भारत में AI का जलवा, डीपटेक फंडिंग $2.3 बिलियन पार! पर 85% स्टार्टअप्स 'एग्जीक्यूशन' में फेल?

TECH
Whalesbook Logo
AuthorSaanvi Reddy|Published at:
भारत में AI का जलवा, डीपटेक फंडिंग $2.3 बिलियन पार! पर 85% स्टार्टअप्स 'एग्जीक्यूशन' में फेल?
Overview

भारत के डीपटेक सेक्टर में AI की वजह से साल 2025 में फंडिंग **37%** बढ़कर **$2.3 बिलियन** तक पहुंच गई। मगर, एक चौंकाने वाली बात यह है कि **85%** शुरुआती (सीड) वेंचर्स सीरीज A फंडिंग तक पहुंचने में नाकाम रहे। इन्वेस्टर अब सिर्फ आइडिया से ज्यादा, proven execution पर जोर दे रहे हैं।

AI की धूम ने भारत के डीपटेक सेक्टर में इन्वेस्टमेंट की बारिश कर दी, फंडिंग 37% बढ़कर $2.3 बिलियन तक पहुंच गई। लेकिन इस चमक-दमक के पीछे एक बड़ी सच्चाई छिपी है: 85% से ज्यादा शुरुआती स्टार्टअप्स सीरीज A राउंड तक पहुंचने में फेल हो रहे हैं। यह दिखाता है कि सिर्फ इनोवेशन काफी नहीं, एग्जीक्यूशन (Execution) की असली परीक्षा में ज्यादातर फेल हो रहे हैं।

AI कैपिटल का बूम

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) भारत के टेक स्टार्टअप्स की जान बन गया है। साल 2025 में डीपटेक स्टार्टअप्स का 84% और इस सेक्टर की 91% फंडिंग AI से जुड़ी थी। AI की वजह से कुल डीपटेक फंडिंग $2.3 बिलियन पर पहुंच गई, जो ओवरऑल टेक स्टार्टअप ग्रोथ 23% (कुल $9.1 बिलियन) से काफी ज्यादा है। यह दिखाता है कि दुनिया भारत की AI काबिलियत पर भरोसा कर रही है, खासकर एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर, साइबर सिक्योरिटी और इंडस्ट्रियल सिस्टम्स में। हालांकि, ग्लोबल लेवल पर भारत का AI फंडिंग में हिस्सा सिर्फ 0.6% से 1.34% के बीच है, जबकि दुनिया भर में $225.8 बिलियन का इन्वेस्टमेंट हुआ। भारत के टोटल VC फंडिंग में AI का हिस्सा 5% से बढ़कर 12.3% हो गया है, लेकिन यह ज्यादातर एप्लीकेशन-बेस्ड है, न कि अमेरिका की तरह फाउंडेशनल मॉडल डेवलपमेंट।

एग्जीक्यूशन की खाई

AI भले ही कैपिटल को खींच रहा हो, पर हकीकत यह है कि 5 साल में सिर्फ 26% डीपटेक स्टार्टअप्स ही सीड से सीरीज A तक पहुंच पाते हैं, और 85% तो इस पार भी नहीं कर पाते। यह 'वैली ऑफ डेथ' (Valley of Death) डीपटेक वेंचर्स के लिए एक बड़ी रुकावट है, जिन्हें रिसर्च, डेवलपमेंट और कमर्शियलाइजेशन में लंबा समय लगता है। इन्वेस्टर अब ज्यादा सेलेक्टिव हो गए हैं। वे 'ज्यादा से ज्यादा' स्टार्टअप्स को फंड करने की बजाय 'एग्जीक्यूशन से मजबूती' (execution-led maturity) पर ध्यान दे रहे हैं। यानी, अब ऐसे स्टार्टअप्स को पैसा मिल रहा है जो स्केल करने लायक हों और कमर्शियलाइजेशन के लिए तैयार हों। इसका मतलब है कि शुरुआती स्टेज के स्टार्टअप्स, भले ही उनके पास बढ़िया AI टेक्नोलॉजी हो, उन्हें रेवेन्यू क्वालिटी, गवर्नेंस और प्रॉफिटेबिलिटी तक पहुंचने के समय पर कड़ी जांच से गुजरना पड़ रहा है। डीपटेक की कॉम्प्लेक्सिटी, लंबा R&D और एंटरप्राइज या सरकारी खरीदारों को मनाने में लगने वाला वक्त, इन स्केलिंग की मुश्किलों को और बढ़ा देता है।

वैल्यूएशन पर चिंताएं और इन्वेस्टर सेलेक्टिविटी

इस डिसिप्लिन्ड ग्रोथ फेज में वैल्यूएशन पर भी बारीकी से नजर रखी जा रही है। ग्लोबल मार्केट्स में AI स्टॉक वैल्यूएशन को लेकर सावधानी बरती जा रही है, जिससे बबल (Bubble) की आशंका बढ़ गई है। इसका असर यह हुआ कि 2025 में $8.5 बिलियन का रिकॉर्ड आउटफ्लो (Outflow) फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर (FII) की ओर से भारतीय IT स्टॉक्स से हुआ। भारत का मार्केट सीधे AI प्ले में कम केंद्रित है, लेकिन ग्लोबल प्रॉफिट-टेकिंग और वैल्यूएशन की थकान का असर AI से जुड़ी कंपनियों पर भी पड़ रहा है। इन्वेस्टर अब बड़ी रकम कुछ चुनिंदा, हाई-क्वालिटी अवसरों पर लगा रहे हैं। वे ऐसे वेंचर्स को पसंद कर रहे हैं जिनका प्रोडक्ट-मार्केट फिट (Product-market fit) साबित हो चुका हो और यूनिट इकोनॉमिक्स (Unit economics) मजबूत हों। यह पुराने फंडिंग फ्रेनज़ी (Frenzy) से बिल्कुल अलग है।

सेक्टर की बारीकियां और भविष्य का आउटलुक

AI के अलावा, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, स्पेस टेक्नोलॉजी, रोबोटिक्स और क्लाइमेट टेक जैसे डीपटेक सेक्टर्स में भी तेजी दिख रही है। इन्हें सरकारी पहलों और उन सेक्टर्स में बढ़ते इन्वेस्टर इंटरेस्ट का फायदा मिल रहा है जहां भारत की मजबूत पकड़ है। इकोसिस्टम में M&A ( मर्जर एंड एक्विजिशन) एक्टिविटी और IPOs की संख्या भी बढ़ रही है, जो एग्जिट के मौके मिलने का संकेत है। हालांकि, भारत के डीपटेक सेक्टर, खासकर AI-बेस्ड स्टार्टअप्स के लिए सबसे बड़ी चुनौती यही है कि वे अपने प्रोटोटाइप को काम करने वाले ग्राहकों और स्केलेबल रेवेन्यू में कैसे बदलें। भारत में टैलेंट, सपोर्टिव पॉलिसीज और बड़ा डोमेस्टिक मार्केट है, लेकिन इनोवेशन और सस्टेंड कमर्शियल सक्सेस के बीच की खाई को पाटना ही भविष्य के ग्रोथ का असली रास्ता खोलेगा।

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.