ग्लोबल बूस्ट का इंडियन IT पर असर क्यों नहीं?
Accenture Plc ने अपने फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए रेवेन्यू ग्रोथ का अनुमान 4%-6% तक बढ़ा दिया है, जो कि पहले 3%-6% था। कंपनी ने इस तिमाही में रिकॉर्ड $22.1 बिलियन की बुकिंग भी दर्ज की। लेकिन, इतनी सकारात्मक ग्लोबल पिक्चर के बावजूद, भारत की दिग्गज IT कंपनियां Infosys, TCS, HCLTech और Wipro 19 मार्च, 2026 को 3%-4% की गिरावट के साथ धराशायी हो गईं। यह दिखाता है कि ग्लोबल लीडर के अच्छे आउटलुक का असर भारतीय IT शेयरों पर क्यों नहीं पड़ा।
वैल्यूएशन का जाल और स्टॉक्स की गिरावट
भारतीय IT स्टॉक्स के लिए सबसे बड़ी चिंता हाई वैल्यूएशन है। 19 मार्च, 2026 को, Nifty IT इंडेक्स का P/E लगभग 21.0 पर था, जो विश्लेषकों की मौजूदा ग्रोथ संभावनाओं को देखते हुए काफी ज्यादा है। Infosys का मार्केट कैप ₹5 ट्रिलियन से नीचे चला गया, जो दिसंबर 2020 के बाद का सबसे निचला स्तर है और इस साल अब तक 25% गिर चुका है। TCS अपने 52-वीक लो पर पहुंच गया, पिछले तीन महीनों में 24.82% नीचे। HCLTech और Wipro में भी बड़ी गिरावट आई, Wipro ₹187.75 के 52-वीक लो पर पहुंच गया। इसकी तुलना में, Accenture का P/E ratio 16-16.79 और $125 बिलियन का मार्केट कैप, एक वैल्यूएशन गैप और ग्लोबल प्लेयर में बड़े निवेशक विश्वास को दर्शाता है।
ब्रोकरेज की चिंताएं और AI का डबल एज
कई बड़े एनालिस्ट्स ने भारतीय IT सेक्टर पर सतर्क रुख बनाए रखा है। Citi ने कहा कि Nifty IT इंडेक्स FY27 की अनुमानित कमाई पर 16 गुना पर ट्रेड कर रहा है, जो बुकिंग ग्रोथ में Accenture के बावजूद चिंता का विषय है। HSBC के मुताबिक, Accenture के नतीजों ने सेक्टर के सेंटिमेंट को ज्यादा सपोर्ट नहीं दिया क्योंकि बुकिंग ग्रोथ धीमी हो रही है, और 2026 का डिमांड एनवायरनमेंट 2025 जैसा ही रहने की उम्मीद है। Nomura का मानना है कि Indian IT के लिए मजबूत ग्रोथ की वापसी समग्र आर्थिक सुधार पर निर्भर करती है। वहीं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एक दोधारी तलवार साबित हो रहा है: यह AI-संचालित प्रोजेक्ट्स के जरिए ग्रोथ के नए रास्ते खोलता है, लेकिन IT सर्विस कॉन्ट्रैक्ट्स का मूल्य कम करने का जोखिम भी पैदा करता है। HSBC का अनुमान है कि AI अगले तीन से चार सालों में कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू को 8%-10% तक कम कर सकता है, जिससे 2027 तक सालाना रेवेन्यू पर 3%-4% का असर पड़ सकता है। इसका मतलब है कि भले ही Indian IT कंपनियां ज्यादा प्रोजेक्ट्स हैंडल करें, पर हर कॉन्ट्रैक्ट का मूल्य कम हो सकता है।
भविष्य की राह: कब आएगी असली तेजी?
Indian IT कंपनियों को क्लाइंट बजट में कोई खास बढ़ोतरी की उम्मीद नहीं है, जिससे 2026 में डिस्क्रिशनरी स्पेंडिंग सीमित रहने की आशंका है। Capgemini जैसी कंपनियाँ FY26 में Accenture की भविष्यवाणी से अधिक रेवेन्यू ग्रोथ (6.5%-8.5%) की उम्मीद कर रही हैं, जो प्रतिस्पर्धी गैप को और बढ़ा सकता है, खासकर AI सर्विसेज में। TCS और Wipro के लगातार स्टॉक प्राइस ड्रॉप्स और 52-वीक लो यह दर्शाते हैं कि उन्हें मुश्किल डिमांड एनवायरनमेंट और प्रॉफिट ग्रोथ को लेकर गहरी चिंताएं हैं। हालिया फाइनेंशियल विजिबिलिटी की कमी, यहां तक कि TCS के Amadeus के साथ प्रमुख पार्टनरशिप में भी, निवेशक के विश्वास को और कम कर रही है।
हालांकि, कुछ विश्लेषकों को FY27 तक Indian IT सेक्टर में धीरे-धीरे रिकवरी की उम्मीद है। इस रिकवरी की वजह AI का मोनेटाइजेशन और आर्थिक चिंताओं का कम होना हो सकता है। Nomura का अनुमान है कि बड़े IT दिग्गज FY27 में 4.5% रेवेन्यू ग्रोथ हासिल कर सकते हैं। लेकिन, HSBC का कहना है कि IT स्टॉक्स FY27 में व्यापक बाजार के समान प्रदर्शन कर सकते हैं, और सेक्टर में अब डबल-डिजिट ग्रोथ की गारंटी नहीं है। सेक्टर का भविष्य प्रदर्शन AI का लाभ उठाने, प्रॉफिट मार्जिन के दबाव को प्रबंधित करने और ग्लोबल फर्मों व स्पेशलाइज्ड AI सर्विस प्रोवाइडर्स के साथ प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता पर निर्भर करेगा।