बजट 2026: टेक पर बड़ा दांव, पर 'डिजिटल पब्लिक इंफ्रा' (DPI) को क्यों किया अनदेखा? समझें बारीकियाँ

TECH
Whalesbook Logo
AuthorNeha Patil|Published at:
बजट 2026: टेक पर बड़ा दांव, पर 'डिजिटल पब्लिक इंफ्रा' (DPI) को क्यों किया अनदेखा? समझें बारीकियाँ
Overview

साल **2026-27** के बजट में सरकार ने टेक्नोलॉजी सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए **₹12.2 लाख करोड़** के कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) का ऐलान किया है, जिसमें सेमीकंडक्टर और AI डेटा सेंटर जैसे सेक्टर शामिल हैं। हालांकि, इस बजट में 'डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर' (DPI) को वह अहमियत नहीं मिली जिसकी यह हकदार है। DPI, जो भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की नींव है, उसे नजरअंदाज करने से इसके फायदों पर पानी फिर सकता है।

Instant Stock Alerts on WhatsApp

Used by 10,000+ active investors

1

Add Stocks

Select the stocks you want to track in real time.

2

Get Alerts on WhatsApp

Receive instant updates directly to WhatsApp.

  • ✓Quarterly Results
  • ✓Concall Announcements
  • ✓New Orders & Big Deals
  • ✓Capex Announcements
  • ✓Bulk Deals
  • ✦And much more

बजट का फोकस और DPI की अनदेखी

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2026-27 के बजट में टेक्नोलॉजी को ग्रोथ का इंजन बनाने पर जोर दिया है। इसके लिए ₹12.2 लाख करोड़ कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) का भारी-भरकम आवंटन किया गया है, खासकर सेमीकंडक्टर और AI डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों के लिए। लेकिन, इस चमक-दमक में 'डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर' (DPI) यानी भारत की डिजिटल क्रांति की रीढ़ को वह तवज्जो नहीं मिली। यह वही DPI है जिसने पिछले कुछ सालों में भारत की डिजिटल रफ्तार को संभाला है। चिंता की बात यह है कि इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 ने खुद DPI को 'रणनीतिक राष्ट्रीय इंफ्रास्ट्रक्चर' (Strategic National Infrastructure) का दर्जा दिया है, लेकिन बजट आवंटन में इसे कहीं भी वह अहमियत नहीं दी गई है।

DPI: असली 'वेल्थ क्रिएटर'

DPI का असर साफ दिखता है। वर्ल्ड बैंक के मुताबिक, DPI (जैसे आधार और UPI) की वजह से भारत ने सिर्फ 9 सालों में 47 साल जितनी फाइनेंशियल इंक्लूजन (Financial Inclusion) हासिल कर ली। अकेले फाइनेंशियल ईयर 2024-25 में UPI ने 186 बिलियन ट्रांजैक्शन संभाले, जिनकी कुल वैल्यू ₹261 ट्रिलियन थी। यह ग्लोबल रियल-टाइम पेमेंट्स का लगभग आधा है। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) स्कीम, जो JAM (जन धन, आधार, मोबाइल) पर टिकी है, ने लीकेज और फर्जी लाभार्थियों को रोककर अब तक करीब ₹3.5 ट्रिलियन बचाए हैं। ONDC और OCEN जैसे प्लेटफॉर्म छोटे कर्जदारों के लिए क्रेडिट लेने की लागत 30-40% तक कम कर रहे हैं। पिछले एक दशक में 'इंडिया स्टैक' (India Stack) के कोर कंपोनेंट्स पर सरकार का खर्च $2 बिलियन से भी कम रहा है, लेकिन इसने $350 बिलियन से ज्यादा की डिजिटल इकोनॉमी को जन्म दिया है। यह पब्लिक इन्वेस्टमेंट के लिए एक अविश्वसनीय मल्टीप्लायर इफेक्ट है।

दुनिया भर में DPI को मिल रही अहमियत

दुनिया भर के देश भी डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के महत्व को समझ रहे हैं। कई OECD देश अब ब्रॉडबैंड नेटवर्क और सरकारी क्लाउड जैसी डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) में गिन रहे हैं, क्योंकि इनके लंबे समय तक फायदे होते हैं। मलेशिया जैसी सरकारें तो डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए स्पेशल टैक्स छूट भी दे रही हैं। हालांकि, भारत सहित कई देश अभी भी DPI को कैपिटल एसेट की जगह ऑपरेशनल एक्सपेंस (Operational Expense) मानकर चल रहे हैं, जो इसके पूरे आर्थिक योगदान को पकड़ने में एक बड़ी बाधा है।

खंडित (Fragmented) DPI: ग्रोथ के लिए खतरा

DPI की सबसे बड़ी चुनौती इसका खंडित (Fragmented) होना है। आधार MeitY के तहत, UPI RBI/NPCI के अधीन, और अकाउंट एग्रीगेटर फाइनेंशियल रेगुलेशन के दायरे में आते हैं। यह अलग-अलग मैनेजमेंट सिस्टम एक एकीकृत 'डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर' कैपिटल हेड की कमी को दर्शाता है, जैसा कि इकोनॉमिक सर्वे में सुझाया गया था। इस बिखराव के कारण इंटरऑपरेबिलिटी (Interoperability) और सुरक्षा संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं, जो भारत को AI और क्लाउड जैसी उभरती टेक्नोलॉजीज का पूरा फायदा उठाने से रोक सकती हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस तरह के छोटे-छोटे, बिखरे हुए निवेश ऐतिहासिक रूप से देखे गए बड़े और सिंर्जेस्टिक फायदों को नहीं दे पाएंगे।

भविष्य की राह: DPI को दें रणनीतिक दर्जा

DPI को ऑपरेशनल एक्सपेंस (Operational Expense) मानना, कैपिटल इन्वेस्टमेंट (Capital Investment) की जगह, एक बड़ा जोखिम है। जहां पारंपरिक एसेट समय के साथ पुराने पड़ते हैं, DPI में 'रिटर्न टू स्केल' (Return to Scale) बढ़ता जाता है। यानी, एक अरबवीं ट्रांजैक्शन लगभग मुफ्त होती है, पर उसके आर्थिक फायदे बहुत बड़े होते हैं। इन मिशन-क्रिटिकल सिस्टम्स की रेजिलिएंस (Resilience) और साइबर सिक्योरिटी (Cybersecurity) पर कम फंडिंग, उनके गलत क्लासिफिकेशन का नतीजा है, जो एक मैक्रोइकॉनोमिक रिस्क बन सकता है। भारत को अपनी AI हब बनने की महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए, DPI को 'रणनीतिक राष्ट्रीय इंफ्रास्ट्रक्चर' के तौर पर पहचानना होगा। इसके लिए कैपिटल बजट में एक अलग 'डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर' हेड बनाना, और इसके विकास के लिए एक मीडियम-टर्म इन्वेस्टमेंट फ्रेमवर्क लाना जरूरी है। साथ ही, केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल और इंटीग्रेशन को बढ़ावा देना होगा, ताकि भारत सचमुच एक ग्लोबल डिजिटल पावरहाउस बन सके।

Get stock alerts instantly on WhatsApp

Quarterly results, bulk deals, concall updates and major announcements delivered in real time.

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.