स्मार्टफोन्स की बिक्री क्यों गिरी?
साल 2026 की शुरुआत में भारतीय स्मार्टफोन मार्केट में थोड़ी सुस्ती देखने को मिली। बिक्री में 9% की गिरावट आई है, जिसका मुख्य कारण मेमोरी चिप्स जैसी कंपोनेंट्स की लागत बढ़ना और स्मार्टफोन्स के एवरेज प्राइस में ₹1,500 तक का इजाफा होना है। इस वजह से कंज्यूमर खर्च करने से हिचकिचा रहे हैं। रिपब्लिक डे सेल्स के दौरान ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर थोड़ी तेजी दिखी थी, लेकिन लिमिटेड प्रमोशन्स और नए मॉडल्स की कम लॉन्चिंग के कारण यह मोमेंटम बना नहीं रह सका।
प्रीमियम सेगमेंट दे रहा सहारा
यूनिट सेल्स में भारी गिरावट के बावजूद, मार्केट की कुल वैल्यू पर ज्यादा असर नहीं पड़ा है। इसकी सबसे बड़ी वजह 'प्रीमियमाइजेशन' का ट्रेंड है, जिसमें ग्राहक अब ज्यादा कीमत वाले डिवाइसेज खरीदना पसंद कर रहे हैं। ₹30,000 से ऊपर के प्रीमियम सेगमेंट में, शुरुआती 2024 में वॉल्यूम का 20% और मार्केट वैल्यू का 51% हिस्सा रहा। यह ट्रेंड 2025 में भी जारी रहा, और 2026 की शुरुआत तक प्रीमियम सेगमेंट में वॉल्यूम 11% बढ़ा और शिपमेंट्स का 22% हिस्सा रहा।
किन ब्रांड्स का प्रदर्शन कैसा रहा?
इस मुश्किल भरे मार्केट में भी कुछ ब्रांड्स ने अच्छा प्रदर्शन किया। vivo ने नई लॉन्चिंग और अपनी पॉपुलर Y और T सीरीज की बदौलत साल 2026 की पहली नौ हफ्तों में 19% की ईयर-ऑन-ईयर ग्रोथ दर्ज की। Apple ने भी स्ट्रैटेजिक डिस्काउंट्स और iPhone 17 सीरीज की डिमांड के सपोर्ट से 12% की बढ़त हासिल की। 2025 में, India में Apple का वैल्यू शेयर रिकॉर्ड 28% तक पहुंच गया था।
आगे का अनुमान क्या है?
हालांकि, मार्केट को लेकर ओवरऑल आउटलुक सावधानी भरा है। रिसर्च डायरेक्टर तरुण पाठक का अनुमान है कि 2026 में इंडिया के स्मार्टफोन मार्केट में 10% तक की कॉन्ट्रैक्शन (गिरावट) हो सकती है। इसके पीछे ग्लोबल अनिश्चितताएं, भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ती कमोडिटी प्राइसेज हैं, जिनसे कंज्यूमर खर्च पर असर पड़ने की उम्मीद है। यह IDC के फोरकास्ट से मेल खाता है, जो मेमोरी सप्लाई चेन में गंभीर गड़बड़ी के कारण 2026 में मार्केट में बड़ी गिरावट की आशंका जता रहा है।
मेमोरी चिप्स की बढ़ती कीमतें
DRAM और NAND फ्लैश जैसे मेमोरी कंपोनेंट्स की बढ़ती कीमतें मार्केट में मौजूदा तनाव का एक बड़ा कारण हैं। 2026 की शुरुआत में इन चिप्स की कीमतें 40% तक बढ़ने का अनुमान था, जिससे मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट में 8-15% का इजाफा हो सकता है। AI डेटा सेंटर्स से बढ़ती मांग के कारण यह उछाल मैन्युफैक्चरर्स को कीमतें बढ़ाने पर मजबूर कर रहा है। मेमोरी चिप्स फोन की कुल लागत का एक बड़ा हिस्सा होते हैं, इसलिए कम कीमत वाले डिवाइसेज पर इसका ज्यादा असर पड़ता है। इसी वजह से ब्रांड्स नए मॉडल्स को ज्यादा प्राइस पॉइंट पर लॉन्च कर रहे हैं और मौजूदा डिवाइसेज की कीमतें बढ़ा रहे हैं। India में एवरेज सेलिंग प्राइस (ASP) लगातार बढ़ रहा है, जो 2025 में रिकॉर्ड $282 पर पहुंच गया था।
अफोर्डेबिलिटी का संकट
यह कॉस्ट इन्फ्लेशन एंट्री-लेवल और मास-बजट सेगमेंट को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है। एंट्री-लेवल सेगमेंट ( $100 से कम) में 14% की गिरावट आई है, जिससे इसका मार्केट शेयर घटकर 15% रह गया है, जो एक साल पहले 20% था। वहीं, प्रीमियम सेगमेंट लगातार मजबूत बना हुआ है। 2024 की पहली तिमाही तक, यह वॉल्यूम का 20% और वैल्यू का 51% था, जो अब तक का इसका सबसे बड़ा हिस्सा है। यह दिखाता है कि मार्केट में एक तरफ जहां अफोर्डेबिलिटी वाला सेगमेंट संघर्ष कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ प्रीमियम सेगमेंट बढ़ रहा है, जिसे अक्सर फाइनेंसिंग का सहारा मिल रहा है।
कॉम्पिटिटिव लैंडस्केप
2025 की शुरुआत में, vivo वॉल्यूम में सबसे आगे था, जबकि Samsung वैल्यू में। 2025 की पहली तिमाही तक, vivo का मार्केट शेयर टॉप पर बना रहा, हालांकि Xiaomi की सेल्स में 37% की भारी ईयर-ऑन-ईयर गिरावट आई। इस दौरान Apple ने लगातार मजबूत ग्रोथ दिखाई, खासकर प्रीमियम सेगमेंट में, और 2025 की पहली तिमाही में 23% की ईयर-ऑन-ईयर ग्रोथ के साथ India में रिकॉर्ड शिपमेंट हासिल किया।
आगे क्या है?
मार्केट की मौजूदा स्थिति कई भारतीय कंज्यूमर्स के लिए बढ़ती अफोर्डेबिलिटी क्राइसिस को दर्शाती है। कंपोनेंट कॉस्ट और रुपए के कमजोर होने से कीमतें बढ़ी हैं, जिससे एंट्री-लेवल और मिड-रेंज डिवाइसेज पहुंच से बाहर हो रहे हैं। 2026 की दूसरी तिमाही तक मेमोरी चिप की कीमतें 40% और बढ़ सकती हैं, जिससे मैन्युफैक्चरर्स के लिए, खासकर $200 से कम के डिवाइसेज के लिए, कीमतों को संभालना मुश्किल हो जाएगा। इससे मार्केट में कंसॉलिडेशन तेज हो सकता है, क्योंकि छोटे ब्रांड्स मुश्किल में पड़ सकते हैं।
रिफर्बिश्ड मार्केट की ओर झुकाव
सस्ते नए डिवाइसेज की डिमांड कम हो रही है। इस सेगमेंट में नए मॉडल्स में लागत कम करने के लिए फीचर्स घटाए जा सकते हैं, ऐसे में कंज्यूमर्स रिफर्बिश्ड या सेकंड-हैंड फोन की ओर रुख कर सकते हैं या अपने मौजूदा फोन की लाइफ बढ़ा सकते हैं। India का यूज स्मार्टफोन मार्केट 2026 में $10 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है, जो इस बदलाव को दिखाता है।
मैक्रोइकॉनॉमिक फैक्टर्स
मैक्रोइकॉनॉमिक माहौल भी जोखिम बढ़ा रहा है। जियोपॉलिटिकल टेंशन, बढ़ती कमोडिटी प्राइसेज और रुपए का कमजोर होना, विवेकाधीन खर्च को कम कर रहा है। मास सेगमेंट पर निर्भर ब्रांड्स के लिए यह वॉल्यूम टारगेट और प्रॉफिटेबिलिटी के लिए एक बड़ा खतरा है। प्रीमियम सेगमेंट भले ही मजबूत हो, लेकिन इसका मार्केट साइज छोटा होने के कारण यह अकेले कम कीमत वाले सेगमेंट में भारी गिरावट की भरपाई नहीं कर पाएगा।
ब्रांड्स की रणनीति
आगे चलकर, ब्रांड्स अपनी स्ट्रैटेजी में सावधानी बरतेंगे और नए लॉन्च व टारगेटेड फाइनेंसिंग ऑप्शन के जरिए प्रीमियम-लेड ग्रोथ पर फोकस करेंगे। ईएमआई जैसे आसान फाइनेंसिंग ऑप्शन के सपोर्ट से प्रीमियम डिवाइसेज की लगातार डिमांड बनी रहेगी, जिससे कंज्यूमर्स अपने फोन को अपग्रेड कर सकेंगे। IDC का फोरकास्ट है कि 2026 में ओवरऑल वॉल्यूम में गिरावट आ सकती है, लेकिन इस सस्टेंड प्रीमियम डिमांड और फाइनेंस-लेड परचेजिंग के कारण वैल्यू ग्रोथ बनी रहेगी। एवरेज सेलिंग प्राइस (ASP) के और बढ़ने की उम्मीद है, जिससे मार्केट और ज्यादा वैल्यू-लेड डिवाइसेज की ओर बढ़ेगा। हालांकि, रिकवरी धीमी और असमान होने की उम्मीद है, जिसमें मास सेगमेंट में महत्वपूर्ण चुनौतियां बनी रहेंगी।