AI का डर: CLSA की राय और मार्केट का रिएक्शन
CLSA की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) भारतीय IT सर्विस सेक्टर के लिए उतनी बड़ी तबाही नहीं मचाएगा जितनी आशंका जताई जा रही है। कंपनी का कहना है कि AI को मुख्य तौर पर एफिशिएंसी (Efficiency) और प्रोडक्टिविटी (Productivity) बढ़ाने के एक टूल की तरह देखा जा रहा है, न कि पारंपरिक IT सर्विसेज को पूरी तरह खत्म करने वाले फैक्टर के तौर पर।
हालांकि, ब्रोकरेज फर्म की यह उम्मीद भरी राय निवेशकों के सेंटिमेंट को खास बढ़ावा नहीं दे पाई है। मार्केट अभी भी AI के स्ट्रक्चरल (Structural) असर, भविष्य की कमाई की विजिबिलिटी (Visibility) और लगातार हो रही वैल्यूएशन डी-रेटिंग (Valuation De-rating) की चिंताओं से जूझ रहा है। CLSA ने अपनी पसंदीदा कंपनियों में मिड-कैप सेगमेंट से Coforge और Persistent Systems, जबकि लार्ज-कैप से Tech Mahindra और Infosys को रखा है। इन पसंदीदा नामों के बावजूद, CLSA ने सभी बड़ी IT कंपनियों के प्राइस टारगेट में कटौती की है।
AI अनिश्चितता और मैक्रो इकोनॉमिक दबाव में बिकवाली
ओवरऑल मार्केट का रिएक्शन बिल्कुल अलग तस्वीर दिखा रहा है। Nifty IT इंडेक्स में बड़ी गिरावट देखी गई है। अकेले फरवरी 2025 में यह 6% से ज्यादा गिरा और दिसंबर 2024 से जून 2025 के बीच इसने करीब 10% का गोता लगाया। फरवरी 2026 तक यह इंडेक्स महीने के दौरान 16% नीचे आ गया था और अपने दिसंबर 2025 के शिखर से 30% से ज्यादा गिर चुका था। इस गिरावट से लगभग ₹5 लाख करोड़ की मार्केट कैपिटलाइजेशन (Market Capitalization) खत्म हो गई।
इस बिकवाली के पीछे कई कारण हैं: ग्लोबल इकोनॉमिक स्लोडाउन (Global Economic Slowdown) जो क्लाइंट्स के बजट को प्रभावित कर रहा है, जियोपॉलिटिकल अनिश्चितताएं (Geopolitical Uncertainties), टैरिफ (Tariffs) और यह डर कि AI IT सर्विसेज बिजनेस मॉडल को गहराई से बदल सकता है, जिससे रेवेन्यू में साइक्लिकैलिटी (Cyclicality) बढ़ेगी और मार्जिन (Margins) पर दबाव आएगा।
Jefferies जैसी ब्रोकरेज फर्म ने चेतावनी दी है कि AI के कारण मैनेज्ड सर्विसेज (Managed Services) में 14-16% तक रेवेन्यू डिफ्लेशन (Revenue Deflation) हो सकता है और वर्स्ट-केस सिनेरियो (Worst-case Scenario) में वैल्यूएशन डी-रेटिंग 30-65% तक जा सकती है। इसी वजह से Infosys, TCS, और HCL Technologies जैसी बड़ी कंपनियों के लिए डाउनग्रेड (Downgrade) किए जा रहे हैं।
कॉम्पिटिटिव लैंडस्केप और वैल्यूएशन
भारतीय IT कंपनियां इस समय अलग-अलग वैल्यूएशन मल्टीपल्स (Valuation Multiples) पर ट्रेड कर रही हैं। TCS और Infosys जैसे लार्ज-कैप खिलाड़ियों के P/E रेश्यो (P/E Ratios) करीब 19-20x हैं, जबकि HCL Technologies लगभग 22-23x पर ट्रेड कर रहा है। हालांकि, मिड-कैप IT फर्म्स प्रीमियम पर हैं। Persistent Systems का P/E रेश्यो लगभग 43-53x, Coforge का 34-43x, और LTIMindtree का 27-32x है। CLSA का Coforge और Persistent Systems के लिए भरोसा, उनकी ऊंची वैल्यूएशन के बावजूद, उनके एग्जीक्यूशन (Execution) और टेक्नोलॉजी को अपनाने की क्षमता पर विश्वास दिखाता है, हालांकि टारगेट प्राइस में कटौती की गई है।
AI एडॉप्शन और सेक्टर की डिमांड
भारतीय कंपनियों में AI एडॉप्शन (AI Adoption) काफी मजबूत है, खासकर BFSI ( 68% ) और टेक ( 60-65% ) सेक्टर में। भारत जेनरेटिव AI (Generative AI) अपनाने में दुनिया में आगे है। सवाल यह है कि IT सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए यह सस्टेनेबल ग्रोथ (Sustainable Growth) और प्रॉफिटेबिलिटी (Profitability) में कैसे बदलेगा। AI से प्रोडक्टिविटी बढ़ने ( 25-50% ) और मार्जिन में सुधार ( 200-400 bps ) की उम्मीदें हैं, लेकिन टैलेंट शॉर्टेज (Talent Shortage) और इंफ्रास्ट्रक्चर रेडीनेस (Infrastructure Readiness) जैसी चिंताएं बाहरी पार्टनर पर निर्भरता बढ़ा सकती हैं। पारंपरिक मैनेज्ड सर्विसेज से हटकर कंसल्टिंग (Consulting) और इंप्लीमेंटेशन सर्विसेज (Implementation Services) की ओर झुकाव रेवेन्यू में ज्यादा साइक्लिकैलिटी ला सकता है और ऑपरेशनल एडजस्टमेंट्स (Operational Adjustments) की जरूरत पड़ सकती है।
फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए भारतीय IT सेक्टर का आउटलुक सतर्क है, जिसमें रेवेन्यू ग्रोथ (Revenue Growth) का अनुमान मामूली है। बड़ी कंपनियों को ग्लोबल इकोनॉमिक ट्रेंड्स और क्लाइंट्स की हिचकिचाहट से चुनौती मिल रही है, जबकि कुछ मिड-टियर कंपनियों में लगातार ग्रोथ की संभावना दिख रही है। इस सतर्क सेंटिमेंट को फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FII) के लगातार आउटफ्लो (Outflow) से और बढ़ावा मिल रहा है, जो 2025 के दौरान, खासकर जनवरी और फरवरी में, काफी ज्यादा रहा है। यह ग्लोबल रिस्क-ऑफ सेंटीमेंट (Risk-off Sentiment) को दर्शाता है।
