Indian IT Sector Q4: BFSI की धाक, मैन्युफैक्चरिंग और टेलीकॉम में सुस्ती, यूरोप बना नया ग्रोथ इंजन

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AuthorAditya Rao|Published at:
Indian IT Sector Q4: BFSI की धाक, मैन्युफैक्चरिंग और टेलीकॉम में सुस्ती, यूरोप बना नया ग्रोथ इंजन
Overview

इंडियन आईटी कंपनियों के लिए बीता फाइनेंशियल ईयर 2023-24 (Q4) मिला-जुला रहा। जहां BFSI, एनर्जी और लाइफ साइंस जैसे सेक्टर्स में AI मॉडर्नाइजेशन और क्लाउड की तैयारी की वजह से अच्छी ग्रोथ दिखी, वहीं मैन्युफैक्चरिंग, टेलीकॉम और रिटेल जैसे क्षेत्र आर्थिक दबाव और टैरिफ को लेकर अनिश्चितता के चलते धीमे पड़ गए। दिलचस्प बात यह है कि यूरोप, नॉर्थ अमेरिका की तुलना में कुछ क्षेत्रों में तेजी से रिकवर कर रहा है और भारतीय आईटी कंपनियों के लिए एक बड़ा ग्रोथ मार्केट बनता जा रहा है।

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सेक्टरों में मिली-जुली परफॉरमेंस

भारतीय आईटी सर्विसेज फर्मों के लिए चौथी तिमाही के नतीजे काफी मिले-जुले रहे। बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और इंश्योरेंस (BFSI), एनर्जी और लाइफ साइंस जैसे क्षेत्रों में सबसे मजबूत ग्रोथ देखने को मिली। इन सेक्टर्स ने AI मॉडर्नाइजेशन और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर की शुरुआती तैयारी का फायदा उठाया।

मैन्युफैक्चरिंग और टेलीकॉम में आई मंदी

इसके विपरीत, मैन्युफैक्चरिंग, टेलीकॉम और रिटेल जैसे क्षेत्र मंदी का सामना कर रहे हैं। इसकी मुख्य वजह व्यापक आर्थिक चुनौतियां और टैरिफ को लेकर अनिश्चितता है, जिसके चलते क्लाइंट्स गैर-जरूरी खर्चों को टाल रहे हैं। कंपनियां इन अस्थिर क्षेत्रों में निवेश करने से पहले नियमों के और स्पष्ट होने का इंतजार कर रही हैं।

यूरोप बना बड़ा ग्रोथ ड्राइवर

जहां नॉर्थ अमेरिका स्थिर बना रहा, वहीं यूरोप भारतीय आईटी फर्मों के लिए एक बड़ा ग्रोथ इंजन बनकर तेजी से उभर रहा है। यहां मांग बढ़ रही है, जिसका मुख्य कारण राष्ट्रीय AI प्रोजेक्ट्स और रेगुलेशन-ड्रिवन अपग्रेड्स हैं। यह एक महत्वपूर्ण बदलाव है, क्योंकि यूरोप कुछ क्षेत्रों में नॉर्थ अमेरिका की तुलना में स्पष्ट रिकवरी और तेज एडॉप्शन दिखा रहा है।

BFSI सेक्टर सबसे आगे

BFSI सेक्टर ग्रोथ में स्पष्ट रूप से आगे है। उदाहरण के लिए, Persistent Systems के BFSI सेगमेंट ने फाइनेंशियल ईयर 26 में 28.4% की ग्रोथ दर्ज की, जिससे यह $600 मिलियन के एनुअल रेवेन्यू रन रेट तक पहुंच गया। यह ग्रोथ अमेरिका और भारत के बड़े बैंकों के साथ हुए सौदों से आई है। फाइनेंशियल सर्विसेज फर्म, जिन्होंने 18-24 महीने पहले AI मॉडर्नाइजेशन शुरू किया था, अब केवल खर्च में कटौती से आगे बढ़कर प्रोजेक्ट्स का विस्तार कर रही हैं।

ग्लोबल जोखिम और आर्थिक अनिश्चितता

आगे चलकर, ग्लोबल राजनीतिक जोखिम एक महत्वपूर्ण चुनौती पेश कर रहे हैं। मिडिल ईस्ट में बिगड़ती स्थिति नई मुश्किलें पैदा कर सकती है। एनर्जी की बढ़ती कीमतें और सप्लाई चेन की दिक्कतें, खासकर यूरोप में, बदलते बिजनेस माहौल में और इजाफा कर रही हैं। हालांकि अमेरिकी मंदी का जोखिम अभी भी बना हुआ है, लेकिन यह फाइनेंशियल ईयर 27 के लिए अधिकांश भारतीय आईटी लीडर्स की मुख्य चिंता नहीं है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.