Apple का जलवा जारी! भारत का स्मार्टफोन मार्केट हुआ सिकुड़, पर प्रीमियम सेगमेंट में जबरदस्त उछाल

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AuthorNeha Patil|Published at:
Apple का जलवा जारी! भारत का स्मार्टफोन मार्केट हुआ सिकुड़, पर प्रीमियम सेगमेंट में जबरदस्त उछाल
Overview

महंगी हो रही स्मार्टफोन मेमोरी चिप्स (DRAM और NAND फ्लैश) की वजह से भारत का स्मार्टफोन मार्केट 2026 तक **10-12%** तक सिकुड़ने का अनुमान है। बढ़ती कीमतों से परेशान होकर ग्राहक फोन अपग्रेड करने से कतरा रहे हैं, खासकर बजट सेगमेंट में। वहीं, Apple ने प्रीमियम सेगमेंट में गजब का प्रदर्शन किया है, जिससे उसका वैल्यू शेयर भी बढ़ा है।

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कॉम्पोनेंट की बढ़ती कीमतों का असर

साइबरमीडिया रिसर्च (CMR) की रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में भारत के स्मार्टफोन शिपमेंट्स में 10-12% की गिरावट आने की आशंका है। यह गिरावट Q1 2026 में पहले ही 2% साल-दर-साल दर्ज की गई है, जो हाल के वर्षों में सबसे कमजोर तिमाही प्रदर्शनों में से एक है। इस बड़ी गिरावट का मुख्य कारण 2025 और 2026 में DRAM और NAND फ्लैश मेमोरी चिप्स की कीमतों में आई जबरदस्त तेजी है। इन बढ़ते कॉम्पोनेंट खर्चों के चलते मैन्युफैक्चरर्स को डिवाइस की कीमतें बढ़ानी पड़ी हैं, जिसके कारण कई किफ़ायती फोन खरीदार अपना अपग्रेड टाल रहे हैं। सबसे बुरी मार बजट सेगमेंट पर पड़ी है, जहां Q1 2026 में शिपमेंट्स में 46% की भारी कमी आई है और आगे भी बिक्री घटने और मार्जिन पर दबाव बने रहने की उम्मीद है।

Apple का प्रीमियम सेगमेंट में दबदबा

बाजार की इन मुश्किलों के विपरीत, Apple ने भारत में ज़बरदस्त लचीलापन और ग्रोथ दिखाई है। Q1 2026 में कंपनी ने 9% का शिपमेंट शेयर हासिल किया, जो iPhone 16 और नए लॉन्च हुए iPhone 17 सीरीज की बिक्री से संचालित हुआ। इस प्रदर्शन ने दिखाया कि प्रीमियम सेगमेंट मेमोरी-ड्रिवन प्राइसिंग के दबाव से कितना अछूता है। Apple का भारतीय स्मार्टफोन मार्केट में वैल्यू शेयर 2025 में रिकॉर्ड 28% पर पहुंच गया, जो 2024 के 23% से काफी ऊपर है। यह डोमिनेंस भारत में 'प्रीमियम-फॉर-नथिंग' ट्रेंड से प्रेरित है, जहां ग्राहक ज़्यादातर हाई-एंड डिवाइस चुन रहे हैं, जिससे प्रीमियम सेगमेंट (>₹30,000) वॉल्यूम के हिसाब से सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली कैटेगरी बन गई है। Apple की सफलता का श्रेय उसके iPhone मॉडल्स की मजबूत पकड़, आक्रामक फाइनेंसिंग स्कीम्स, ट्रेड-इन ऑफर्स, बढ़ता रिटेल प्रेजेंस और ग्राहकों की बढ़ती चाहत को जाता है। मई 2026 तक, Apple का मार्केट कैप लगभग $4.15 ट्रिलियन था और इसका P/E रेश्यो 30s की शुरुआत में चल रहा था, जो निवेशकों के इसके प्रीमियम स्ट्रैटेजी और इकोसिस्टम पर विश्वास को दर्शाता है।

अन्य ब्रांड्स का प्रदर्शन

Q1 2026 की तिमाही में भारत के प्रमुख स्मार्टफोन प्लेयर्स का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। Vivo 21% वॉल्यूम शेयर के साथ लीडर बना रहा, जिसने 1% साल-दर-साल ग्रोथ दिखाई और 5G सेगमेंट में भी टॉप पर रहा। Samsung 17% शेयर के साथ दूसरे स्थान पर रहा, लेकिन शिपमेंट्स में 8% की गिरावट देखी गई। Oppo अकेली ऐसी टॉप-5 ब्रांड रही जिसने 12% की ग्रोथ और 14% मार्केट शेयर दर्ज किया। Xiaomi और Realme को गिरावट का सामना करना पड़ा, जिनके शिपमेंट्स में क्रमशः 7% और 12% की कमी आई, और उन्होंने 12% और 10% मार्केट शेयर बनाए रखा। Transsion और OnePlus जैसी कंपनियों ने बड़ी गिरावट दर्ज की, शिपमेंट्स में 30% और 28% की कमी आई। वहीं, ग्लोबल स्मार्टफोन मार्केट में भी कॉन्ट्रैक्शन देखा गया, शिपमेंट्स में 4.1% की गिरावट आई, जो मेमोरी की कमी के कारण 10 तिमाहियों की ग्रोथ स्ट्रिक का अंत था।

लागत दबाव और भविष्य का आउटलुक

मेमोरी कॉम्पोनेंट की बढ़ती लागतें एक गंभीर स्ट्रक्चरल चुनौती पेश करती हैं। DRAM की कीमतों में 50% से ज़्यादा तिमाही-दर-तिमाही बढ़ोतरी देखी गई, और NAND फ्लैश की कीमतें Q1 2026 में 90% से ज़्यादा उछल गईं, जिसने स्मार्टफोन डिवाइस की लागतों को मौलिक रूप से बदल दिया है। यह उछाल एंट्री-लेवल डिवाइसेज पर सबसे ज़्यादा असर डालता है, जहां मेमोरी कुल लागत का 43% तक हो सकती है। जबकि Apple की इंटीग्रेटेड सप्लाई चेन और प्रीमियम पोजिशनिंग कुछ हद तक बचाव करती है, कई Android मैन्युफैक्चरर्स, खासकर लो-टू-मिड-रेंज सेगमेंट में, मार्जिन पर भारी दबाव का सामना कर रहे हैं। इन बढ़ी हुई कीमतों को ग्राहकों पर डालने से मांग और कम हो सकती है, खासकर प्राइस-सेंसिटिव इमर्जिंग मार्केट में जहां कीमतें 40-50% तक बढ़ सकती हैं। 2026 तक मेमोरी की ग्लोबल सप्लाई की कमी बने रहने की उम्मीद है, जिससे पता चलता है कि लागत का दबाव मार्केट की गतिशीलता को आकार देता रहेगा।

हालांकि, भारतीय कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स मार्केट में कुल मिलाकर विस्तार की उम्मीद है, जिसमें बढ़ती आय और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के कारण 2026 से 2033 तक 7.8% का CAGR (कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट) रहने का अनुमान है। इसमें स्मार्टफोन रेवेन्यू का सबसे बड़ा सेगमेंट बना रहेगा। स्मार्टफोन मार्केट का आउटलुक एक जारी मार्केट स्प्लिट की ओर इशारा करता है: प्रीमियम सेगमेंट में लगातार डिमांड और वैल्यू ग्रोथ, जिसका नेतृत्व Apple जैसी ब्रांड्स कर रही हैं, जबकि मास मार्केट वॉल्यूम की चुनौतियों और मार्जिन प्रेशर का सामना करता रहेगा, जो बढ़ती कॉम्पोनेंट लागतों से और बिगड़ जाएगा। शिपमेंट वॉल्यूम पर दबाव के बावजूद, इस प्रीमियम-फॉर-नथिंग ट्रेंड के कारण मार्केट के कुल वैल्यू में वृद्धि होने की उम्मीद है।

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