AI को देश के विकास का इंजन बनाने की तैयारी
फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने बताया है कि सरकार का विजन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को देश के विकास एजेंडे के केंद्र में रखना है। इसका लक्ष्य उत्पादकता (Productivity) बढ़ाना और महत्वपूर्ण सेक्टर्स में स्पेशल रोज़गार पैदा करना है। यह स्ट्रेटेजी 'युवा भारत की आकांक्षाओं' को पूरा करने के लिए नागरिकों को भविष्य के लिए तैयार स्किल्स से लैस करने और गवर्नेंस व रोज़मर्रा की ज़िंदगी में एडवांस्ड टेक्नोलॉजी को इंटीग्रेट करने पर केंद्रित है। सरकार का मानना है कि AI, भारत की GDP में 2035 तक लगभग $1.7 ट्रिलियन का योगदान दे सकती है, और 2027 तक प्रोफेशनल टैलेंट पूल 12.5 लाख से ज़्यादा हो जाएगा।
AI के ज़रिए खेती, स्वास्थ्य और शिक्षा में बड़ा बदलाव
एग्रीकल्चर सेक्टर में 'भारत-VISTAAR' प्लेटफॉर्म को लॉन्च किया जाएगा। यह AgriStack पोर्टल्स और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की प्रैक्टिसेस को AI सिस्टम के साथ मर्ज करेगा, जिससे किसानों को मल्टीलिंगुअल, डेटा-आधारित सलाह मिल सकेगी। इससे खेती की उत्पादकता बढ़ेगी और रिस्क कम होगा।
हेल्थकेयर और एक्सेसिबिलिटी के लिए, AI-संचालित असिस्टिव डिवाइस (Assistive Devices) पर रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) पर ज़ोर दिया जाएगा। आर्टिफिशियल लिंब्स मैन्युफैक्चरिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (ALIMCO) जैसी संस्थाएं AI सहित एडवांस्ड टेक्नोलॉजी को इंटीग्रेट करके प्रोडक्शन बढ़ाएंगी।
एजुकेशन सेक्टर में AI मॉड्यूल्स को स्कूल स्तर से लेकर ऊपर तक राष्ट्रीय करिकुलम में सीधे इंटीग्रेट किया जाएगा। टीचर ट्रेनिंग प्रोग्राम्स में भी AI के कंपोनेंट्स शामिल होंगे। प्रोफेशनल्स के लिए, इंजीनियर्स और टेक्नोलॉजी वर्कर्स हेतु टार्गेटेड अपस्किंलिंग (Upskilling) और री-स्किंलिंग (Reskilling) इनिशिएटिव्स की योजना है। सरकार वोकेशनल ट्रेनिंग में AI इंटीग्रेशन के पायलट प्रोजेक्ट्स के साथ ITI (इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट) प्रोग्राम्स का भी विस्तार कर रही है।
गवर्नेंस और फाइनेंस में AI का बढ़ता इस्तेमाल, IndiaAI Mission की शुरुआत
गवर्नेंस में AI का एप्लीकेशन बढ़ाया जा रहा है। इनकम टैक्स और GST जैसे फाइनेंसियल सेक्टर्स में AI और डीप टेक का इस्तेमाल फाइनेंशियल ट्रेल्स का पता लगाने और कम्प्लायंस (Compliance) को बेहतर बनाने के लिए किया जा रहा है। सरकार AI के सर्विस सेक्टर पर असर का अध्ययन करने और वर्कफोर्स स्किल्स को भविष्य की लेबर मार्केट की ज़रूरतों से मिलाने के लिए हाई-पावर्ड पैनल भी गठित कर रही है।
इस बीच, ₹10,300 करोड़ के आउटले (Outlay) के साथ इंडियाAI मिशन (IndiaAI Mission) देश के अंदर AI इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण कर रहा है, कंप्यूट एक्सेस को डेमोक्रेटाइज कर रहा है, और AI इनोवेशन, रिसर्च व रिस्पॉन्सिबल डिप्लॉयमेंट के लिए एक इकोसिस्टम को बढ़ावा दे रहा है।
भविष्य की राह: टेक्नोलॉजी के साथ मिलकर आगे बढ़ेगा भारत
फाइनेंस मिनिस्टर सीतारमण का AI इंटीग्रेशन पर ज़ोर देना, भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में ग्लोबल लीडर बनाने की एक लॉन्ग-टर्म स्ट्रेटेजी को दर्शाता है। एजुकेशन, रिसर्च और सेक्टर-स्पेसिफिक एप्लीकेशंस में AI को एम्बेड करके, सरकार का लक्ष्य एक हाई-स्किल्ड वर्कफोर्स तैयार करना, एंटरप्रेन्योरशिप को बढ़ावा देना और यह सुनिश्चित करना है कि टेक्नोलॉजिकल प्रोग्रेस से नागरिकों के लिए टेंजिबल इकोनॉमिक बेनिफिट्स मिलें। यह एक्टिव अप्रोच नई, स्पेशलाइज्ड भूमिकाओं के निर्माण पर ध्यान केंद्रित करके संभावित जॉब डिस्प्लेसमेंट को कम करने के लिए डिज़ाइन की गई है, जिससे टेक्नोलॉजी मानव क्षमता को बढ़ाए और आत्मनिर्भर व टेक्नोलॉजिकली एडवांस्ड भारत का विजन पूरा हो।