डिजिटल संप्रभुता की ओर भारत: टेक कंपनियों से 'फेयर पे' और AI रॉयल्टी की मांग!

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
डिजिटल संप्रभुता की ओर भारत: टेक कंपनियों से 'फेयर पे' और AI रॉयल्टी की मांग!
Overview

भारत सरकार डिजिटल दुनिया में अपनी पकड़ मजबूत करने जा रही है। मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को देश के संविधान और कानूनों का पालन करना होगा। साथ ही, सरकार कंटेंट क्रिएटर्स और न्यूज़ पब्लिशर्स के लिए ग्लोबल टेक कंपनियों से 'फेयर रेवेन्यू शेयरिंग' की मांग कर रही है। इतना ही नहीं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और कॉपीराइट को लेकर भी नए नियम बनाए जाएंगे, जो डिजिटल संप्रभुता की दिशा में एक बड़ा कदम है।

प्लेटफॉर्म्स को अब मानने होंगे भारतीय कानून

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने जोर देकर कहा है कि भारत में काम कर रहे सभी सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को देश के संविधान और कानूनों के दायरे में ही काम करना होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर संवैधानिक सीमाओं और राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था जैसे तर्कों के आधार पर उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69A इस संबंध में एक महत्वपूर्ण कानूनी हथियार है। मंत्रालय ने यह भी साफ किया कि अदालतों ने सरकारी ब्लॉकिंग आर्डर्स को लगातार बरकरार रखा है, जिससे यह साफ होता है कि प्लेटफॉर्म्स को भारतीय कानूनों, खासकर सेक्शन 79 के तहत मध्यस्थ (intermediary) प्रावधानों का पालन करना ही होगा।

कंटेंट क्रिएटर्स और पब्लिशर्स को मिलेगा 'फेयर शेयर'

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ग्लोबल टेक दिग्गजों को सीधी चेतावनी दी है कि वे भारतीय कंटेंट क्रिएटर्स, पत्रकारों और न्यूज़ पब्लिशर्स के साथ 'फेयर रेवेन्यू शेयरिंग' करें। सरकार का मानना है कि मौजूदा व्यवस्था में बड़ी टेक कंपनियाँ दूसरों के कंटेंट से मुनाफा तो कमा रही हैं, लेकिन उसका उचित हिस्सा उन लोगों तक नहीं पहुँच रहा है जिन्होंने वह कंटेंट बनाया है। भारत का डिजिटल विज्ञापन बाज़ार तेज़ी से बढ़ रहा है, जिसके 2026 तक ₹69,856 करोड़ तक पहुँचने का अनुमान है। इसके बावजूद, डिजिटल न्यूज़ पब्लिशर्स को कुल डिजिटल विज्ञापन राजस्व का केवल लगभग 5.7% ही मिल पाता है। इस पहल को ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के मॉडल से प्रेरित बताया जा रहा है, जहाँ गूगल और मेटा जैसी कंपनियों को न्यूज़ कंटेंट के लिए भुगतान करना पड़ता है। सरकार का मानना है कि यह कदम विश्वसनीय पत्रकारिता को बनाए रखने के लिए बेहद ज़रूरी है।

AI और कॉपीराइट का नया युग

इसके साथ ही, भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और कॉपीराइट को लेकर भी एक व्यापक नियामक ढांचा तैयार कर रहा है। चर्चाएँ इस बात पर तेज़ी से आगे बढ़ रही हैं कि AI कंपनियों को अपने कमर्शियल मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिए कॉपीराइटेड सामग्री का उपयोग करने पर रॉयल्टी का भुगतान करना पड़ सकता है। इसके लिए 'वन नेशन, वन लाइसेंस, वन पेमेंट' जैसा एक हाइब्रिड मॉडल प्रस्तावित है, जिसे एक नई 'कॉपीराइट रॉयल्टीज़ कलेक्टिव फॉर AI ट्रेनिंग (CRCAT)' द्वारा प्रबंधित किया जाएगा। इसका मकसद लाइसेंसिंग को सरल बनाना और क्रिएटर्स को उचित भुगतान सुनिश्चित करना है। सरकार यह भी मानती है कि AI-जनित कंटेंट के लिए स्पष्ट लेबलिंग की ज़रूरत है और इसे ख़बरों के ख़ास महत्व को भी ध्यान में रखना होगा।

आगे की राह: डिजिटल संप्रभुता पर फोकस

सरकार का यह रूख साफ संकेत देता है कि वह अपने डिजिटल इकोसिस्टम पर अधिक नियंत्रण और रणनीतिक प्रबंधन की ओर बढ़ रही है। संवैधानिक अनुपालन, कंटेंट क्रिएटर्स के लिए आर्थिक न्याय और AI व कॉपीराइट के लिए एक मजबूत ढांचा, यह सब राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए भारत के डिजिटल भविष्य को आकार देने के निरंतर प्रयास को दर्शाता है। हालाँकि, यह नया नियामक माहौल ग्लोबल टेक फर्मों के लिए अनुपालन की चुनौतियाँ खड़ी कर सकता है और कुछ अनिश्चितताएँ भी पैदा कर सकता है।

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