AI के डर से इंडियन आईटी स्टॉक्स की गिरी 'चाल', निवेशकों में दहशत

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
AI के डर से इंडियन आईटी स्टॉक्स की गिरी 'चाल', निवेशकों में दहशत
Overview

जनरेटिव AI के बढ़ते खतरे के कारण शुक्रवार को भारतीय आईटी सेक्टर में भारी बिकवाली देखने को मिली। निफ्टी आईटी इंडेक्स **4%** से ज़्यादा गिरा, जबकि निवेशकों को डर है कि AI पुराने प्रोजेक्ट्स को ऑटोमेट करके सालाना **2-3%** तक का रेवेन्यू कम कर सकता है। इंफोसिस (Infosys) और एलटीआईमिंडट्री (LTIMindtree) जैसी कंपनियों के मिले-जुले चौथी तिमाही के नतीजे और सतर्क आउटलुक ने इस गिरावट को और बढ़ा दिया।

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AI का खतरा और सेक्टर में बंटवारा

विश्लेषकों का मानना है कि जनरेटिव AI ट्रेडिशनल आईटी सर्विसेज को ऑटोमेट कर सकता है, जिससे पुराने प्रोजेक्ट्स से मिलने वाले रेवेन्यू में सालाना 2% से 3% की कमी आ सकती है। इसकी वजह यह है कि इन कामों के लिए कम स्टाफ की ज़रूरत पड़ेगी। इस दबाव का सीधा असर बड़ी आईटी कंपनियों की ग्रोथ पर दिख रहा है। अब इस सेक्टर को पुराने सर्विस मॉडल से हटकर AI-इंटीग्रेटेड अप्रोच की ओर बढ़ना होगा। यह एक ऐसा बदलाव लाएगा जो AI का इस्तेमाल करके नए बिजनेस और एफिशिएंसी लाने वाली कंपनियों को आगे बढ़ाएगा, जबकि पुरानी प्रक्रियाओं से जूझ रही कंपनियां पिछड़ जाएंगी। फिलहाल, मार्केट का रिएक्शन यही दिखा रहा है कि निवेशक AI को अपनाने वाली कंपनियों को ज़्यादा तरजीह दे रहे हैं।

नतीजों पर दबाव और सुस्त गाइडेंस

कंपनियों के नतीजे भी दबाव में दिखे। उदाहरण के लिए, इंफोसिस (Infosys) ने चौथी तिमाही (FY26) में उम्मीद से कम रेवेन्यू और मार्जिन दर्ज किए। कंपनी ने FY27 के लिए अपने रेवेन्यू ग्रोथ का अनुमान 1.5% से 3.5% सालाना बताया है, जो FY22 में दर्ज 19.7% की ग्रोथ से काफी कम है। वहीं, एलटीआईमिंडट्री (LTIMindtree) ने तिमाही-दर-तिमाही 1.2% की रेवेन्यू ग्रोथ (कॉन्स्टेंट करेंसी में) हासिल की, जो एक बड़े यूएस BFSI क्लाइंट से प्रभावित हुई। हालांकि, मैनेजमेंट भविष्य की गति को लेकर आश्वस्त है। इन मिले-जुले नतीजों और आगे को लेकर सतर्क बयानबाजी ने सेक्टर के सेंटीमेंट को और कमजोर कर दिया।

सेक्टर-व्यापी गिरावट और वैल्यूएशन रीसेट

इस बिकवाली में एलटीआईमिंडट्री (LTIMindtree) के शेयर करीब 6% गिरे, जबकि कोफोर्ज (Coforge), इंफोसिस (Infosys) और एमफसिस (Mphasis) 5% से ज़्यादा टूटे। टेक महिंद्रा (Tech Mahindra), टीसीएस (TCS), परसिस्टेंट सिस्टम्स (Persistent Systems), एचसीएल टेक (HCL Tech) और विप्रो (Wipro) के शेयर भी 4% तक गिरे। यह स्थिति 2025 में सेक्टर के बड़े अंडरपरफॉर्मेंस के पैटर्न को दिखाती है, जब निफ्टी आईटी इंडेक्स निफ्टी 50 की तुलना में काफी पीछे रहते हुए लगभग 12.6% गिर गया था। इससे यह संकेत मिलता है कि आईटी सेक्टर के वैल्यूएशन का एक बड़ा री-इवैल्यूएशन (पुनर्मूल्यांकन) हो रहा है, और प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) मल्टीपल पर सवाल उठ रहे हैं।

प्रतिस्पर्धी परिदृश्य और विश्लेषकों की कड़ी जांच

वैल्यूएशन मेट्रिक्स (मूल्यांकन मानक) आईटी दिग्गजों के बीच एक स्पष्ट विभाजन दिखा रहे हैं। विप्रो (Wipro) (P/E ~14.5-16.85) और इंफोसिस (Infosys) (P/E ~17-19.5) परसिस्टेंट सिस्टम्स (P/E ~40.6-50.4) और कोफोर्ज (P/E ~38.8-61.13) जैसे नामों की तुलना में काफी कम मल्टीपल पर ट्रेड कर रहे हैं। यह बताता है कि बाज़ार पूर्व कंपनियों में ज़्यादा ग्रोथ और स्थिरता देख रहा है, संभवतः उन्हें AI के ज़्यादा जोखिम वाली पीयर्स की तुलना में सुरक्षित माना जा रहा है। विश्लेषक बंटे हुए हैं, कुछ लंबी अवधि के लिए निराशावादी outlook देख रहे हैं, जबकि अन्य AI द्वारा उन कंपनियों के लिए संरचनात्मक ग्रोथ और रिकवरी को बढ़ावा देने की उम्मीद करते हैं जो अनुकूलन करती हैं। मॉर्गन स्टेनली (Morgan Stanley) निकट अवधि में स्थिरता देखता है, लेकिन FY27 में ग्रोथ में तेजी को लेकर सतर्क है।

मुख्य सेक्टर जोखिम

सेक्टर के लिए सबसे बड़ा जोखिम AI इंटीग्रेशन की गति और सफलता है। जो कंपनियां AI डिलीवरी मॉडल में प्रभावी ढंग से बदलाव नहीं कर पाएंगी, उन्हें अपने मौजूदा व्यवसायों में लगातार मार्जिन कटौती और संभावित रेवेन्यू ड्रॉप का सामना करना पड़ेगा। AI के कारण नौकरियों का विस्थापन भी हो सकता है। ग्लोबल मार्केट्स, खासकर उत्तरी अमेरिका पर सेक्टर की भारी निर्भरता इसे आर्थिक और भू-राजनीतिक जोखिमों के प्रति संवेदनशील बनाती है। हालांकि कंपनियों की बैलेंस शीट मजबूत है, लेकिन मौजूदा कमाई और गाइडेंस यह बताते हैं कि ग्रोथ दोबारा पिक-अप होने से पहले एक लंबा ट्रांज़िशन पीरियड (संक्रमण काल) होगा, जिससे AI को अपनाने में कोई भी चूक एक बड़ा जोखिम बन सकती है।

AI ट्रांज़िशन के बीच आउटलुक

यह सेक्टर एक ट्रांज़िशन फेज (संक्रमण काल) में प्रवेश कर रहा है, जहाँ ऑटोमेशन एफिशिएंसी (दक्षता) बढ़ाएगा, लेकिन नई ग्रोथ आने से पहले रेवेन्यू को भी कम करेगा। AI स्ट्रेटेजीज़ (रणनीतियों) को सफलतापूर्वक लागू करना, खासकर कोडिंग, डेवलपमेंट और टेस्टिंग में, महत्वपूर्ण है। इंफोसिस (Infosys) और एचसीएल टेक (HCL Tech) जैसी कंपनियों के लिए, जिन्होंने AI डील जीत में उम्मीदें दिखाई हैं और ऑटोमेशन पर ध्यान केंद्रित करने के लिए अपने बिजनेस मॉडल को अनुकूलित कर रहे हैं, FY27-28 तक रिकवरी इस जटिल बदलाव को नेविगेट करने पर निर्भर करेगी। हालांकि, मौजूदा मार्केट सेंटीमेंट में संदेह दिख रहा है, जो व्यापक बिकवाली और इंडस्ट्री में बदले हुए ग्रोथ अनुमानों में परिलक्षित होता है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.