भारतीय बाज़ार 3 हफ़्ते की ऊंचाई पर, पर AI के डर से IT शेयरों में बड़ी गिरावट!

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Author Aditi Chauhan | Published at:
भारतीय बाज़ार 3 हफ़्ते की ऊंचाई पर, पर AI के डर से IT शेयरों में बड़ी गिरावट!
Overview

भारतीय इक्विटी बेंचमार्क **4 फरवरी 2026** को तीन हफ़्ते की सबसे ऊंची क्लोजिंग पर पहुँचे। Reliance Industries और प्राइवेट बैंकों में तेज़ी के साथ बाज़ार में अच्छी चाल दिखी। वहीं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर बढ़ती चिंताओं के चलते IT सेक्टर में लगभग **5-7%** की बड़ी गिरावट आई, जिससे कंपनियों का मार्केट कैप अरबों में घट गया।

AI के डर से IT सेक्टर में भूचाल!

4 फरवरी 2026 को भारतीय बाज़ारों में मिली-जुली तस्वीर देखने को मिली। एक तरफ जहाँ Reliance Industries और प्राइवेट बैंकों जैसे हैवीवेट शेयरों के दम पर Sensex 83,818 और Nifty 25,776 के स्तर पर पहुँचे, जो पिछले तीन हफ़्ते की सबसे बड़ी क्लोजिंग थी। मिडकैप सेगमेंट में भी 377 अंकों की तेज़ी रही। लेकिन इस तेज़ी पर AI (Artificial Intelligence) के डर का ग्रहण लग गया।

AI के नए अवतार से IT कंपनियों में हड़कंप

बाज़ार में इतनी बड़ी तेज़ी के बावजूद, टेक्नोलॉजी यानी IT सेक्टर में भारी गिरावट दर्ज की गई। Nifty IT इंडेक्स में लगभग 5-7% का भारी संकूचन आया। एनालिस्ट्स का मानना है कि Startup Anthropic द्वारा लॉन्च किए गए नए AI-पावर्ड वर्कप्लेस ऑटोमेशन टूल्स ने IT सर्विस प्रोवाइडर्स और सॉफ्टवेयर कंपनियों के लिए बड़े खतरे की घंटी बजा दी है। इन टूल्स से वो काम भी ऑटोमेट हो सकते हैं जो पहले IT प्रोफेशनल्स करते थे।

Infosys और TCS जैसी बड़ी IT कंपनियों के शेयर 8% तक गिर गए। Wipro और HCL Technologies को भी भारी नुकसान हुआ। इस घटना ने 'SaaSpocalypse' (Software-as-a-Service Apocalypse) जैसी आशंकाओं को जन्म दिया, जहाँ AI-ड्रिवन कंपटीशन, मार्जिन में कमी और मौजूदा बिज़नेस मॉडल में बड़े बदलाव के डर से सॉफ्टवेयर कंपनियों के वैल्यूएशन पर सवाल उठ रहे हैं। यह गिरावट वॉल स्ट्रीट पर भी देखी गई, जहाँ Nasdaq Composite 1.43% लुढ़क गया। भारत में बाज़ार का महंगा वैल्यूएशन (Nifty P/E ratio लगभग 22.4 और फॉरवर्ड P/E 23.3) भी निवेशकों के डर को बढ़ा रहा है।

दूसरे सेक्टर्स में शानदार प्रदर्शन

IT सेक्टर के विपरीत, साइक्लिकल और फाइनेंशियल स्टॉक्स ने बाज़ार को सहारा दिया। Reliance Industries ने हालिया इंडिया-US ट्रेड डील को लेकर सकारात्मक सेंटिमेंट के चलते Sensex की तेज़ी में अहम भूमिका निभाई। प्राइवेट बैंकिंग सेक्टर ने भी बढ़त दर्ज की, जो फाइनेंशियल सिस्टम की मज़बूती को दर्शाता है।

व्यक्तिगत शेयरों की बात करें तो, Trent के शेयर तीसरी तिमाही के नतीजों से पहले 5% चढ़े। Tube Investments ने भी शानदार Q3 परफॉरमेंस रिपोर्ट के बाद 5% से ज़्यादा की छलांग लगाई। कमोडिटी कीमतों के साथ MCX (Gold-related stock) करीब 4% बढ़ा, और सरकारी पहलों के चलते NMDC 5% चढ़ गया। वहीं, Hindustan Aeronautics के शेयर एक जेट फाइटर ऑर्डर खोने की ख़बरों के कारण 6% गिर गए। PB Fintech पिछले चार सत्रों में 13% लुढ़कने के बाद दबाव में रहा।

ऐतिहासिक और मैक्रो कॉन्टेक्स्ट

हालांकि 3 फरवरी 2026 को इंडिया-US ट्रेड डील से मिले सेंटिमेंट बूस्ट और ₹5,236 करोड़ के FII इनफ्लो ने बाज़ार को कुछ राहत दी, पर ये IT सेक्टर की चिंताओं को पूरी तरह दूर नहीं कर सका। ऐतिहासिक रूप से, भारतीय IT सेक्टर ग्रोथ का इंजन रहा है, लेकिन AI में हो रही तेज़ प्रगति एक अभूतपूर्व चुनौती पेश कर रही है, जो इसके कॉम्पिटिटिव एज (competitive edge) को बदल सकती है। जनवरी 2026 की रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय बाज़ार का वैल्यूएशन पहले से ही ग्लोबल एवरेज की तुलना में ज़्यादा था। अब AI के खतरे ने जोखिम की एक नई परत जोड़ दी है, और कुछ एनालिस्ट्स का मानना है कि पिछले छह महीनों में IT सेक्टर का शानदार परफॉरमेंस री-रेटिंग (re-rating) का शिकार हो सकता है। 2025-26 के इकोनॉमिक सर्वे में भी AI से भारतीय IT सेक्टर को होने वाले खतरों को रेखांकित किया गया था, जिसमें कॉम्पिटिटिव एज बनाए रखने के लिए एडाप्टेशन (adaptation) की ज़रूरत पर ज़ोर दिया गया था।

आगे की राह

मार्केट पार्टिसिपेंट्स अब IT सेक्टर की AI-ड्रिवन बदलावों के प्रति एडाप्ट करने की क्षमता पर बारीकी से नज़र रखे हुए हैं। वे इस बात पर ध्यान देंगे कि कंपनियाँ AI में किए गए निवेश को किस तरह वैल्यू और मार्जिन में बदल पाती हैं। ट्रेड डील और AI इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए सरकारी सपोर्ट जैसे सकारात्मक मैक्रो फैक्टर्स और प्रमुख एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड सेक्टर्स पर AI के तत्काल प्रभाव के बीच बाज़ार का ओवरऑल सेंटिमेंट सतर्क बना हुआ है। आने वाली तिमाहियों में यह तय होगा कि कंपनियाँ इन चुनौतियों से कैसे निपटती हैं और AI का फायदा उठाकर ग्रोथ कैसे हासिल करती हैं, या फिर मौजूदा बिकवाली इंडस्ट्री के इकोनॉमिक मॉडल में एक बड़े बदलाव का संकेत देती है।

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