भारतीय बाज़ारों में दिखी मज़बूती
भारतीय बाज़ारों ने मंगलवार को लगातार चौथी सत्र में तेज़ी जारी रखी। Nifty 50 ने 23,000 का स्तर पार किया और 23,123.65 पर बंद हुआ, जो 0.68% की बढ़ोतरी दर्शाता है। BSE Sensex भी 0.69% चढ़कर 74,616.58 पर बंद हुआ। यह तेज़ी कच्चे तेल की कीमतों के $107-$110 प्रति बैरल के आसपास बने रहने और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच आई।
IT सेक्टर रहा तेज़ी का मुख्य सारथी
इस तेज़ी का मुख्य सहारा IT सेक्टर रहा। Nifty IT इंडेक्स में ज़बरदस्त उछाल देखा गया, जिसमें Infosys, TCS, Wipro और HCL Technologies जैसे दिग्गज शेयर टॉप परफॉर्मर्स रहे। डॉलर के मुकाबले रुपये के कमज़ोर होने का फायदा एक्सपोर्ट-फेस्ड IT कंपनियों को मिला। हाल की गिरावट के बाद हुई खरीदारी और Q4 की कमाई के सीज़न (Q4 earnings season) की पोजीशनिंग ने भी सेक्टर को सहारा दिया, हालांकि उम्मीदें ज़्यादा नहीं थीं। Infosys 2.54% की बढ़त के साथ ₹1,339.40 पर ट्रेड हुआ, जिसकी ट्रेडिंग वॉल्यूम 15.36 मिलियन शेयर्स रही। TCS 0.95% चढ़कर ₹2,450.70 पर बंद हुआ, जिसने ₹397.37 करोड़ के मूल्य का कारोबार किया। Wipro के शेयर्स 3.77% उछलकर ₹204.72 पर पहुँच गए, जो 24.77 मिलियन शेयर्स की वॉल्यूम के साथ था। HCL Technologies 3.1% चढ़कर इंट्राडे में ₹1,446 के स्तर पर पहुँचा। इन IT दिग्गजों के एवरेज P/E रेश्यो हैं: Infosys (18.92x), TCS (17.8x), Wipro (15.60x), और HCL Technologies (23.13x)। Nifty IT इंडेक्स ने 2025 में 10% से ज़्यादा की गिरावट दर्ज की थी।
मेटल स्टॉक्स में भी दिखी खरीदारी
मेटल स्टॉक्स में भी खरीदारी देखने को मिली, जिसने बाज़ार को सहारा दिया। Hindalco Industries 3.77% की बढ़त के साथ ₹955.80 पर पहुँचकर टॉप गेनर रहा। Nifty Metal इंडेक्स 1% से ज़्यादा चढ़ा, क्योंकि ग्लोबल कमोडिटी प्राइसेस में सुधार हुआ। Hindalco का इंट्राडे प्रदर्शन ₹964.75 तक गया, जो 3.38% की तेज़ी थी। कंपनी का P/E रेश्यो लगभग 12.96x है। तुलनात्मक रूप से, Tata Steel का डेट-टू-इक्विटी रेश्यो लगभग 1.04 है, जबकि JSW Steel का नेट डेट/इक्विटी रेश्यो लगभग 1.21 है, जो Hindalco के 0.37 या 0.5552 की तुलना में ज़्यादा लीवरेज दर्शाता है।
मिली-जुली सेक्टर परफॉर्मेंस और चिंताएं
IT और मेटल में तेज़ी के बावजूद, सेक्टर परफॉर्मेंस मिली-जुली रही। कल आने वाले RBI की मॉनेटरी पॉलिसी (monetary policy) के नतीजों से पहले बैंकिंग और फाइनेंशियल स्टॉक्स पर दबाव बना रहा। Nifty Bank इंडेक्स मामूली गिरावट के साथ बंद हुआ। भारतीय रुपये के डॉलर के मुकाबले 95 के स्तर को पार करने और बढ़ती तेल कीमतों ने महंगाई (inflation) की चिंताएं बढ़ा दी हैं, जो RBI के रुख को प्रभावित कर सकती हैं। जानकारों का मानना है कि RBI रेपो रेट को 5.25% पर बनाए रखेगा और ग्लोबल अस्थिरता के बीच स्थिरता को प्राथमिकता देते हुए न्यूट्रल (neutral) रुख रखेगा।
ब्रॉडर मार्केट पिछड़ा; जियोपॉलिटिकल रिस्क हावी
बड़े स्टॉक्स के मुकाबले ब्रॉडर मार्केट इंडेक्स पिछड़े रहे, मिडकैप (midcap) और स्मॉलकैप (smallcap) इंडेक्स मामूली तेज़ी या सपाट बंद हुए। यह दर्शाता है कि तेज़ी चुनिंदा बड़ी कंपनियों तक सीमित थी। अमेरिका-ईरान संघर्ष जैसे भू-राजनीतिक तनाव और तेल आपूर्ति पर इसके असर की चिंता बनी हुई है। यह महंगाई के डर को बढ़ा सकता है और करंट अकाउंट डेफिसिट (current account deficit) को बढ़ा सकता है। IT कंपनियों के लिए, कमज़ोर डॉलर फायदेमंद है, लेकिन ग्लोबल इकोनॉमिक स्लोडाउन (global economic slowdown) और खर्च में संभावित कमी का जोखिम बना हुआ है। मेटल कंपनियाँ साइक्लिकल सेंटिमेंट (cyclical sentiment) से लाभान्वित होती हैं, लेकिन कमोडिटी प्राइस वोलेटिलिटी (commodity price volatility) के प्रति संवेदनशील हैं।