IT सेक्टर पर बिकवाली का भारी दबाव
मंगलवार को भारतीय IT कंपनियों पर बिकवाली का भारी दबाव देखा गया, जिसके चलते Nifty IT इंडेक्स करीब 3% लुढ़क गया। वैश्विक आर्थिक मंदी की चिंताएं और भू-राजनीतिक जोखिमों ने निवेशकों के सेंटीमेंट को बुरी तरह प्रभावित किया है। Infosys और Tata Consultancy Services (TCS) जैसी दिग्गज कंपनियों के शेयरों में बड़ी गिरावट आई, जिसने सेक्टर की ओवरऑल गिरावट को और बढ़ाया। पिछले 30 दिनों में Nifty IT इंडेक्स 8% से ज्यादा गिर चुका है, और कई स्टॉक्स अपने 52-week lows के करीब कारोबार कर रहे हैं। यह दिखाता है कि सेक्टर पर दबाव बढ़ रहा है। निवेशकों को चिंता है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण अमेरिका और यूरोप जैसे प्रमुख बाजारों के क्लाइंट्स टेक्नोलॉजी पर खर्च में कटौती कर सकते हैं।
वैल्यूएशन में दिख रहा अंतर
हालिया गिरावट के बावजूद, कुछ प्रमुख IT कंपनियों के लिए 12-month trailing (TTM) Price-to-Earnings (P/E) रेश्यो में एक अंतर देखा जा रहा है। Infosys का TTM P/E रेश्यो करीब 15.2-16.5 के स्तर पर है, और TCS का 16.3-17.7 के आसपास। ये लेवल इन दिग्गजों के लिए ऐतिहासिक रूप से मामूली माने जाते हैं और हालिया गिरावट के बाद आकर्षक लग रहे हैं। हालांकि, Persistent Systems जैसी मिड-कैप कंपनियों के TTM P/E रेश्यो 42.9 से 43.3 तक ऊंचे हैं। Coforge का P/E 27.9 से 35.3 के बीच है, जबकि Tech Mahindra का 26.9-29.8 के करीब है। ये अलग-अलग वैल्यूएशन निवेशकों की विभिन्न राय को दर्शाते हैं, जिसमें कुछ मिड-कैप कंपनियों ने मजबूत हालिया ग्रोथ दिखाई है लेकिन उनकी कीमतें भी ऊंची हैं। उदाहरण के लिए, Tech Mahindra को हाल ही में 'Sell' रेटिंग मिली है, क्योंकि वह परफॉर्मेंस से जूझ रही है और पीयर्स की तुलना में प्रीमियम पर ट्रेड कर रही है। इसके विपरीत, कुछ एनालिस्ट TCS को अंडरवैल्यूड मानते हैं और उन्हें 'Hold' रेटिंग दी है।
AI की उम्मीदों पर भारी पड़ रहे साइक्लिकल जोखिम
निवेशक फिलहाल AI और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन जैसे सेक्टर के लॉन्ग-टर्म ग्रोथ ड्राइवर्स के बजाय तत्काल साइक्लिकल जोखिमों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। भले ही AI इंफ्रास्ट्रक्चर से प्रेरित होकर ग्लोबल IT स्पेंडिंग में मजबूत ग्रोथ की उम्मीद है, लेकिन भारत के IT सेक्टर के लिए FY26 का ग्रोथ फोरकास्ट 6.1% (या $315 billion) ग्लोबल IT मार्केट के विस्तार से पीछे है। ऐतिहासिक रूप से, भारतीय IT स्टॉक्स अमेरिकी इकोनॉमिक स्लोडाउन के प्रति संवेदनशील रहे हैं, जिससे अतीत में रेवेन्यू में गिरावट और छंटनी हुई है। वर्तमान भू-राजनीतिक अस्थिरता और अमेरिका में H-1B वीजा लागत में संभावित वृद्धि—जो बड़े फर्मों के लिए सैकड़ों मिलियन डॉलर का अतिरिक्त खर्च जोड़ सकती है—इन जोखिमों को और बढ़ाती है। Goldman Sachs के एनालिस्ट्स का कहना है कि मांग स्थिर होती दिख रही है, लेकिन 2026 के लिए आउटलुक अनिश्चित है, और AI से उत्पादकता बढ़ने पर पारंपरिक रेवेन्यू स्ट्रीम कम हो सकती हैं। आमतौर पर IT एक्सपोर्टर्स के लिए फायदेमंद रहने वाला कमजोर भारतीय रुपया भी फिलहाल बाजार की नजरों से ओझल है, क्योंकि बाजार गिरी हुई ग्लोबल डिमांड से जूझ रहा है। Mphasis एक हेल्दी डिविडेंड (Dividend) दे रहा है, लेकिन धीमी सेल्स ग्रोथ और बढ़ते अनपेड कस्टमर डेट्स जैसी चिंताओं का सामना कर रहा है।
आगे की राह अनिश्चित, पर AI की मांग बनी रहेगी
निवेशक आगे बाजार के संकेतों के लिए कच्चे तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक घटनाओं पर नजर रख रहे हैं। ग्लोबल इकोनॉमिक जोखिमों के टेक डिमांड पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन करते हुए निवेशकों द्वारा स्टॉक में अस्थिरता जारी रहने की उम्मीद है। भले ही निकट भविष्य कठिन दिख रहा हो, AI, क्लाउड माइग्रेशन और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन सर्विसेज की लगातार मांग एक मजबूत अंडरलाइंग पॉजिटिव बनी हुई है। यह क्षेत्र वैश्विक आर्थिक उथल-पुथल के बीच इन अवसरों को लाभदायक ग्रोथ में कैसे बदलता है, यह इसके भविष्य को आकार देगा। कुछ रिपोर्टें FY26 के लिए एक शांत आउटलुक का संकेत देती हैं, और FY27 में रिकवरी की उम्मीद है। AI को अपनाना भी कुछ कंपनियों के लिए रेवेन्यू डाइवर्सिफिकेशन (Revenue Diversification) को तेज कर सकता है।
