AI टैलेंट की क्रांति: भारत ग्लोबल चार्ट में टॉप पर
भारत में AI स्किल्स का तेजी से फैलना, टैलेंट पाइपलाइन को पूरी तरह से बदल रहा है। अब पारंपरिक डिग्रियों से ज्यादा, प्रैक्टिकल स्किल्स पर फोकस किया जा रहा है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स की आसान पहुंच की वजह से AI की जानकारी रखने वाले प्रोफेशनल्स का एक नया वर्ग तैयार हो रहा है। इसी के चलते कंपनियां अपनी हायरिंग स्ट्रेटेजी बदल रही हैं और टैलेंट एक्वीजीशन के नए तरीके अपना रही हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अप्रैल 2026 तक भारत की AI हायरिंग में ग्लोबल स्तर पर सबसे ज्यादा 59.5% की सालाना ग्रोथ देखी गई है। यह तेजी सिर्फ बड़े टेक हब तक ही सीमित नहीं है, बल्कि हैदराबाद और विजयवाड़ा जैसे शहरों में भी ग्रोथ दिख रही है, जो एक डिस्ट्रिब्यूटेड टैलेंट एक्वीजीशन ट्रेंड की ओर इशारा करती है। कंपनियां अब केवल एकेडमिक क्वालिफिकेशन्स के बजाय, मजबूत प्रॉब्लम-सॉल्विंग एबिलिटीज और प्रैक्टिकल AI स्किल्स वाले कैंडीडेट्स को प्राथमिकता दे रही हैं।
AI स्किल्स का गैप और इंडस्ट्री की मांग
भारत में AI स्किल्स की कमी को दूर करने में ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म्स अहम भूमिका निभा रहे हैं। 2027 तक AI प्रोफेशनल्स की मांग 12.5 लाख से ज्यादा होने का अनुमान है, लेकिन वर्तमान टैलेंट पूल इस मांग को पूरा करने से काफी पीछे है। करीब 79% कंपनियां कुशल उम्मीदवारों की कमी के कारण खाली पदों को भरने में संघर्ष कर रही हैं। जेनरेटिव AI स्किल्स की मांग में करीब 60% की सालाना वृद्धि देखी जा रही है, जिसकी वजह कंपनियों द्वारा को-पायलट्स और चैटबॉट्स का तेजी से अपनाना है। AI लिटरेसी अब सिर्फ STEM फील्ड्स तक सीमित नहीं है, बल्कि 72% भारतीय प्रोफेशनल्स इसे मार्केटिंग, एचआर, फाइनेंस और हेल्थकेयर जैसे क्षेत्रों में भी भविष्य के लिए आवश्यक मान रहे हैं।
चुनौतियां और आगे की राह
AI स्किल्स के इस बूम के बावजूद, कुछ गंभीर चुनौतियां बनी हुई हैं। ऑनलाइन AI कोर्सेज की क्वालिटी में काफी अंतर है और सभी सर्टिफिकेशन्स को एम्प्लॉयर्स समान रूप से महत्व नहीं देते। एक बड़ी चिंता यह भी है कि कुछ रोल्स में स्किल्स का सैचुरेशन (संतृप्ति) हो सकता है, जिससे उनकी वैल्यू कम हो जाएगी। वहीं, मैन्युफैक्चरिंग में AI इंजीनियरिंग टैलेंट चार गुना बढ़ा है, फिर भी AI से जुड़े कुछ रोल्स अभी भी भरने मुश्किल हैं। इसके अलावा, कई आईटी ग्रेजुएट्स में बेसिक प्रोग्रामिंग स्किल्स की कमी है और इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स का सिर्फ एक छोटा सा हिस्सा ही इंडस्ट्री के लिए एम्प्लॉयबल है।
फिलहाल, भारत में सिर्फ 3% कंपनियों के पास AI का पूरी तरह से उपयोग करने के लिए पर्याप्त इन-हाउस टैलेंट है, जबकि 97% कंपनियां टैलेंट की कमी को एक बड़ी बाधा मानती हैं। आगे चलकर AI लिटरेसी सभी प्रोफेशनल्स के लिए एक फंडामेंटल स्किल बनने जा रही है। 15 साल से ज्यादा अनुभव वाले प्रोफेशनल्स भी अब AI कोर्सेज में 40% से ज्यादा एनरोलमेंट कर रहे हैं, जो AI के बढ़ते महत्व को दर्शाता है। अब फोकस प्रैक्टिकल एप्लीकेशन और एग्जीक्यूशन पर है, जिसमें AI एजेंट्स और प्रोडक्टिविटी टूल्स की मांग बढ़ रही है। लगातार सीखते रहना और लचीले स्किल्स रखना, भारत की AI-संचालित अर्थव्यवस्था में करियर की लंबी उड़ान के लिए महत्वपूर्ण होगा।
