AI का बढ़ता साया: Infosys, TCS, Wipro के ₹2 लाख करोड़ डूबे! इन्वेस्टर ने R&D पर उठाए सवाल

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AuthorMehul Desai|Published at:
AI का बढ़ता साया: Infosys, TCS, Wipro के ₹2 लाख करोड़ डूबे! इन्वेस्टर ने R&D पर उठाए सवाल
Overview

AI ऑटोमेशन की बढ़ती ताकत के बीच भारतीय IT कंपनियों Infosys, TCS और Wipro के शेयरों में भारी गिरावट आई है। इस बिकवाली के चलते कंपनियों का मार्केट वैल्यूएशन (Market Valuation) करीब **₹2 लाख करोड़** घट गया। प्रमुख निवेशक विकास खेमानी ने इन कंपनियों पर रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) और वेंचर कैपिटल (Venture Capital) में कम निवेश का आरोप लगाते हुए, एक बड़े रणनीतिक बदलाव की वकालत की है।

AI के डर से IT सेक्टर में भूचाल, ₹2 लाख करोड़ का नुकसान

मंगलवार, 4 फरवरी 2026 को भारतीय IT सेक्टर एक बड़े झटके से गुजरा। Infosys, Tata Consultancy Services (TCS) और Wipro जैसी दिग्गज कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट आई, जिससे इन फर्मों का कुल मार्केट कैपिटलाइज़ेशन (Market Capitalization) लगभग ₹2 लाख करोड़ कम हो गया। इस बिकवाली का मुख्य कारण एंथ्रोपिक (Anthropic) के एडवांस्ड AI असिस्टेंट 'Claude Cowork' का लॉन्च था, जिसमें जटिल प्रोफेशनल कामों, खासकर लीगल और कंप्लायंस डोमेन को ऑटोमेट करने की क्षमता है। इस डेवलपमेंट ने ट्रेडिशनल IT सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए AI के बढ़ते खतरे को और बढ़ा दिया।

वैल्यूएशन पर सवाल, इनोवेशन की जरूरत

बाजार की इस प्रतिक्रिया से यह चिंता बढ़ गई है कि AI की एडवांस क्षमताएं स्थापित IT आउटसोर्सिंग फर्मों की प्राइसिंग पावर और बिजनेस मॉडल्स को कैसे प्रभावित कर सकती हैं, जो अक्सर बड़े ह्यूमन वर्कफोर्स और बिलिंग आवर्स पर निर्भर करती हैं। 4 फरवरी को Infosys के शेयर लगभग 7.2%, TCS के शेयर 6-7% और Wipro के शेयर करीब 4% गिरे। इस गिरावट ने ग्लोबल मार्केट्स को भी प्रभावित किया, जहां अमेरिकी टेक स्टॉक्स में भी नरमी देखी गई। JP Morgan जैसे कुछ एनालिस्ट्स (Analysts) का मानना है कि यह बिकवाली शायद ओवररिएक्शन (Overreaction) हो, लेकिन AI के कॉम्पिटिटिव खतरे को लेकर चिंताएं गहरी हैं। जेफरीज (Jefferies) ने पहले ही IT सेक्टर से एक्सपोजर कम करने के लिए अपने इंडिया मॉडल पोर्टफोलियो में बदलाव किया है।

R&D और वेंचर कैपिटल पर निवेशक की खरी-खोटी

सेक्टर पर बढ़ते दबाव के बीच, प्रमुख निवेशक विकास खेमानी ने Infosys के सह-संस्थापक नारायण मूर्ति सहित इंडस्ट्री के दिग्गजों को उनके पर्याप्त मुनाफे के बावजूद रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) और वेंचर कैपिटल फंडिंग को प्राथमिकता न देने के लिए सार्वजनिक रूप से चुनौती दी है। खेमानी का सुझाव है कि इनोवेशन (Innovation) को बढ़ावा देने के लिए वार्षिक मुनाफे का 2% वेंचर फंड्स में आवंटित किया जाना चाहिए। यह आलोचना ऐसे समय में आई है जब प्रमुख IT कंपनियां AI इनिशिएटिव्स (Initiatives) में सक्रिय रूप से शामिल हैं। Infosys ने पार्टनर्शिप्स (Partnerships) के जरिए अपनी AI क्षमताओं को मजबूत किया है, जिसमें $2 बिलियन का AI डील भी शामिल है। TCS अपने AI डेटा सेंटर बिजनेस 'Hypervault' को बढ़ाने के लिए $1 बिलियन का निवेश कर रही है। वहीं, Wipro ने AI एडवांस्डमेंट (Advancement) के लिए $1 बिलियन की प्रतिज्ञा की है और अपना AI360 प्रोग्राम लॉन्च किया है।

कॉम्पिटिटिव लैंडस्केप और भविष्य की राह

हालिया बाजार की अस्थिरता के बावजूद, इन IT दिग्गजों का वैल्यूएशन (Valuation) महत्वपूर्ण बना हुआ है। फरवरी 2026 की शुरुआत तक, Infosys का मार्केट कैप लगभग ₹6.2 लाख करोड़ और P/E रेशियो (P/E Ratio) करीब 22.2 था। TCS का वैल्यूएशन लगभग ₹10.85 लाख करोड़ और P/E रेशियो करीब 22.7 था। Wipro, जो लगभग 18.4 के निचले P/E पर ट्रेड कर रहा है, उसका मार्केट कैप लगभग ₹2.45 लाख करोड़ है। इंडस्ट्री का औसत P/E रेशियो लगभग 25.77 है, जो बताता है कि Wipro तुलनात्मक रूप से डिस्काउंट पर ट्रेड कर रहा है। Wipro की हालिया 'होल्ड' रेटिंग (Hold Rating) और सुस्त ग्रोथ की चिंताएं सेक्टर की व्यापक चुनौतियों को दर्शाती हैं।

आगे का रास्ता: AI की अनिवार्यता के अनुकूल ढलना

वर्तमान मार्केट माहौल भारतीय IT लीडर्स को सिर्फ सर्विस एन्हांसमेंट (Service Enhancement) से आगे बढ़कर AI और इनोवेशन के गहरे इंटीग्रेशन को अपनाने पर मजबूर कर रहा है। R&D और वेंचर फंडिंग को लेकर की गई आलोचनाएं एक रणनीतिक बहस की ओर इशारा करती हैं: क्या ये कंपनियां AI डिसरप्शन (Disruption) के खिलाफ अपने बिजनेस मॉडल्स को भविष्य के लिए सुरक्षित करने के लिए पर्याप्त निवेश कर रही हैं? हालांकि इन IT दिग्गजों के पास काफी वित्तीय मजबूती है और वे रणनीतिक AI निवेश कर रहे हैं, बाजार की चिंताजनक प्रतिक्रिया अधिक आक्रामक रूप से अत्याधुनिक तकनीकों और वेंचर क्रिएशन की ओर बढ़ने की मांग करती है, ताकि AI युग में लगातार विकास और प्रतिस्पर्धात्मक प्रासंगिकता सुनिश्चित की जा सके।

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