India Smartphone Market: चिप संकट का कहर! 2026 में बिक्री **15 करोड़** से नीचे, कीमतें **40%** तक बढ़ेंगी

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AuthorMehul Desai|Published at:
India Smartphone Market: चिप संकट का कहर! 2026 में बिक्री **15 करोड़** से नीचे, कीमतें **40%** तक बढ़ेंगी
Overview

ग्लोबल चिप सप्लाई में आए 'सुनामी जैसे झटके' के कारण India Smartphone Market 2026 में बुरी तरह सिकुड़ने वाला है। शिपमेंट्स **15 करोड़** यूनिट से नीचे जाने का अनुमान है, जो पिछले साल यानी 2025 के **15.2 करोड़** यूनिट से कम है। इसका मुख्य कारण मेमोरी चिप्स की बढ़ती कीमतें हैं, जो स्मार्टफोन कंपोनेंट की लागत **8-12%** तक बढ़ा रही हैं।

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चिप संकट की 'सुनामी' से सहमा भारतीय स्मार्टफोन बाजार

ग्लोबल चिप सप्लाई में मची अफरातफरी, खासकर AI इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती डिमांड के चलते, भारतीय स्मार्टफोन बाजार के लिए एक 'सुनामी जैसा झटका' साबित हो रही है। यह संकट 2026 के मध्य तक जारी रहने की उम्मीद है। सेमीकंडक्टर वेंडर्स अब हाई-बैंडविड्थ मेमोरी (HBM) चिप्स पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं, जिससे पारंपरिक DRAM और NAND फ्लैश मेमोरी की सप्लाई कम हो गई है।

कीमतों में लगी आग, बजट फोन पर सबसे ज्यादा मार

इस कमी के कारण मेमोरी चिप्स की कीमतें कई मामलों में 160% से भी ज़्यादा उछल चुकी हैं। इसका सीधा असर स्मार्टफोन के कंपोनेंट की लागत पर पड़ रहा है, जो एक मिड-रेंज डिवाइस के बिल ऑफ मटीरियल्स (BOM) में 15-20% तक की बढ़ोतरी कर सकती है। एनालिस्ट्स का अनुमान है कि कंपोनेंट की बढ़ती लागत के चलते कंज्यूमर डिवाइसेज की कीमतें 15-40% तक बढ़ सकती हैं। यही वजह है कि 2025 की चौथी तिमाही (Q4 2025) में एवरेज सेलिंग प्राइस (ASP) 4% बढ़कर $279-$282 तक पहुंच गया, जिसने डिमांड को कम कर दिया।

प्रीमियम सेगमेंट चमका, एंट्री-लेवल सेगमेंट हुआ बेदम

इस लागत दबाव ने मार्केट की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। IDC के मुताबिक, भारत में स्मार्टफोन शिपमेंट्स 2025 के 15.2 करोड़ यूनिट से घटकर 2026 में 13.2 करोड़ यूनिट रह जाने का अनुमान है। भारत के वॉल्यूम का बड़ा हिस्सा रहे $100 से कम कीमत वाले एंट्री-लेवल सेगमेंट पर अब 'स्थायी रूप से अलाभकारी' होने का खतरा मंडरा रहा है। मैन्युफैक्चरर्स पर लागत बढ़ाने या स्पेसिफिकेशन्स घटाने का दबाव है। वहीं, दूसरी तरफ, प्रीमियम सेगमेंट (₹45,000 से ऊपर) काफी मजबूत दिख रहा है। Q3 2025 में इसका मार्केट शेयर रिकॉर्ड 17% रहा, जबकि Q2 2025 में यह 37% की रफ्तार से बढ़ा। Apple ने भारत में 2025 में 1.4 करोड़ यूनिट्स शिप करके 16% की YoY ग्रोथ दर्ज की और वैल्यू के हिसाब से 29% मार्केट शेयर हासिल किया।

आर्थिक दबाव और सप्लाई चेन की चुनौतियां

कंपोनेंट की लागत के अलावा, आर्थिक दबाव और भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं भी कंज्यूमर सेंटीमेंट पर असर डाल रही हैं। लोग गैर-जरूरी इलेक्ट्रॉनिक्स की खरीदारी टाल रहे हैं। इस बीच, Vivo वॉल्यूम के हिसाब से 23% मार्केट शेयर के साथ टॉप पर है, वहीं Samsung का प्रदर्शन भी बेहतर है। हालांकि, छोटे ब्रांड्स के लिए टिके रहना मुश्किल हो रहा है। सरकार की PLI स्कीम्स और इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 जैसी पहलें डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए हैं, लेकिन ग्लोबल सप्लाई चेन की मौजूदा स्थिति और रुपये के अवमूल्यन के कारण इंपोर्ट की लागत बढ़ रही है।

पुराने फोन्स की बढ़ी डिमांड

नए बजट स्मार्टफोन की बढ़ती कीमतों के चलते, भारत का यूज्ड स्मार्टफोन मार्केट तेजी से बढ़ रहा है और 2026 तक $10 अरब तक पहुंचने का अनुमान है। रीफर्बिश्ड डिवाइसेस नए की तुलना में 20-50% कम कीमत पर मिल रहे हैं, जिससे यह उन ग्राहकों के लिए एक आकर्षक विकल्प बन गया है जो बजट की वजह से नए फोन नहीं खरीद पा रहे।

बाजार का स्थायी बदलाव

यह स्थिति भारतीय स्मार्टफोन मार्केट में एक स्थायी संरचनात्मक बदलाव का संकेत दे रही है। $100 से कम के सेगमेंट का भविष्य अनिश्चित है, जो बड़ी संख्या में ग्राहकों को हाशिए पर धकेल सकता है। रिटेलर्स, खासकर जनरल ट्रेड में, बिजनेस वॉल्यूम में 35% की गिरावट का सामना कर रहे हैं। ग्लोबल सप्लाई चेन पर निर्भरता और करेंसी की अस्थिरता इंडस्ट्री को और कमजोर कर रही है। फिलहाल, Apple और Samsung जैसी बड़ी कंपनियां प्रीमियम सेगमेंट पर फोकस करके इस संकट से उबरने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन छोटे प्लेयर्स के लिए यह एक बड़ी चुनौती है।

आगे का रास्ता: एक बदला हुआ बाजार

2025 की शुरुआत में प्रीमियम-आइजेशन और फेस्टिव डिमांड से ग्रोथ देखने को मिली थी, लेकिन साल के अंत तक आते-आते शिपमेंट्स में गिरावट आई। 2026 के लिए IDC का अनुमान है कि बाजार 13-15% तक सिकुड़ सकता है और शिपमेंट्स 15 करोड़ यूनिट से नीचे जा सकते हैं। कंज्यूमर्स के लिए कीमतें 15-20% तक बढ़ने की उम्मीद है। 2026 के अंत या 2027 तक मामूली सुधार की उम्मीद है, लेकिन तब तक स्मार्टफोन बाजार की तस्वीर काफी बदल चुकी होगी। एंट्री-लेवल डिवाइसेस का रोल कम हो जाएगा, जबकि प्रीमियम और यूज्ड-डिवाइस इकोसिस्टम मजबूत होंगे।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.