Indian IT Stocks: AI के डर से IT कंपनियों में भूचाल! Nifty IT 30 महीने के निचले स्तर पर, ₹3.55 लाख करोड़ स्वाहा

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AuthorMehul Desai|Published at:
Indian IT Stocks: AI के डर से IT कंपनियों में भूचाल! Nifty IT 30 महीने के निचले स्तर पर, ₹3.55 लाख करोड़ स्वाहा
Overview

ग्लोबल मार्केट से मिल रही चिंताजनक खबरों और AI के बढ़ते प्रभाव के डर के चलते भारतीय IT शेयरों में भारी गिरावट आई है। Citrini Research की एक रिपोर्ट के बाद Nifty IT Index **4.74%** लुढ़क कर **30 महीने** के निचले स्तर पर आ गया, जिससे निवेशकों को करीब **₹3.55 लाख करोड़** का भारी नुकसान हुआ है।

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IT सेक्टर पर AI का ग्रहण, क्यों गिरी कंपनियां?

अमेरिकी फर्म Citrini Research की एक रिपोर्ट ने मंगलवार को भारतीय टेक्नोलॉजी सर्विसेज सेक्टर में हड़कंप मचा दिया। इस रिपोर्ट में सिर्फ AI के कारण नौकरियों पर मंडरा रहे खतरे का ही जिक्र नहीं है, बल्कि 2027 तक चलने वाले कॉन्ट्रैक्ट कैंसिलेशन की गहरी चिंताएं भी जताई गई हैं। रिपोर्ट में भारत के एक्सटर्नल अकाउंट्स के लिए ऐतिहासिक रूप से अहम रहे 'तेजी से कम होते सर्विस सरप्लस' का भी इशारा किया गया है। इतना ही नहीं, 2028 की शुरुआत तक IMF के साथ शुरुआती चर्चाओं का भी जिक्र है। AI के तत्काल खतरों और मैक्रोइकोनॉमिक अस्थिरता की आशंकाओं के इस मेल ने बाजार में लहर पैदा कर दी।

Nifty IT Index पर बड़ी मार

Nifty IT Index में 4.74% यानी 1,497 अंकों की भारी गिरावट दर्ज की गई और यह 30,053.50 पर बंद हुआ। यह 3 अगस्त 2023 के बाद का सबसे निचला स्तर है, यानी पिछले 30 महीने का रिकॉर्ड लो। मंगलवार को आई इस बड़ी गिरावट से पहले भी इंडेक्स में तेजी से सुधार हुआ था, और यह अब बियर-मार्केट टेरिटरी में प्रवेश कर चुका है। 4 फरवरी को जब एंथ्रोपिक (Anthropic) के एडवांस्ड AI टूल्स लॉन्च हुए थे, तब से अब तक यह इंडेक्स 22% तक गिर चुका है। इस गिरावट का असर व्यापक बाजार पर भी दिखा, जहां BSE पर Sensex 1,068.74 अंक और Nifty 288.35 अंक गिरे, जिससे कुल मार्केट कैप में ₹3.55 लाख करोड़ का सफाया हो गया। टॉप 10 भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनियों ने फरवरी की शुरुआत से अब तक करीब ₹7 लाख करोड़ गंवाए हैं, जिनमें से अकेले मंगलवार को ₹1.18 लाख करोड़ साफ हो गए।

एनालिस्ट्स क्या कहते हैं?

मार्केट एनालिस्ट्स इस भारी बिकवाली को 'अनिश्चितताओं के संगम' का नतीजा बता रहे हैं। एम्बरीश बलगा के अनुसार, इसमें 'AI-आधारित जॉब लॉस का डर, टैरिफ को लेकर भ्रम और अनसुलझे भू-राजनीतिक तनाव' शामिल हैं। सिद्धार्थ खेमका (मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज) भी 'वैश्विक अनिश्चितता और AI-जनित रुकावटों को लेकर लगातार बनी चिंताओं' को बाजार की सेंटीमेंट पर भारी पड़ने वाला बता रहे हैं। हालांकि, दिन के दौरान काफी उतार-चढ़ाव देखा गया, जिसका एक कारण Nifty डेरिवेटिव्स की एक्सपायरी भी थी, लेकिन कुछ एनालिस्ट्स का मानना ​​है कि लंबी अवधि के लिए कोई नकारात्मक ट्रिगर अभी स्पष्ट नहीं दिख रहा है और 'डिप्स पर खरीदारी' की रणनीति अपनाई जानी चाहिए। फिर भी, बाजार की प्रतिक्रिया से यह साफ है कि सेक्टर के स्थापित बिजनेस मॉडलों के लिए 'अस्तित्व के खतरे' के प्रति बढ़ी हुई संवेदनशीलता है।

सेक्टर पर असर और वैल्यूएशन

IT इंडेक्स में फरवरी महीने में 21% की गिरावट आई, जो पिछले 23 साल में सबसे बड़ी मासिक गिरावट है। इस दौरान Coforge (-29.2%), Persistent Systems (-25.75%), और LTIMindtree (-25.53%) जैसे स्टॉक बुरी तरह पिट गए। TCS, Infosys और HCL Tech जैसी बड़ी IT कंपनियों की मार्केट कैप में भी बड़ी कमी आई। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने बिकवाली की, जबकि डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) ने कुछ सपोर्ट दिया। वैल्यूएशन के मोर्चे पर, TCS का P/E करीब 19.51, Infosys का 18.88 (या 19.24), HCL Technologies का 23.8 (या 22.07) और Wipro का 17.0 (या 16.71) के आसपास है। ये आंकड़े आम तौर पर ऐतिहासिक औसत से नीचे हैं और बाजार भविष्य की चुनौतियों को पहले से ही प्राइस-इन कर रहा है।

गहरी आर्थिक दरारों का विश्लेषण

Citrini रिपोर्ट में सर्विस सरप्लस के कम होने और IMF चर्चाओं का जिक्र AI के सीधे असर से परे एक महत्वपूर्ण जोखिम को उजागर करता है। यह भारत के एक्सटर्नल बैलेंस और करेंसी स्थिरता में व्यापक मैक्रोइकोनॉमिक कमजोरियों की ओर इशारा करता है। Citrini द्वारा बताए गए चार महीने में डॉलर के मुकाबले रुपये में 18% की गिरावट, इम्पोर्ट की लागत को बढ़ाती है और डॉलर-रेवेन्यू पर निर्भर IT फर्मों के मुनाफे पर दबाव डाल सकती है। Accenture (P/E ~17.6) और Cognizant (P/E ~14.3) जैसे कंपटीटर्स एक बेंचमार्क पेश कर सकते हैं, लेकिन भारतीय IT सेक्टर का वर्तमान तनाव मैक्रोइकोनॉमिक संदर्भ से और बढ़ गया है। उदाहरण के लिए, Wipro के रिटर्न एक, तीन, पांच और दस साल की अवधि में Sensex से काफी पीछे रहे हैं, जो लगातार अंडरपरफॉर्मेंस का संकेत देते हैं। HCL Technologies, मजबूत ROE और शून्य कर्ज के बावजूद, पीयर्स की तुलना में प्रीमियम वैल्यूएशन का सामना कर रहा है और इसका एक साल का रिटर्न -14.88% रहा है। रुपये में लगातार गिरावट की संभावना, साथ ही वैश्विक आर्थिक मंदी जो IT खर्च को प्रभावित कर सकती है, एक शक्तिशाली 'बेयर केस' बनाती है जहां कॉन्ट्रैक्ट कैंसिलेशन सिर्फ AI की दक्षता से नहीं, बल्कि ग्राहकों पर पड़ने वाले आर्थिक या करेंसी दबाव से प्रेरित होते हैं। इसके अलावा, भारत की सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग में गिरावट या फिस्कल दबाव में वृद्धि से सभी घरेलू कंपनियों के ऑपरेटिंग माहौल पर सीधा असर पड़ सकता है।

भविष्य की राह और एनालिस्ट्स का सेंटिमेंट

तत्काल उथल-पुथल के बावजूद, कुछ एनालिस्ट्स लंबी अवधि को लेकर सावधानी से आशावादी बने हुए हैं। मोतीलाल ओसवाल गिरावट पर खरीदारी (buy on dips) की सलाह दे रहा है, क्योंकि वे बेहतर होती अर्निंग्स और स्पष्ट रणनीतियों को देख रहे हैं। हालिया ब्रोकरेज रिपोर्टों में विभिन्न एनालिस्ट्स के सेंटिमेंट दिखते हैं। JM Financial ने TCS को 'Buy' से घटाकर 'Add' कर दिया और प्राइस टारगेट ₹2,960 कर दिया, जिसका कारण मैक्रो स्लोडाउन और AI उत्पादकता में बदलाव दोनों को बताया। वहीं, Infosys को Nirmal Bang जैसी कुछ फर्मों ने 'Buy' रेटिंग बरकरार रखी है, जिनके टारगेट प्राइस ₹1,850-1,900 के आसपास हैं, और यह उम्मीद कर रहे हैं कि Infosys नई टेक्नोलॉजी का नेट बेनिफिशियरी होगा। हालांकि, Nifty IT इंडेक्स में 22% की गिरावट और बाजार के सतर्क सेंटिमेंट को देखते हुए, भविष्य का प्रदर्शन इस बात पर निर्भर करेगा कि सेक्टर तकनीकी व्यवधानों और व्यापक आर्थिक चुनौतियों का कितनी अच्छी तरह सामना कर पाता है।

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