AI का बड़ा खतरा: IT सेक्टर में मची खलबली
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव और उसके कारण सेक्टर के पारंपरिक आउटसोर्सिंग मॉडल पर मंडरा रहे खतरे ने भारतीय आईटी शेयरों में भूचाल ला दिया है। इस चिंता ने सेक्टर-स्पेसिफिक म्यूचुअल फंड्स के लिए एसआईपी (SIP) पर मिलने वाले रिटर्न को पहली बार 2020 की शुरुआत के बाद नेगेटिव ज़ोन में धकेल दिया है। जहां बाकी मार्केट निफ्टी 50 इंडेक्स पर अपने ऑल-टाइम हाई के करीब बना हुआ है, वहीं निफ्टी आईटी इंडेक्स अकेले फरवरी में करीब 21% का गोता लगा चुका है। यानी, पिछले 3 सालों में आईटी फंड्स में एसआईपी (SIP) करने वालों को औसतन -1.6% का निगेटिव रिटर्न मिला है, जबकि निफ्टी 50 टीआरआई (TRI) ने इसी अवधि में 9.1% का पॉजिटिव रिटर्न दिया है।
ब्रोकरेज की चेतावनी: वैल्यूएशन पर बड़ा खतरा
ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म जेफ़रीज़ (Jefferies) ने भारतीय आईटी कंपनियों जैसे इन्फोसिस (Infosys), टीसीएस (TCS), एचसीएल टेक (HCL Tech), एमफैसिस (Mphasis), एलटीआईमाइंडट्री (LTIMindtree) और हेक्सावेयर (Hexaware) को डाउनग्रेड कर दिया है। उनका मानना है कि AI, इन कंपनियों के बिजनेस मॉडल को गहराई से बदल सकती है। जेफ़रीज़ का अनुमान है कि AI के सबसे खराब प्रभाव के मामले में सेक्टर के वैल्यूएशन में 30% से 65% तक की और गिरावट आ सकती है। फाइनेंशियल ईयर 27 के लिए सेक्टर की रेवेन्यू ग्रोथ अनुमान 4-5% के आसपास रहने की उम्मीद है, जो कि बाजार की उम्मीदों से काफी कम है।
शेयरों का वैल्यूएशन और दबाव
इस मंदी का असर प्रमुख भारतीय आईटी शेयरों के वैल्यूएशन (Valuation) पर साफ दिख रहा है। टाटा एलेक्सी (Tata Elxsi) जहां करीब 48.4x के प्रीमियम पी/ई (P/E) पर ट्रेड कर रहा है, वहीं टाटा टेक्नोलॉजीज (Tata Technologies) का पी/ई (P/E) लगभग 45.0x है। सीई इंफो सिस्टम्स (CE Info Systems) का पी/ई (P/E) करीब 42.86x और न्यूजेन सॉफ्टवेयर (Newgen Software) का 23.5x के आसपास है। वहीं, मास्टेक (Mastek) जैसे शेयरों का पी/ई (P/E) लगभग 13.0x है। निफ्टी आईटी इंडेक्स का पी/ई (P/E) गिरकर करीब 21.74 हो गया है, जो ऐतिहासिक औसत से काफी कम है। यह गिरावट तब आई है जब ग्लोबल टेक कंपनियां AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी भरकम 650 बिलियन डॉलर खर्च कर रही हैं।
AI का 'बेयर केस' और फंड मैनेजर्स की रणनीति
IT सेक्टर के लिए 'बेयर केस' (Bear Case) का मुख्य तर्क यह है कि AI, आईटी सर्विसेज इंडस्ट्री को पूरी तरह बदल सकती है। AI कोडिंग एजेंट्स के आने से लागत कम हो रही है और पारंपरिक मैनेज्ड सर्विसेज़ (Managed Services) की मांग घट सकती है। इससे IT बिजनेस का फोकस कंसल्टिंग (Consulting) और इम्प्लीमेंटेशन की ओर शिफ्ट हो सकता है, जिससे सेक्टर में और ज़्यादा साइक्लिकलिटी (Cyclicality) आ सकती है।
इस स्थिति को देखते हुए फंड मैनेजर्स (Fund Managers) भी सतर्क हो गए हैं। कई फंड्स ने नजारा टेक्नोलॉजीज (Nazara Technologies), टाटा टेक्नोलॉजीज (Tata Technologies), ज़ैगल (Zaggle) और टाटा एलेक्सी (Tata Elxsi) जैसी कंपनियों में अपनी होल्डिंग्स को 82% तक घटा दिया है। यह दिखाता है कि बाजार में एक व्यापक जोखिम से बचने की भावना है। निवेशक इस बात से चिंतित हैं कि AI के कारण 2027 तक कॉन्ट्रैक्ट कैंसलेशन (Contract cancellations) तेज़ी से बढ़ सकते हैं, जिससे बड़ी भारतीय IT फर्मों के रेवेन्यू पर असर पड़ेगा।