 19.3 है, वहीं LTIMindtree का मार्केट कैप ₹1.80 लाख करोड़ और P/E 34.7 है।
बजट में प्रस्तावित ट्रांसफर प्राइसिंग सर्टेनिटी और सेफ हार्बर मार्जिन जैसे बदलाव, इन कंपनियों के लिए कंप्लायंस के बोझ और डिस्प्यूट्स को कम करेंगे, जो ऐतिहासिक रूप से प्रॉफिट मार्जिन को प्रभावित करते रहे हैं। इससे ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ने की उम्मीद है, जो वैल्यूएशन को बढ़ा सकती है। Wipro और TCS का Infosys और LTIMindtree की तुलना में कम P/E रेशियो शायद ग्रोथ एक्सपेक्टेशंस या मार्केट पर्सेप्शन्स में अंतर को दर्शाता है, जिसे ये पॉलिसीज़ प्रभावित कर सकती हैं।
क्लाउड और डेटा सेंटर सेक्टर का ग्रोथ आउटलुक
भारत का क्लाउड कंप्यूटिंग मार्केट तेज़ी से बढ़ रहा है, जिसके 2032 तक $68.66 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है, जो 21.80% के CAGR से बढ़ेगा। 2047 तक विदेशी क्लाउड प्रोवाइडर्स के लिए टैक्स हॉलिडे का ऐलान, ग्लोबल कैपिटल को आकर्षित करने और भारत को ग्लोबल डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का अहम हिस्सा बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
इस पॉलिसी से डेटा सेंटर कैपेसिटी बढ़ाने की ज़रूरत पूरी होगी। अनुमान है कि 2035 तक डेटा सेंटर कैपेसिटी लगभग 1.5 GW से बढ़कर 14 GW हो जाएगी, जिसके लिए $70 बिलियन से ज़्यादा के इन्वेस्टमेंट की ज़रूरत होगी। कई बड़ी टेक कंपनियों ने पहले ही भारी इन्वेस्टमेंट किया है, जो भारत की क्षमता पर उनके विश्वास को दर्शाता है। रिलेटेड-पार्टी डेटा सेंटर सर्विसेज़ के लिए सेफ हार्बर, इस कैपिटल-इंटेंसिव सेक्टर में और भी ज़्यादा स्टेबल इन्वेस्टमेंट को बढ़ावा देगा।
AI का महत्व और सेक्टर पर असर
बजट में AI पर ज़ोर देना, इसे एक महत्वपूर्ण इकोनॉमिक ड्राइवर के तौर पर स्थापित करता है। AI का जॉब्स और स्किल्स पर असर का अध्ययन करने के लिए कमिटी का गठन, टेक्नोलॉजिकल बदलावों से निपटने के लिए एक प्रैक्टिकल कदम है। IT सर्विस कंपनियों के लिए, यह ज़रूरी है कि वे अपने वर्कफोर्स को अपस्किल करें और AI-सेंट्रिक ऑफरिंग्स डेवलप करें ताकि नई मार्केट अपॉर्च्युनिटीज़ का फायदा उठा सकें।
गवर्नेंस से लेकर एग्रीकल्चर जैसे विभिन्न सेक्टर्स में AI के इंटीग्रेशन से डिजिटलाइज़ेशन को व्यापक रूप से बढ़ावा मिलेगा, जिससे IT सर्विस प्रोवाइडर्स को कंसल्टिंग, इम्प्लीमेंटेशन और मेंटेनेंस सर्विसेज़ की मांग में वृद्धि देखने को मिलेगी।
भविष्य की राह
भारत की इकोनॉमी के FY26 में 7–7.5% और FY27 में 6.8-7.2% की दर से बढ़ने का अनुमान है, जिसे डोमेस्टिक कंजम्पशन और इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड्स का सपोर्ट मिलेगा। बजट में IT सर्विसेज़ को स्ट्रीमलाइन करने और क्लाउड इन्वेस्टमेंट को आकर्षित करने पर फोकस, इन सेक्टर्स को इस ग्रोथ का लाभ उठाने के लिए तैयार करता है।
क्लाउड सर्विसेज़ के लिए लंबी अवधि का टैक्स हॉलिडे और IT एक्सपोर्टर्स के लिए बेहतर ट्रांसफर प्राइसिंग सर्टेनिटी, इन्वेस्टमेंट के लिए एक स्टेबल और अट्रैक्टिव माहौल बनाने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। 'विकसित भारत' थीम के तहत सरकार का विज़न, टेक्नोलॉजी-ड्रिवन ग्रोथ, जॉब क्रिएशन और भारत को एक ग्लोबल सर्विसेज़ और कंप्यूट हब के रूप में स्थापित करने के लिए लगातार पॉलिसी सपोर्ट का संकेत देता है।