इनोवेशन हब बनने की बड़ी तैयारी
भारत अब ग्लोबल इनोवेशन हब बनने की ओर तेजी से बढ़ रहा है। इसी दिशा में फरवरी 2024 में 'अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन' (ANRF) ने काम शुरू कर दिया है। साथ ही, ₹1 लाख करोड़ की एक बड़ी 'अनुसंधान, विकास और नवाचार' (RDI) स्कीम भी लाई गई है। ANRF का मुख्य उद्देश्य विज्ञान और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में रिसर्च, इनोवेशन और एंटरप्रेन्योरशिप को बढ़ावा देना है। इस फाउंडेशन के फैसले लेने के लिए एक गवर्निंग काउंसिल और एग्जीक्यूटिव काउंसिल बनाई गई है।
इसके अलावा, स्वदेशी 6G टेक्नोलॉजी विकसित करने वाले ग्रुप 'भारत 6G अलायंस' (Bharat 6G Alliance) के सदस्यों की संख्या मार्च 2026 तक 14 से बढ़कर 85 हो जाने की उम्मीद है। इन प्रयासों को विभिन्न रिसर्च प्रोग्राम्स और ग्रांट्स का भी सहारा मिल रहा है।
ग्लोबल R&D खर्च और भारत की स्थिति
ANRF के लिए 2023 से 2028 तक ₹50,000 करोड़ का फंड आवंटित किया गया है, जिसमें ₹14,000 करोड़ केंद्र सरकार से आएंगे और बाकी पब्लिक व प्राइवेट सोर्सेज से। यह एक अहम घरेलू निवेश है। हालांकि, दुनिया भर में R&D पर होने वाला खर्च इससे कहीं ज्यादा है। अमेरिका और चीन जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हर साल AI, सेमीकंडक्टर और एडवांस्ड कम्युनिकेशन जैसे क्षेत्रों में अरबों डॉलर खर्च करती हैं। भारत का R&D पर खर्च, जो आमतौर पर जीडीपी का 0.7-0.8% रहता है, दक्षिण कोरिया (लगभग 5%) और अमेरिका (3% से ज्यादा) जैसे देशों से काफी पीछे है।
6G टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में पेटेंट फाइलिंग में चीन, दक्षिण कोरिया और अमेरिका का दबदबा है। भारत के लगभग 4,000 फाइल किए गए पेटेंट्स ग्लोबल पूल में एक शुरुआती योगदान हैं। ग्लोबल 6G पेटेंट्स का 10% हिस्सा हासिल करने के लिए सिर्फ पेटेंट फाइल करना ही काफी नहीं होगा, बल्कि उन्हें सफलतापूर्वक कमर्शियलाइज भी करना होगा।
एग्जीक्यूशन की राह में बाधाएं
भारी-भरकम फंडिंग के बावजूद, भारत के लिए ग्लोबल इनोवेशन लीडरशिप की राह आसान नहीं है। ऐतिहासिक रूप से, सरकारी रिसर्च प्रोजेक्ट्स में अक्सर देरी हुई है और अकादमिक खोजों को कमर्शियली सफल उत्पादों में बदलने में मुश्किलें आई हैं। ब्यूरोक्रेसी की जटिल प्रक्रियाएं और बिखरा हुआ इनोवेशन इकोसिस्टम, जिसमें कुछ खास क्षेत्रों को छोड़कर प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी कम है, चिंता का विषय बने हुए हैं।
इसके अलावा, 6G जैसी एडवांस्ड टेक्नोलॉजी को विकसित करने के लिए सेमीकंडक्टर्स जैसे अहम कंपोनेंट्स की ग्लोबल सप्लाई चेन पर निर्भर रहना पड़ता है। जियोपॉलिटिकल टेंशन और संभावित ट्रेड रिस्ट्रिक्शन्स इन जरूरी रिसोर्सेज तक पहुंच को बाधित कर सकते हैं, जिससे भारत के डेवलपमेंट टाइमलाइन और ग्लोबल कॉम्पिटिटिवनेस पर असर पड़ सकता है। ANRF और RDI स्कीम की सफलता इन स्ट्रक्चरल इश्यूज को दूर करने और तेजी से टेक्नोलॉजिकल प्रोग्रेस के लिए एक फुर्तीला माहौल बनाने पर निर्भर करेगी।
आगे का रास्ता
कम्युनिकेशन मिनिस्ट्री भारत की 6G टेक्नोलॉजी में ग्लोबल लीडर बनने की क्षमता को लेकर आश्वस्त है, जिसके लिए व्यापक रिसर्च और इनोवेशन एफर्ट्स का फायदा उठाया जाएगा। ₹1 लाख करोड़ की RDI स्कीम एनर्जी ट्रांजिशन, क्वांटम कंप्यूटिंग, AI, बायोटेक्नोलॉजी और डिजिटल एग्रीकल्चर जैसे प्रमुख सेक्टर्स को टारगेट करती है, जो फाउंडेशनल रिसर्च के प्रति दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
सफलता के लिए रिसर्च को मार्केट एप्लीकेशन से जोड़ने, इंडस्ट्री-अकैडेमिया सहयोग को बढ़ावा देने और जटिल ग्लोबल टेक्नोलॉजिकल व जियोपॉलिटिकल परिदृश्य को नेविगेट करने पर लगातार फोकस करना होगा। भारत की इनोवेशन महत्वाकांक्षाओं को अंततः इन स्ट्रैटेजीज को लगातार लागू करने और ग्लोबली कॉम्पिटिटिव रिजल्ट्स हासिल करने की उसकी क्षमता से मापा जाएगा।