AI टैलेंट में भारत का दबदबा
रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टैलेंट के मामले में दुनिया भर में अपनी एक खास जगह बना चुका है। देश के पास दुनिया का करीब 16% AI टैलेंट है। AI स्किल पेनिट्रेशन में भारत का स्कोर 2.8 है, जो अमेरिका (2.2) से भी आगे है। इतना ही नहीं, AI टैलेंट को हायर करने की सालाना दर करीब 33% है और 2016 से AI टैलेंट की संख्या में तीन गुना से ज़्यादा का इजाफा हुआ है। भारत AI से जुड़े GitHub प्रोजेक्ट्स में दुनिया में दूसरे नंबर पर है, जो वैश्विक गतिविधि का 19.9% योगदान देता है। ये सब दिखाता है कि भारत सिर्फ AI स्किल्स का सप्लायर ही नहीं, बल्कि AI डेवलपमेंट और इनोवेशन में भी एक उभरती हुई ताकत है।
आर्थिक ग्रोथ का बड़ा दांव
इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 में पेश किए गए अनुमानों के अनुसार, भारत अगले 15 सालों में ग्लोबल GDP ग्रोथ में लगभग 20% का इजाफा कर सकता है। अनुमान है कि 2035 तक AI भारत की इकोनॉमी में $500 बिलियन से लेकर $950 बिलियन तक का योगदान दे सकता है। यह तब है जब ग्लोबल AI मार्केट 2030 तक $467 बिलियन और 2033 तक $3.49 ट्रिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है। 2023 में भारत में AI में $2.84 बिलियन का निवेश हुआ, जो अमेरिका के $50.6 बिलियन से काफी कम है। लेकिन, 2026 के लिए भारतीय AI इकोसिस्टम में VC (Venture Capital) की कमिटमेंट्स $1 बिलियन से ज़्यादा होने का अनुमान है, जो निवेश में तेज़ी का संकेत देता है। भारत सरकार ने 'इंडियाएआई मिशन' के तहत अगले पांच सालों में ₹10,300 करोड़ (लगभग $1.25 बिलियन USD) का बजट भी तय किया है, ताकि घरेलू AI क्षमताएं, इंफ्रास्ट्रक्चर और फाउंडेशन मॉडल को बढ़ावा मिल सके।
डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर: AI एडॉप्शन का बूस्टर
भारत की AI यात्रा में एक खास बात है इसका एडवांस डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) और ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) जैसे सिस्टम AI को अपनाने के लिए मज़बूत नींव तैयार करते हैं। UPI ने डिजिटल पेमेंट्स में क्रांति ला दी है, वित्तीय समावेशन को बढ़ावा दिया है और 2023-24 में 100 बिलियन से ज़्यादा ट्रांजैक्शन (लगभग $2.2 ट्रिलियन के मूल्य के) हैंडल किए हैं। ONDC का लक्ष्य ई-कॉमर्स को सबके लिए सुलभ बनाना है। यह मौजूदा डिजिटल इकोसिस्टम भारत को अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए AI एडॉप्शन का एक मॉडल बनाता है। इससे एग्रीकल्चर, हेल्थकेयर, एजुकेशन, मैन्युफैक्चरिंग और फाइनेंसियल सर्विसेज़ जैसे सेक्टरों में AI को बड़े पैमाने पर लागू किया जा सकता है। चर्चा अब नौकरियों के जाने की चिंता से हटकर AI से प्रोडक्टिविटी (Productivity) कैसे बढ़ेगी, इस पर केंद्रित हो रही है।
एग्जीक्यूशन (Execution) की सबसे बड़ी चुनौती
मज़बूत टैलेंट बेस और बड़े आर्थिक अनुमानों के बावजूद, भारत की AI क्षमता को हकीकत में बदलने के लिए सबसे बड़ी ज़रूरत अनुशासित एग्जीक्यूशन (Disciplined Execution) और बड़े पैमाने पर AI को अपनाने (Large-scale Adoption) की है। रिपोर्ट खुद कहती है कि भारत का अगला ग्रोथ फेज सिर्फ AI की उपलब्धता पर नहीं, बल्कि संस्थानों और उद्योगों में अनुशासित एग्जीक्यूशन और व्यापक एडॉप्शन पर निर्भर करेगा। भले ही भारत AI स्किल पेनिट्रेशन में आगे हो, लेकिन इसे व्यापक आर्थिक प्रभाव में बदलने के लिए AI को विभिन्न सेक्टरों में प्रभावी ढंग से इंटीग्रेट करना होगा। उदाहरण के लिए, कृषि क्षेत्र, जो 46% कार्यबल को रोज़गार देता है, यील्ड (yield) की कमी और कटाई के बाद के नुकसान से जूझ रहा है। इसी तरह, हेल्थकेयर में डॉक्टरों की कमी और महंगा इलाज एक बड़ी समस्या है। इसलिए, केवल टैलेंट होना काफी नहीं है, बल्कि AI को इन जटिल सिस्टम में सफलतापूर्वक और लगातार लागू करना एक बड़ी चुनौती है।
निवेश और एग्जीक्यूशन गैप्स का डर
हालांकि भारत का AI टैलेंट विश्व स्तर पर पहचाना जाता है, लेकिन वैश्विक लीडर्स की तुलना में इसके इंटीग्रेशन (Integration) और निवेश की गति व पैमाने को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। 2023 में भारत का AI निवेश $2.84 बिलियन था, जो अमेरिका के $50.6 बिलियन से काफी कम है। इससे बड़े पैमाने पर AI डिप्लॉयमेंट के लिए फंड की कमी का संकेत मिलता है। भारत का AI रेगुलेटरी फ्रेमवर्क (Regulatory Framework) अभी भी सिद्धांत-आधारित दिशानिर्देशों पर टिका है, जो जवाबदेही और प्रवर्तन में अस्पष्टता पैदा कर सकता है और एडॉप्शन को धीमा कर सकता है। इसके अलावा, AI को भले ही नेट जॉब क्रिएटर (Job Creator) के तौर पर देखा जा रहा हो, लेकिन इस बदलाव के लिए वर्कफोर्स (Workforce) को रीस्किल (Reskill) करने की ज़रूरत होगी। AI से बड़े पैमाने पर नौकरी का नुकसान होने की संभावना कम है, लेकिन सफलता कर्मचारियों के निरंतर रीस्किलिंग पर निर्भर करेगी। अगर एडॉप्शन का तरीका बिखरा हुआ रहा या इंफ्रास्ट्रक्चर और अपस्किलिंग में पर्याप्त निवेश नहीं हुआ, तो 'AI प्रोडक्टिविटी पैराडॉक्स' (AI Productivity Paradox) पैदा हो सकता है, जहां सिस्टमैटिक एग्जीक्यूशन चुनौतियों के कारण AI के संभावित लाभ पूरी तरह से हासिल नहीं हो पाएंगे।
भविष्य का नज़रिया
इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 में भारत की रणनीतिक स्थिति यह दर्शाती है कि देश न केवल AI को अपनाना चाहता है, बल्कि विशेष रूप से उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए इसके ज़िम्मेदार और मानव-केंद्रित वैश्विक अनुप्रयोग में नेतृत्व भी करना चाहता है। भारत अपने AI टैलेंट और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को अपने विकास विज़न के अनुरूप मापने योग्य परिणामों में बदलने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है। इस पहल की सफलता को एग्जीक्यूशन की जटिलताओं को दूर करने, सभी क्षेत्रों में व्यापक एडॉप्शन को बढ़ावा देने और यह सुनिश्चित करने की क्षमता से मापा जाएगा कि AI के लाभ समान रूप से वितरित हों। ऐसा करके ही भारत एक वैश्विक AI इनोवेशन हब और समावेशी डिजिटल परिवर्तन के मॉडल के रूप में अपनी स्थिति को मज़बूत कर पाएगा।