AI कंटेंट पर भारत का बड़ा कदम! MeitY ने बढ़ाई डेडलाइन, **2026** तक सुझाव दे सकेंगे

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
AI कंटेंट पर भारत का बड़ा कदम! MeitY ने बढ़ाई डेडलाइन, **2026** तक सुझाव दे सकेंगे
Overview

भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) द्वारा बनाए गए कंटेंट को लेबल करने संबंधी प्रस्तावित IT नियमों पर सार्वजनिक सलाह-मशविरे की आखिरी तारीख को **7 मई 2026** तक बढ़ा दिया है। इस कदम से भारत की डिजिटल इकोनॉमी पर सरकारी निगरानी और सख्त होने के संकेत मिल रहे हैं।

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AI कंटेंट रूल्स पर कंसल्टेशन की डेडलाइन बढ़ी

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 में प्रस्तावित संशोधनों के लिए सार्वजनिक परामर्श की अवधि एक बार फिर बढ़ा दी है। अब हितधारकों के पास 7 मई 2026 तक फीडबैक जमा करने का समय होगा। यह दूसरी बार है जब यह डेडलाइन बढ़ाई गई है, जो प्रस्तावित बदलावों की विस्तृत समीक्षा और संभावित जटिलता को दर्शाता है। इन बदलावों को पहली बार मार्च 2026 में प्रस्तावित किया गया था और इनका उद्देश्य प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी बढ़ाना तथा डिजिटल मीडिया पर सख्त निगरानी शुरू करना है।

AI कंटेंट के लिए स्पष्ट लेबल अनिवार्य

प्रस्तावित संशोधनों का एक मुख्य हिस्सा AI-जनित या बदले गए कंटेंट के लिए सख्त नियम लाना है। रूल 3(3)(a)(ii) में संशोधन किया जा रहा है ताकि विजुअल मीडिया में AI-जनित या बदले गए कंटेंट को स्पष्ट रूप से और लगातार लेबल करना अनिवार्य हो। यह कदम गलत सूचना (misinformation) और डीपफेक (deepfakes) से लड़ने में मदद करेगा, जिससे यूजर्स असली कंटेंट और AI क्रिएशन के बीच आसानी से फर्क कर सकें। नियम AI द्वारा कृत्रिम रूप से बनाए गए या बदले गए किसी भी ऑडियो या विजुअल सामग्री को परिभाषित करते हैं जो वास्तविक प्रतीत हो सकती है। सरकार ने अवैध कंटेंट को हटाने की समय-सीमा को भी छोटा कर दिया है, कुछ मामलों में इसे केवल दो से तीन घंटे कर दिया गया है।

भारत वैश्विक AI रेगुलेशन ट्रेंड्स के साथ तालमेल बिठा रहा

AI कंटेंट को लेबल करने पर भारत का बढ़ता फोकस AI क्रिएशन को रेगुलेट करने की वैश्विक प्रवृत्ति के अनुरूप है। यूरोपीय संघ (EU) का AI एक्ट, जो अगस्त 2026 से प्रभावी होगा, मशीन-रीडेबल लेबल और AI कंटेंट के लिए यूजर डिस्क्लोजर की मांग करता है। चीन को भी स्पष्ट लेबल और मेटाडेटा की आवश्यकता होती है। अमेरिका विभिन्न राज्य नियमों और पारदर्शिता व डिजिटल प्रतिकृतियों पर प्रस्तावित राष्ट्रीय कानूनों का पालन कर रहा है। भारत की रणनीति में दृश्य लेबलिंग को आवश्यक मेटाडेटा और त्वरित हटाए जाने वाले नियमों के साथ जोड़कर AI मीडिया के लिए एक व्यापक ढांचा तैयार किया गया है।

डिजिटल इकोनॉमी का संदर्भ और सेक्टर पर प्रभाव

ये नए नियम भारत की तेजी से बढ़ती डिजिटल इकोनॉमी के बीच आए हैं। डिजिटल मीडिया मार्केट 2025 में लगभग $29 बिलियन का था और 2034 तक $111 बिलियन से अधिक होने की उम्मीद है, जो 15.62% की सालाना दर से बढ़ रहा है। डिजिटल विज्ञापन बाजार 2030 तक लगभग दोगुना होकर $22 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है, जिसका मुख्य कारण इंटरनेट और स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं की बढ़ती संख्या है। हालांकि, भारत का IT सेक्टर AI से होने वाले बदलावों के अनुकूल हो रहा है। जहां AI नए व्यावसायिक अवसर प्रदान करता है, वहीं विश्लेषकों का अनुमान है कि यह कुछ सेवाओं के लिए कीमतें कम कर सकता है, जिससे मौजूदा आय प्रभावित हो सकती है। IT रूल्स डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए 'नियामक ड्रैग' (regulatory drag) पैदा कर सकते हैं, जिससे ऑपरेटिंग लागत बढ़ सकती है और संभावित रूप से तेजी से बढ़ती कंपनियों का मूल्य कम हो सकता है।

अनुपालन की चुनौतियाँ और रणनीतिक जोखिम

प्रस्तावित संशोधन प्लेटफॉर्म और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स के लिए नियमों का पालन करने में बड़ी चुनौतियाँ पेश करते हैं। AI कंटेंट के लिए हमेशा-दिखने वाले लेबल और छोटी टेकडाउन डेडलाइन को पूरा करने के लिए टेक्नोलॉजी में बड़े निवेश और ऑपरेशंस में बदलाव की आवश्यकता होगी। इन नियमों को लागू करना छोटे प्लेटफॉर्म और क्रिएटर्स के लिए बहुत मुश्किल हो सकता है, जिससे नवाचार और नए बाजार प्रवेशकों की गति धीमी हो सकती है। इसके अलावा, प्लेटफॉर्म्स के लिए सभी सरकारी सलाहों का कड़ाई से पालन करने की आवश्यकता सरकारी नियंत्रण को बढ़ाती है, जिसे 'ओपन, सेफ एंड ट्रस्टेड इंटरनेट' के लिए आवश्यक बताया गया है, लेकिन यह अत्यधिक सेंसरशिप और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को प्रभावित करने की चिंताओं को जन्म देता है। दुनिया भर में नियम तेजी से बदल रहे हैं। भारत एक अलग AI कानून बनाने के बजाय, IT रूल्स जैसे मौजूदा कानूनों में AI नियम जोड़ रहा है, जो अधिक डिजिटल जिम्मेदारी के प्रति प्रतिबद्धता दिखाता है। परामर्श अवधि बढ़ाने से पता चलता है कि सरकार इन महत्वपूर्ण नियमों को अंतिम रूप देने से पहले विस्तृत इनपुट मांग रही है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.