भारत का AI पर बड़ा दांव
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार भारत को एक प्रमुख ग्लोबल डेटा हब और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के विकास में लीडर बनाने का विजन लेकर चल रही है। इस स्ट्रेटेजी का मुख्य फोकस डेटा सेंटरों पर है, जिन्हें AI इकोसिस्टम के लिए बेहद ज़रूरी माना जा रहा है। भारत को दुनिया भर में एक कॉम्पिटिटिव डेस्टिनेशन बनाने के लिए, सरकार ने बड़े टैक्स इंसेंटिव्स (Tax Incentives) का ऐलान किया है। 2047 तक के लिए, यानी 20 साल की अवधि तक, भारत में डेटा सेंटर सर्विसेस लेने वाली विदेशी कंपनियों को टैक्स में पूरी छूट दी जाएगी। इसका मकसद यह है कि चाहे कोई कंपनी अपना डेटा सेंटर बनाए या किसी भारतीय प्रोवाइडर की सर्विस ले, उसे एक जैसा टैक्स ट्रीटमेंट मिले। इस मिशन को आगे बढ़ाने के लिए 'इंडियाAI मिशन' (IndiaAI Mission) के तहत ₹10,371.92 करोड़ (लगभग $1.2 अरब डॉलर) का फंड भी रखा गया है। सरकार का मानना है कि मल्टीनेशनल कंपनियां (MNCs) भारत के 'विकसित भारत' लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभाएंगी।
बड़ी टेक कंपनियों का भारी निवेश
दुनिया की दिग्गज टेक कंपनियां भारत के तेजी से बढ़ते AI सेक्टर में ज़बरदस्त निवेश कर रही हैं। Google के CEO सुंदर पिचाई ने 'इंडिया-अमेरिका कनेक्ट इनिशिएटिव' का ऐलान किया है, जो Google के भारत में $15 अरब डॉलर के AI इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश का एक हिस्सा है। इस प्रोजेक्ट के तहत, चार कॉन्टिनेंट्स में डिजिटल कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए नए अंडरसी केबल रूट्स (Subsea Cable Routes) और विशाखापत्तनम में एक नया इंटरनेशनल सबसी गेटवे स्थापित किया जाएगा। OpenAI भी इसी साल मुंबई और बेंगलुरु में अपने दो नए ऑफिस खोलने की योजना बना रही है। अनुमान है कि 2030 तक भारत का AI बाज़ार $126 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। Microsoft ने भी देश के AI इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाने के लिए $17.5 अरब डॉलर के बड़े निवेश का वादा किया है, जो एशिया में उनका अब तक का सबसे बड़ा निवेश है।
डिजिटल संप्रभुता पर सवाल
हालांकि, भारी निवेश और सरकारी समर्थन के बावजूद, जानकारों की चिंताएं कम नहीं हुई हैं। एक बड़ी चिंता यह है कि भारत के AI सेक्टर में कुछ गिनी-चुनी विदेशी कंपनियां हावी हो सकती हैं। जबकि भारतीय स्टार्टअप्स AI के डाउनस्ट्रीम एप्लीकेशन (Downstream Applications) में अच्छा कर रहे हैं, वहीं AI डेटा लेयर और फाउंडेशनल AI मॉडल्स (Foundational AI Models) पर अभी भी कुछ ग्लोबल प्लेयर्स का ही कंट्रोल है। यह स्थिति भारत की 'डिजिटल संप्रभुता' (Digital Sovereignty) के लिए एक बड़ा खतरा पैदा कर सकती है, जिससे भविष्य में भारत की अपनी टेक्नोलॉजी को शेप देने की स्वायत्तता कम हो सकती है। इसकी तुलना में, यूरोपीय यूनियन (EU) अपने AI एक्ट और GDPR जैसे नियमों से डेटा के इस्तेमाल और AI के काम करने के तरीके को अपने मूल्यों के अनुसार कंट्रोल करने की कोशिश कर रहा है।
इंफ्रास्ट्रक्चर और फंड की कमी
भारत खुद को AI पावरहाउस के तौर पर पेश कर रहा है, लेकिन AI इंफ्रास्ट्रक्चर में अभी भी भारी निवेश की ज़रूरत है। NVIDIA के अधिकारियों ने सुझाव दिया है कि भारत को अपने सालाना AI इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश को $1.2 अरब डॉलर से लगभग दोगुना करना चाहिए, क्योंकि यह वैश्विक लीडरशिप के लिए पर्याप्त नहीं है। दुनिया भर में AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर सालाना $300 अरब डॉलर से ज़्यादा खर्च हो रहा है। देश को डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर की जटिलता, सुरक्षा दबावों और AI व डेटा प्रोफेशनल्स की कमी जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। डेटा सेंटरों के लिए ज़रूरी भारी मात्रा में ऊर्जा और पानी की खपत भी एक बड़ा पर्यावरणीय मुद्दा है।
भविष्य की राह और चुनौतियां
तेज़ डिजिटलाइजेशन और सरकारी सपोर्ट के बावजूद, भारत का AI बाज़ार, जो 2032 तक $130.63 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, अभी भी फाउंडेशनल AI के लिए विदेशी कंपनियों पर निर्भर है। इंफ्रास्ट्रक्चर और टैलेंट को बढ़ाने की चुनौती काफी बड़ी है। भारत के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वह विदेशी टेक कंपनियों के लिए सिर्फ एक 'डाउनस्ट्रीम डिप्लॉयर' बनकर रह जाता है या फिर सचमुच एक स्वतंत्र AI इकोसिस्टम विकसित कर पाता है। डेटा सेंटर बाज़ार के लिए 14.60% की CAGR (2026-32) ग्रोथ का अनुमान है, लेकिन असली चुनौती AI पर अपनी संप्रभुता बनाए रखने की है।