AI में भारत की रफ्तार, पर सुरक्षा में कहां है चूक?
दुनिया भर में एंटरप्राइज AI/ML ट्रांजैक्शन्स (AI/ML Transactions) में भारत ने जबरदस्त छलांग लगाई है, और अब यह अमेरिका के बाद दूसरे नंबर पर पहुंच गया है। जून 2025 से दिसंबर 2025 के बीच, भारतीय कंपनियों ने AI/ML से जुड़े 8,230 करोड़ (82.3 billion) से ज्यादा ट्रांजैक्शन्स किए। यह आंकड़ा अकेले एशिया-प्रशांत (APAC) क्षेत्र के कुल AI/ML ट्रांजैक्शन्स का लगभग 50% है। भारत की इस AI क्रांति को सरकारी डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन (Digital Transformation) पहलों, AI इंफ्रास्ट्रक्चर और टैलेंट डेवलपमेंट में भारी पब्लिक और प्राइवेट निवेश, और क्लाउड-फर्स्ट आर्किटेक्चर (Cloud-first architectures) अपनाने वाले AI-सक्षम वर्कफोर्स से बल मिला है। टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग, सर्विसेज और फाइनेंस जैसे सेक्टर्स इस ग्रोथ को लीड कर रहे हैं। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि भारत का AI मार्केट 2027 तक $20-22 बिलियन तक पहुंच सकता है, जो 30% के सालाना कंपाउंडेड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) से बढ़ रहा है। NVIDIA, OpenAI, Google, Anthropic और Qualcomm जैसे बड़े टेक प्लेयर्स भारत में अपनी मौजूदगी और निवेश बढ़ा रहे हैं।
सुरक्षा पर Zscaler की गंभीर चेतावनी
इस शानदार AI प्रगति के बीच, Zscaler की 2026 AI सिक्योरिटी रिपोर्ट एक गंभीर चिंता को उजागर करती है: AI इनोवेशन की रफ्तार, इसके साथ जुड़े सुरक्षा उपायों की परिपक्वता (maturity) से कहीं आगे निकल गई है। Zscaler के शोध से पता चला है कि कई भारतीय कंपनियां अपने सक्रिय AI मॉडल्स (AI models) और एम्बेडेड फीचर्स (embedded features) का बेसिक इन्वेंटरी (inventory) तक नहीं रखती हैं, जिससे संवेदनशील डेटा के लीक होने का खतरा पैदा हो गया है। Zscaler के सीआईएसओ-इन-रेजिडेंस फॉर इंडिया, सुवब्रत सिन्हा के अनुसार, भारत में AI को अपनाने की तेज रफ्तार, कंपनियों की इसे प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने की क्षमता से आगे निकल रही है। इसका मतलब है कि AI के इस्तेमाल को समझना, डेटा फ्लो (data flows) की सावधानीपूर्वक जांच करना और जीरो ट्रस्ट (Zero Trust) अप्रोच के माध्यम से लगातार नियंत्रण लागू करना एक प्रमुख सुरक्षा प्राथमिकता है।
AI के जरिए डेटा ट्रांसफर का पैमाना बहुत बड़ा है। 2025 में अकेले वैश्विक स्तर पर 18,000 टेराबाइट (TB) से ज्यादा डेटा AI एप्लीकेशन्स में ट्रांसफर हुआ, जिसने ChatGPT और Grammarly जैसे टूल्स को कॉर्पोरेट इंटेलिजेंस के महत्वपूर्ण भंडार बना दिया है। उदाहरण के लिए, ChatGPT को 410 मिलियन से अधिक डेटा लॉस प्रिवेंशन (DLP) पॉलिसी वायलेशंस (violations) से जोड़ा गया, जिसमें सोर्स कोड और मेडिकल रिकॉर्ड जैसी संवेदनशील जानकारी को बाहर निकालने के प्रयास शामिल थे।
'एजेंटिक AI' का बढ़ता खतरा
'एजेंटिक AI' (Agentic AI) यानी ऐसे ऑटोनोमस सिस्टम जो अपने आप योजना बना सकते हैं और कार्रवाई कर सकते हैं, ने साइबर जोखिमों का एक नया आयाम खोल दिया है। Zscaler के शोधकर्ताओं ने पाया कि एडवर्सरियल कंडीशंस (adversarial conditions) के तहत टेस्टिंग के दौरान एंटरप्राइज AI सिस्टम में चौंकाने वाली वल्नरेबिलिटीज़ (vulnerabilities) सामने आईं। ऐसे सिस्टम में पहला क्रिटिकल फेलियर (critical failure) आने में औसतन सिर्फ 16 मिनट लगे, 90% सिस्टम 90 मिनट से भी कम समय में कॉम्प्रोमाइज (compromise) हो गए, और कुछ डिफेंस तो एक सेकंड जितने कम समय में ही भेद दिए गए। यह तेजी पारंपरिक सुरक्षा डिफेंसेस को बेकार साबित कर रही है। रिपोर्ट चेतावनी देती है कि एजेंटिक AI का इस्तेमाल पहले से ही साइबर क्रिमिनल्स और राष्ट्र-राज्यों (nation-state actors) द्वारा किया जा रहा है, जो साइबर हमलों को ऑटोमेट (automate) करने के लिए इसका इस्तेमाल कर रहे हैं।
Zscaler और भविष्य की सुरक्षा
Zscaler, जो क्लाउड सिक्योरिटी में अग्रणी है, का मार्केट कैप लगभग $26-35 बिलियन के बीच है। हालांकि, इसका नेगेटिव P/E रेश्यो (लगभग -640 से -850) बताता है कि निवेशक वर्तमान लाभप्रदता के बजाय भविष्य की ग्रोथ पोटेंशियल को अधिक महत्व दे रहे हैं। AI सिस्टम के कॉम्प्रोमाइज होने की तेज गति (औसतन 16 मिनट में क्रिटिकल फेलियर) इंसिडेंट रेस्पॉन्स (incident response) के समय को बहुत कम कर देती है, जो पारंपरिक सुरक्षा फ्रेमवर्क को अपर्याप्त बनाती है। इसके अलावा, AI सिस्टम स्वयं "एडवर्सरियल अटैक्स" (adversarial attacks) के प्रति संवेदनशील होते हैं, जहां डेटा को गलत या दुर्भावनापूर्ण निर्णय लेने के लिए हेरफेर किया जा सकता है। इन सब चुनौतियों को देखते हुए, AI-संचालित डिफेंस स्ट्रेटेजी (defense strategy) और इंटेलिजेंट जीरो ट्रस्ट आर्किटेक्चर (Zero Trust architectures) जैसी प्रोएक्टिव (proactive) सुरक्षा की तत्काल आवश्यकता है।
आगामी इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 (India AI Impact Summit 2026), जो 16-20 फरवरी तक चलेगी, यहां इन बढ़ते सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित होगी। ग्लोबल टेक्नोलॉजी लीडर्स AI-संचालित खतरों का मुकाबला करने के लिए ऐसे समाधानों पर चर्चा करेंगे जो मशीन स्पीड पर काम कर सकें। भारत की AI की शानदार गति कहीं एक बड़ी सुरक्षा कमजोरी न बन जाए, इसके लिए बेहतर गवर्नेंस और एडवांस्ड सिक्योरिटी सॉल्यूशंस की दरकार है।