AI का बढ़ता दबदबा भारतीय IT कंपनियों पर भारी पड़ा
4 फरवरी 2026 को IT सेक्टर में एक बड़ी बिकवाली देखने को मिली, जिसमें Nifty IT इंडेक्स 6-7% लुढ़क गया। यह लगभग तीन साल में सबसे बड़ी एकदिनी गिरावट थी। इस बड़ी गिरावट की मुख्य वजह एंथ्रोपिक (Anthropic) जैसी AI कंपनियों द्वारा नए 'एजेंटिक AI' (Agentic AI) टूल्स का लॉन्च होना था। ये टूल्स बिना कोडिंग के जटिल बिज़नेस प्रक्रियाओं को ऑटोमेट कर सकते हैं, जिससे नौकरियों पर खतरे और IT कंपनियों के नेट प्रॉफिट (Net Profit) पर सीधा असर पड़ने की चिंताएं बढ़ गई हैं। इस गिरावट ने IT सेक्टर की मार्केट कैप से लगभग ₹1.9 से ₹2 लाख करोड़ की रकम साफ कर दी। Infosys Ltd., Tata Consultancy Services Ltd. (TCS), Wipro Ltd. और HCL Technologies Ltd. जैसी बड़ी IT कंपनियों के शेयरों (Shares) में 4% से 8% तक की गिरावट देखी गई, जबकि BPO और एनालिटिक्स से जुड़ी कंपनियों को इससे भी ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा।
रेवेन्यू मॉडल्स पर दबाव, AI से घटेंगे कर्मचारियों के मौके
AI की बढ़ती क्षमताएं, खासकर इंसानों द्वारा किए जाने वाले कामों को ऑटोमेट करने की, भारतीय IT सर्विसेज कंपनियों के स्थापित बिजनेस मॉडल के लिए बड़ा खतरा पैदा कर रही हैं। फर्स्ट ग्लोबल की चेयरपर्सन देविन मेहरा (Devina Mehra) ने पहले ही इस बात की चेतावनी दी थी कि AI से रेवेन्यू (Revenue) कम होगा और डिलीवरी इंटेंसिटी (Delivery Intensity) भी, क्योंकि प्रोजेक्ट्स के लिए कम इंजीनियर्स की जरूरत पड़ेगी। हालिया AI टूल्स इस चिंता को और बढ़ा रहे हैं। अब ये टूल्स कॉन्ट्रैक्ट रिव्यू, कंप्लायंस ट्रैकिंग और लीगल ड्राफ्टिंग जैसे मल्टी-स्टेप कामों को इंसानी दखल के साथ या बिना उसके भी तेजी और कुशलता से कर सकते हैं। इससे कंपनियों के बिलिंग घंटे (Billable Hours) और कर्मचारियों की संख्या पर आधारित कीमत तय करने के तरीके पर सीधा असर पड़ेगा। जिस प्रोजेक्ट में पहले पांच इंजीनियर्स लगते थे, अब शायद दो में ही काम हो जाए, जिससे प्रति प्रोजेक्ट रेवेन्यू और IT टैलेंट की मांग पर असर पड़ेगा। एनालिस्ट्स अब इन कंपनियों के वैल्यूएशन (Valuation) को नए सिरे से आंक रहे हैं।
वैल्यूएशन की जांच, क्या IT सेक्टर की तेजी पर लगेगा ब्रेक?
हालांकि, भारतीय IT सेक्टर ने पहले भी Y2K और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसी तकनीकों में बदलाव देखे हैं, लेकिन AI की यह लहर कहीं ज्यादा गहरी और तेज साबित हो सकती है। ऐसे में, सेक्टर का वैल्यूएशन (Valuation) अब गहन जांच के दायरे में आ गया है। फरवरी 2026 की शुरुआत में, Nifty IT इंडेक्स का P/E रेश्यो (P/E Ratio) करीब 25.8 था, जो पिछले तीन साल के औसत 27.5x के करीब है। इसका मतलब है कि वैल्यूएशन बहुत ज्यादा बढ़े नहीं हैं, लेकिन IT कंपनियों की AI से जुड़ी चिंताओं के कारण निवेशक अब इन स्टॉक्स (Stocks) पर कम मल्टीपल्स (Multiples) की उम्मीद कर रहे हैं। अगर Nifty 50 इंडेक्स का P/E करीब 22.4 के आसपास है, तो IT सेक्टर का वैल्यूएशन इसके बराबर या थोड़ा ऊपर है, लेकिन AI की तेज रफ़्तार के चलते इसमें तेजी से बदलाव आ रहा है। व्यक्तिगत कंपनियों की बात करें तो TCS का P/E करीब 22.74, Infosys का 22.6, HCL Technologies का 26.7 और Wipro का 18.45 के आसपास है।
एनालिस्ट्स की राय बदली, भविष्य की राह अनिश्चित
एंथ्रोपिक के AI टूल्स पर बाजार की प्रतिक्रिया से एनालिस्ट्स की राय में भी बदलाव के संकेत हैं। AI को ग्रोथ ड्राइवर मानने की जगह, अब इसके तत्काल डिस्ट्रक्टिव इम्पैक्ट (Disruptive Impact) को लेकर ज्यादा चिंता जताई जा रही है। कुछ एनालिस्ट्स पहले Infosys जैसी कंपनियों के लिए AI को 2026 के आउटलुक (Outlook) का हिस्सा मान रहे थे और टारगेट प्राइस ₹1,820.45 तक दे रहे थे, लेकिन हालिया बिकवाली ने निकट भविष्य की मुश्किलों को सामने ला दिया है। HCL Technologies के लिए भी कहा गया था कि यह स्थिर है, लेकिन 4 फरवरी की गिरावट ने पूरे सेक्टर की कमजोरी को उजागर कर दिया है। IT सेक्टर का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि वह अपने बिजनेस मॉडल को कितनी जल्दी अपनाता है, AI-आधारित नए रेवेन्यू के मौके कैसे बनाता है, और अपने बड़े रोजगार के आधार पर पड़ने वाले असर को कैसे संभालता है। अब ध्यान AI को सिर्फ अपनाने से हटकर, ऑटोमेशन की बढ़ती दुनिया में वैल्यू बनाने और सर्विस डिलीवरी को फिर से परिभाषित करने पर आ गया है।
