विदेशी निवेशकों की निकासी! AI में पिछड़ना और तेल का झटका, भारतीय बाज़ार में हलचल

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
विदेशी निवेशकों की निकासी! AI में पिछड़ना और तेल का झटका, भारतीय बाज़ार में हलचल
Overview

भारतीय बाज़ारों से विदेशी निवेशकों का पैसा निकलने का सिलसिला जारी है। विशेषज्ञ इसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में भारत के पिछड़ने और ऊँचे तेल के दामों से जोड़ रहे हैं, जिससे अर्थव्यवस्था और IT सेक्टर पर दबाव बढ़ रहा है।

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AI के लिए भारत की दौड़ में पिछड़ना और निवेशकों का पलायन

इस साल भारतीय शेयर बाज़ारों से विदेशी निवेशकों का पैसा तेजी से निकल रहा है। अब तक लगभग ₹1.75 लाख करोड़ ($21 बिलियन) का निवेश बाहर जा चुका है, जिसमें अकेले अप्रैल में ₹43,967 करोड़ ($5.3 बिलियन) की निकासी हुई है। इस रुझान का मुख्य कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर यानी AI क्रांति के लिए ज़रूरी शुरुआती कंपोनेंट्स पर वैश्विक फोकस है। विदेशी निवेशकों का मानना है कि भारत इस अहम क्षेत्र में काफी पीछे छूट रहा है। जहाँ एक तरफ 2029 तक वैश्विक AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर $900 बिलियन से ज़्यादा खर्च होने की उम्मीद है, वहीं भारत की वर्तमान स्थिति को कमजोर माना जा रहा है।

इसकी एक बड़ी वजह भारत का रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) पर कम खर्च है, जो GDP का महज़ 1.2% है। यह दक्षिण कोरिया (GDP का 5% से ज़्यादा) और ताइवान (GDP का 4% से ज़्यादा) जैसे देशों की तुलना में बहुत कम है, जिन्हें AI के उभार में मुख्य खिलाड़ी माना जा रहा है। R&D में इस गैप के साथ-साथ अमेरिका में ऊंची ब्याज दरें और मज़बूत डॉलर जैसे वैश्विक आर्थिक कारक भी विदेशी निवेशकों की रुचि कम कर रहे हैं।

शेयर बाज़ार में गिरावट और वैश्विक प्रतिस्पर्धा

इस निराशाजनक बाज़ार सेंटिमेंट के चलते भारतीय शेयरों में भारी गिरावट आई है। टेक सेक्टर के प्रमुख इंडिकेटर, Nifty IT इंडेक्स, साल की शुरुआत से मार्च के मध्य तक लगभग 23% गिर चुका है, जिससे टॉप छह IT कंपनियों का बाज़ार पूंजीकरण लगभग ₹7 लाख करोड़ ($84 बिलियन) घट गया है। यह गिरावट ग्लोबल टेक सेक्टर की कमजोरी और AI के संभावित डिस्टर्प्टिव प्रभाव के बारे में बढ़ती चिंताओं को दर्शाती है। भारत का समग्र बाज़ार प्रदर्शन भी वैश्विक प्रतिद्वंद्वियों से पीछे रहा है। 2025 की शुरुआत से 2026 की शुरुआत तक, Nifty 50 ने लगभग 11% का रिटर्न दिया, जो दक्षिण कोरिया के KOSPI (+84%) और जापान के Nikkei (+30%) से काफी कम है। यह अंतर बताता है कि शेयरों के वैल्यूएशन का पुनर्मूल्यांकन हो रहा है, और भारतीय शेयर अन्य उभरते बाज़ारों की तुलना में असामान्य रूप से प्रीमियम पर कारोबार कर रहे हैं।

तेल की कीमतें बढ़ीं, भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव

बाज़ार की चिंताएं तब और बढ़ गईं जब मध्य पूर्व में चल रहे भू-राजनीतिक संघर्षों के कारण वैश्विक तेल की कीमतें तेज़ी से बढ़ीं। 2026 में ब्रेंट क्रूड के औसत दाम लगभग $86 प्रति बैरल रहने की उम्मीद है, जो चौथी तिमाही में $90 के करीब पहुँच सकता है, और कीमतें पहले ही $100 को पार कर चुकी हैं। ऊर्जा लागत में यह वृद्धि भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए बड़े जोखिम पैदा करती है। अनुमान है कि कच्चे तेल की कीमत में हर $10 प्रति बैरल की लगातार वृद्धि भारत के करंट अकाउंट डेफिसिट को GDP के 0.4% तक बढ़ा सकती है और आर्थिक विकास को 0.15% तक धीमा कर सकती है। स्टैंडर्ड चार्टर्ड के विश्लेषकों ने उच्च ऊर्जा लागत के प्रभाव को देखते हुए FY26 और FY27 के लिए GDP ग्रोथ के अनुमानों को कम कर दिया है। भारतीय रुपये पर भी दबाव है।

IT सेक्टर पर AI शिफ्ट का असर

भारत का IT सेक्टर AI द्वारा राजस्व में संभावित कमी और सामान्य आर्थिक अनिश्चितता को लेकर चिंताओं से प्रेरित होकर मंदी का सामना कर रहा है। Nifty IT इंडेक्स मार्च के अंत तक साल-दर-तारीख लगभग 25% गिर गया है। हालांकि AI टेक्नोलॉजी से पारंपरिक IT सेवाओं के राजस्व में अल्पकालिक गिरावट आ सकती है, विश्लेषकों का यह भी अनुमान है कि 2030 तक AI अपनाने से $300-400 बिलियन का एक बड़ा नया बाज़ार अवसर पैदा होगा। Tata Consultancy Services और Infosys जैसी प्रमुख IT कंपनियों का मार्केट वैल्यू ज़्यादा है और उनके मज़बूत क्लाइंट संबंध हैं, जो उन्हें अनुकूलित होने और निवेश करने में मदद कर सकते हैं।

लगातार बने रहने वाले जोखिम: R&D गैप और वैश्विक दबाव

भारतीय बाज़ारों के लिए मुख्य जोखिम R&D में इसकी संरचनात्मक कमी है, जिसके कारण विदेशी निवेशक AI विकास के लिए देश को प्रतिकूल मानते हैं। AI इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश की वैश्विक दौड़ के साथ मिलकर, यह भारत को अल्पावधि में विदेशी पूंजी के लिए कम आकर्षक बनाता है। मध्य पूर्व के तनावों से बढ़ी वर्तमान ऊर्जा संकट, करंट अकाउंट डेफिसिट को बढ़ाने, महंगाई को बढ़ाने और सरकारी वित्त पर दबाव डालने की क्षमता के कारण अतिरिक्त जोखिम पैदा करता है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.