AI से प्रोडक्टिविटी में बूस्ट
Boston Consulting Group (BCG) की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के लिए नियर-टर्म आउटलुक काफी मजबूत है। कंपनी को उम्मीद है कि AI से प्रोडक्टिविटी और क्वालिटी में काफी सुधार होगा, और नौकरियों की जगह लेने के बजाय जॉब रोल्स को नए सिरे से डिजाइन करने की जरूरत पड़ेगी। BCGX का अनुमान है कि भारत का AI टैलेंट पूल, जो पहले से ही ग्लोबल स्तर का 13% है, 2027 तक 6 लाख से बढ़कर 12.5 लाख से भी ज्यादा हो सकता है। देश में AI स्किल्स का पेनिट्रेशन (प्रसार) भी जबरदस्त है, जो G20 और OECD देशों में सबसे अव्वल है। इसका मतलब है कि यहां का वर्कफोर्स AI टूल्स का भरपूर इस्तेमाल कर रहा है। एग्जीक्यूटिव्स का भरोसा भी कम नहीं है; 88% भारतीय लीडर्स AI से पॉजिटिव ROI (रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट) की उम्मीद कर रहे हैं, जो ग्लोबल औसत से ज्यादा है। अनुमान है कि 2035 तक AI भारत की इकोनॉमी में 500 अरब डॉलर से लेकर 1.7 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा का योगदान दे सकता है। आईटी सर्विसेज, फाइनेंस, एग्रीकल्चर और हेल्थकेयर जैसे सेक्टर्स में इसका खास असर देखने को मिलेगा। उदाहरण के लिए, फाइनेंस सेक्टर में 90% संस्थान इनोवेशन, कस्टमर एक्सपीरियंस और सिक्योरिटी को बेहतर बनाने के लिए AI/GenAI को प्राथमिकता दे रहे हैं।
इनोवेशन का विरोधाभास: पेटेंट बनाम क्षमता
इस उम्मीद भरे माहौल और बढ़ते टैलेंट पूल के बावजूद, भारत की असली AI सॉवरेन्टी (संप्रभुता) को एक गंभीर कमजोरी घेर रही है। 2024 में भारत ने लगभग 26,000 AI पेटेंट एप्लिकेशन फाइल किए, जिससे वह ग्लोबल टॉप फाइलर्स में शामिल हो गया। लेकिन, इसका पेटेंट ग्रांट रेट (अनुमोदन दर) सिर्फ 0.37% है। यह दर अमेरिका और चीन से भी काफी कम है, और शैक्षणिक संस्थानों का हाल तो और भी बुरा है, जहां फाइलिंग-टू-ग्रांट रेशियो सिर्फ 1% है। यह बड़ा अंतर दिखाता है कि देश को रिसर्च को सुरक्षित इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) में बदलने में मुश्किल हो रही है, जो 'सोवरन बाय डिजाइन' क्षमताएं बनाने के लिए बहुत जरूरी है। भारत AI पेटेंट फाइलिंग में दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा देश है, लेकिन कम ग्रांट रेट एक चिंता का विषय है। यह स्थिति हमें विदेशी IP और टेक्नोलॉजी पर निर्भर बना सकती है, भले ही हम डोमेस्टिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित कर रहे हों। डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट (DPDP Act) डेटा गवर्नेंस के लिए नियम बना रहा है, लेकिन पब्लिकली उपलब्ध डेटा के संबंध में इसका दायरा ग्लोबल AI मॉडल की ट्रेनिंग के लिए चुनौतियां खड़ी कर सकता है।
वर्कफोर्स में स्किल्स की कमी
AI से प्रोडक्टिविटी बढ़ने की उम्मीदें वर्कफोर्स में स्किल्स की एक बड़ी कमी के चलते थोड़ी फीकी पड़ जाती हैं। जहां भारत AI स्किल पेनिट्रेशन में आगे है, वहीं देश के वर्कफोर्स का केवल 36% ही AI में स्किल्ड है, जो ग्लोबल औसत 44% से काफी पीछे है। AI को बड़े पैमाने पर अपनाने के लिए यह अंतर एक अहम फैक्टर है, खासकर माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSMEs) के लिए, जहां AI को अपनाने की दर अभी केवल 15% है। MSMEs के सामने हाई कॉस्ट और स्किल्स की कमी जैसी बाधाएं हैं। भले ही MSME AI Lab जैसे पहलें इस गैप को भरने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन बड़े पैमाने पर अपस्किलिंग और ट्रांजिशन पाथवेज़ AI को प्रोडक्टिविटी गेन में बदलने और असमानता बढ़ाने से रोकने के लिए महत्वपूर्ण हैं। भारतीय CEOs AI के भविष्य को लेकर बहुत आत्मविश्वासी हैं, लेकिन AI से जुड़े फैसले ज्यादातर टेक-लीड हैं, बिजनेस-लीड नहीं। केवल 55% CEOs डायरेक्ट ओनरशिप ले रहे हैं, जबकि ग्लोबल एवरेज 72% है।
आगे की राह में चुनौतियाँ
भारत की 'सोवरन बाय डिजाइन' AI की राह में कई बड़ी चुनौतियाँ हैं। पेटेंट की क्वालिटी और ग्रांट रेट में स्पष्ट कमी, आवेदनों की भारी संख्या के विपरीत, रिसर्च आउटपुट को भरोसेमंद इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) में बदलने की बुनियादी चुनौती को उजागर करती है। यह IP गैप असली टेक्नोलॉजिकल स्वतंत्रता को कमजोर कर सकता है, जिससे भारत कहीं और विकसित AI टेक्नोलॉजी का उपभोक्ता बनकर रह सकता है, भले ही डोमेस्टिक इंफ्रास्ट्रक्चर बन जाए। DPDP एक्ट डेटा गवर्नेंस की दिशा में एक कदम है, लेकिन यह ग्लोबल डेटासेट पर AI मॉडल की ट्रेनिंग से जुड़ी जटिलताओं को पूरी तरह से संबोधित नहीं कर सकता, जिससे क्रॉस-बॉर्डर AI डेवलपमेंट के लिए कंप्लायंस की बाधाएं पैदा हो सकती हैं। इसके अलावा, 36% स्किल्ड वर्कफोर्स और MSMEs के सामने आने वाली बाधाओं को देखते हुए AI-संचालित जॉब ऑग्मेंटेशन के आशावादी अनुमानों को आलोचनात्मक दृष्टि से देखा जाना चाहिए। अगर व्यापक आबादी और व्यवसायों को लक्षित करने वाले आक्रामक और प्रभावी स्किलिंग प्रोग्राम नहीं चलाए गए, तो AI क्रांति डिजिटल डिवाइड को चौड़ा करने और भूमिकाओं के पुनर्निर्धारण के साथ बेरोजगारी या अल्प-रोजगार के नए पॉकेट बनाने का जोखिम रखती है।
भविष्य की राह
भारत का AI सफर महत्वाकांक्षी लक्ष्यों और उच्च आकांक्षाओं से भरा है, जिसे इंडियाएआई मिशन (IndiaAI Mission) जैसी सरकारी पहलों और डेटा सुरक्षा पर DPDP एक्ट के जरिए मजबूत किया गया है। देश की ताकत उसके विशाल टैलेंट पूल और AI निवेश के प्रति बढ़ते एग्जीक्यूटिव कमिटमेंट में है। हालांकि, पेटेंट योग्य नवाचार और आवेदन की मात्रा के बीच की खाई को पाटना, और व्यापक स्किल्स की कमी को तत्काल संबोधित करना महत्वपूर्ण होगा। AI अपनाने की सफल स्केलिंग, खासकर MSMEs और कृषि व हेल्थकेयर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में, इन संरचनात्मक चुनौतियों पर काबू पाने पर निर्भर करेगी। भविष्य का विकास इस बात पर निर्भर करेगा कि भारत ऐसे इकोसिस्टम को कैसे बढ़ावा देता है जो न केवल AI एप्लिकेशन तैयार करे, बल्कि मजबूत, वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) भी विकसित करे, जिससे AI संप्रभुता और स्थायी आर्थिक उत्थान का मार्ग प्रशस्त हो सके।
