AI स्किल्स को टॉप पर रख रही हैं भारतीय कंपनियां
भारत में ऑर्गेनाइजेशन्स (Organizations) टैलेंट हायरिंग और डेवलपमेंट के तरीके में बड़ा फेरबदल कर रही हैं। अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में महारत रखने वाले उम्मीदवारों को सालों के अनुभव वाले लोगों से ज़्यादा महत्व दिया जा रहा है। यह एक बड़ा सिग्नल है कि AI अब सिर्फ एक एक्स्ट्रा टूल नहीं, बल्कि ऑपरेशनल स्ट्रैटेजी का अहम हिस्सा बन गया है। टीमलीज एडटेक (TeamLease Edtech) के फाउंडर और सीईओ, शांतनु रूज (Shantanu Rooj) के अनुसार, भारत के 92% नॉलेज वर्कर्स (Knowledge Workers) पहले से ही अपने रोज़मर्रा के काम में AI का इस्तेमाल कर रहे हैं। एक ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि 80% भारतीय लीडर्स (Leaders) कम अनुभव वाले, लेकिन AI स्किल्स वाले कैंडिडेट को ज़्यादा अनुभव वाले, पर AI स्किल्स के बिना वाले कैंडिडेट पर तरजीह देंगे। इस वजह से AI एक्सपर्ट्स की डिमांड बहुत तेज़ी से बढ़ रही है, और अनुमान है कि 2026 तक भारत को 10 लाख से ज़्यादा AI प्रोफेशनल्स (Professionals) की ज़रूरत होगी। सिर्फ जेनरेटिव AI (Generative AI) ही काम के 60-70% घंटों की एक्टिविटीज़ पर असर डाल सकता है।
इन इंडस्ट्रीज़ में AI का बोलबाला
यह बदलाव सबसे ज़्यादा टेक्नोलॉजी, बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और इंश्योरेंस (BFSI) और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) जैसे सेक्टर्स में दिख रहा है। BFSI सेक्टर में AI डिजिटल बदलाव ला रहा है, रिस्क मैनेजमेंट (Risk Management), फ्रॉड डिटेक्शन (Fraud Detection) और कस्टमर सर्विस को बेहतर बना रहा है। इस सेक्टर में AI एप्लीकेशन्स से अरबों की बचत होने का अनुमान है, और 2033 तक इसका मार्केट साइज़ 8 अरब डॉलर से ज़्यादा हो सकता है। भारत के GCCs AI-नेटिव हब बनते जा रहे हैं, जहां एजेंटिक AI (Agentic AI) और जेनAI (GenAI) में भारी इन्वेस्टमेंट हो रहा है। ये अब सिर्फ कॉस्ट सेविंग (Cost Saving) की जगहें नहीं, बल्कि इनोवेशन (Innovation) और डिसीजन-मेकिंग (Decision-making) के सेंटर बन रहे हैं। भारत की टॉप IT फर्म्स भी AI में भारी निवेश कर रही हैं, लाखों लोगों को AI की ट्रेनिंग दे रही हैं और नए प्लेटफॉर्म लॉन्च कर रही हैं। इससे भारत एंटरप्राइज AI एडॉप्शन (Enterprise AI Adoption) के लिए एक महत्वपूर्ण हब के तौर पर उभर रहा है, जहाँ AI डेवलपर्स (Developers) का एक बड़ा पूल मौजूद है।
AI से बदल रहे हैं रोल्स और करियर पाथ
AI के इंटीग्रेशन (Integration) से सीधे तौर पर करियर पाथ (Career Paths) और परफॉरमेंस रिव्यू (Performance Reviews) भी बदल रहे हैं। जिन रोल्स में AI का इस्तेमाल स्पीड (Speed), क्वालिटी (Quality) और डिसीजन-मेकिंग (Decision-making) को बढ़ाने के लिए हो रहा है, उनमें सैलरी (Salary) में सबसे बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। इनमें सॉफ्टवेयर डेवलपर्स (Software Developers), डेटा एनालिस्ट्स (Data Analysts), डिजिटल मार्केटर्स (Digital Marketers) और रिसर्च रोल्स (Research Roles) शामिल हैं। अगले दो से तीन सालों में, अनुमान है कि 25-40% व्हाइट-कॉलर जॉब्स (White-collar jobs) पर इसका बड़ा असर पड़ेगा, खासकर डिजिटल-फोकस्ड इंडस्ट्रीज़ में। यह बदलाव अपस्किलिंग (Upskilling) और नई भूमिकाओं के लिए तैयार होने पर ज़्यादा फोकस कर रहा है। AI-ड्रिवन प्रोडक्टिविटी (Productivity) की वजह से एम्प्लॉई नंबर्स (Employee Numbers) के आधार पर ग्रोथ धीमी हो सकती है, लेकिन AI इंटीग्रेशन और डेटा इंजीनियरिंग जैसी हाई-वैल्यू सर्विसेज (High-value services) की डिमांड बढ़ेगी। एंट्री-लेवल जॉब्स (Entry-level jobs) में एक तिहाई से ज़्यादा में अब AI स्किल्स मांगी जा रही हैं, जो कि 2025 की सर्दियों के मुकाबले लगभग तीन गुना है।
AI अपनाने की चुनौतियां
AI से प्रोडक्टिविटी (Productivity) में भारी बढ़ोतरी और नई नौकरियां मिलने की संभावना है, लेकिन इसके व्यापक एडॉप्शन (Adoption) में कुछ बड़ी चुनौतियां भी हैं। ग्लोबल अनुमान बताते हैं कि 2030 तक दुनिया भर में 30 करोड़ नौकरियां AI ऑटोमेशन (Automation) की वजह से खत्म हो सकती हैं। भारत में, कई वर्कर्स, खासकर इनफॉर्मल सेक्टर (Informal sector) में, री-ट्रेनिंग (Retraining) के सीमित अवसरों के कारण असुरक्षित हैं। एक बड़ा स्किल्स गैप (Skills gap) भी मौजूद है; AI स्किल्स की ऊंची दर के बावजूद, डिमांड को पूरा करने के लिए क्वालिफाइड प्रोफेशनल्स (Qualified professionals) की कमी है, जो मौजूदा असमानताओं को और बढ़ा सकती है। कुछ स्टडीज़ बताती हैं कि AI कुछ क्षेत्रों में जॉब ग्रोथ (Job growth) को धीमा कर सकता है। व्हाइट-कॉलर नौकरियों में हल्की ग्रोथ दिख रही है, और चिंताएं हैं कि AI रूटीन थिंकिंग टास्क (Routine thinking tasks) को रिप्लेस कर सकता है। AI की तेज़ रफ्तार से डिज़ाइन किए गए रोल पारंपरिक करियर पाथ को भी डिस्टर्ब (Disrupt) कर सकते हैं, क्योंकि रूटीन टास्क अक्सर नए कर्मचारियों के लिए ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग (On-the-job training) का जरिया होते हैं।
भविष्य स्किल्स-बेस्ड होगा
मुख्य ट्रेंड यही इशारा कर रहा है कि भविष्य में AI स्किल सिर्फ मददगार नहीं, बल्कि ज़रूरी होगी। ऑर्गेनाइजेशन्स स्किल्स-बेस्ड हायरिंग मॉडल (Hiring models) को तेज़ी से अपना रही हैं, और सख्त जॉब रोल्स (Job roles) से हटकर एडाप्टेबिलिटी (Adaptability) को बढ़ावा दे रही हैं। AI स्किल्स की डिमांड तेज़ी से बढ़ती रहने की उम्मीद है, और भारत में AI-नेटिव रोल्स के लिए AI सैलरीज (Salaries) में सालाना डबल-डिजिट ग्रोथ (Double-digit growth) का अनुमान है। जैसे-जैसे AI वर्कप्लेस (Workplace) को बदल रहा है, व्यक्तियों और कंपनियों के लिए सबसे ज़रूरी होगा कंटीन्यूअस लर्निंग (Continuous learning) और स्ट्रैटेजिक एडाप्टेशन (Strategic adaptation)। साथ ही, AI का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करने के लिए नए टेक (Tech) के साथ सेफ्टी मेज़र्स (Safeguards) को भी संतुलित करना होगा।
